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चिट्टा सच...: आठ माह में 150 युवा हेरोइन से मरे... माएं तड़प रहीं, घर उजड़ रहे; फिर भी ये सियासी मुद्दा नहीं
Thu, 05 Sep 2024 01:14 PM IST
शाहरुख खान
अजय मीनिया, अमर उजाला, जम्मू
अजय मीनिया, अमर उजाला, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 05 Sep 2024 01:14 PM IST
सार
पंजाब की तरह जम्मू भी चिट्टे की चपेट में आकर आठ माह में 150 युवाओं की मौत हो गई। चार साल में मामले दोगुने हो गए हैं। तस्करी के रूट बढ़ गए हैं। फिर भी ये सियासी मुद्दा नहीं है।
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Jammu Assembly Election
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब के बाद अब जम्मू नशे का ट्रांजिट कैंप बन गया है। अभिभावकों, नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ रही टीम जम्मू के प्रधान जोरावर सिंह व पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक आठ महीने में 150 युवकों की हेरोइन (चिट्टा) की ओवरडोज से मौत हो चुकी है। माएं तड़प रही हैं। घर उजड़ रहे हैं लेकिन पार्टियों के लिए विधानसभा चुनाव में ये मुद्दा नहीं है।
चिट्टे के नाम से मशहूर हेरोइन का इस्तेमाल करने वाले प्रदेश में चार वर्ष में दोगुने हो गए हैं। शहर की रेशम घर कॉलोनी में रहने वाले वार्ड प्रधान पवन शर्मा का दावा है कि उनके बेटे समेत डेढ़ साल में चिट्टे से 11 मौतें हो चुकी हैं। तस्करी के मामले और इसमें गिरफ्तार होने वालों की संख्या भी दोगुनी हो गई है।
नशा छुड़ाने के लिए अस्पताल में पहुंचने वालों की संख्या भी दोगुनी है। नशा तस्करी के रूट बढ़ गए हैं। पिछले दस वर्ष में जम्मू की ये तस्वीर बदलने में अभी तक की सरकारें सफल नहीं हो पाई हैं। अब विधानसभा चुनाव है। नेता 370 की बहाली से लेकर राज्य के दर्जे, बेरोजगारी को मुद्दा बना रहे हैं लेकिन नशे की दलदल में फंस रहे प्रदेश को बाहर निकालने का किसी के पास रोडमैप नहीं है।
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जम्मू कश्मीर में तस्करी के 150 रूट हैं। इनमें कुपवाड़ा, बारामूला, राजोरी, पुंछ सीमा, सांबा, कठुआ और जम्मू सीमा स्थित गांव शामिल हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, अपनी पार्टी के घोषणापत्र में नशे पर रोकथाम का कोई जिक्र नहीं है।
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चिट्टे के नाम से मशहूर हेरोइन का इस्तेमाल करने वाले प्रदेश में चार वर्ष में दोगुने हो गए हैं। शहर की रेशम घर कॉलोनी में रहने वाले वार्ड प्रधान पवन शर्मा का दावा है कि उनके बेटे समेत डेढ़ साल में चिट्टे से 11 मौतें हो चुकी हैं। तस्करी के मामले और इसमें गिरफ्तार होने वालों की संख्या भी दोगुनी हो गई है।
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नशा छुड़ाने के लिए अस्पताल में पहुंचने वालों की संख्या भी दोगुनी है। नशा तस्करी के रूट बढ़ गए हैं। पिछले दस वर्ष में जम्मू की ये तस्वीर बदलने में अभी तक की सरकारें सफल नहीं हो पाई हैं। अब विधानसभा चुनाव है। नेता 370 की बहाली से लेकर राज्य के दर्जे, बेरोजगारी को मुद्दा बना रहे हैं लेकिन नशे की दलदल में फंस रहे प्रदेश को बाहर निकालने का किसी के पास रोडमैप नहीं है।
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जम्मू कश्मीर में तस्करी के 150 रूट हैं। इनमें कुपवाड़ा, बारामूला, राजोरी, पुंछ सीमा, सांबा, कठुआ और जम्मू सीमा स्थित गांव शामिल हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, अपनी पार्टी के घोषणापत्र में नशे पर रोकथाम का कोई जिक्र नहीं है।
प्रदेश में नशा तस्करी ने सामाजिक, आर्थिक व स्वास्थ्य पर बड़ा असर डाला है। सूचना विभाग और पुलिस महकमे के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2023 से लेकर 2024 तक हर दिन औसतन पांच मामले हेरोइन बरामदगी के दर्ज हो रहे हैं और छह लोग गिरफ्तार हो रहे हैं।
अभिभावकों का दर्द....आंखों के सामने बुझ गया घर का चिराग
जम्मू के वार्ड 13 के पार्षद पवन शर्मा बताते हैं कि मैंने आंखों के सामने अपने बेटे पंकज को मरता देखा। वह नशे की लत में जकड़ चुका था। मार्च 2024 में चिट़्टे की ओवरडोज से उसकी मौत हुई। मैं आईजी और एसएसपी से लेकर एडीजीपी तक गया और नशा बेचने वालों पर कार्रवाई करने की अपील की लेकिन कुछ नहीं हुआ।
जम्मू के वार्ड 13 के पार्षद पवन शर्मा बताते हैं कि मैंने आंखों के सामने अपने बेटे पंकज को मरता देखा। वह नशे की लत में जकड़ चुका था। मार्च 2024 में चिट़्टे की ओवरडोज से उसकी मौत हुई। मैं आईजी और एसएसपी से लेकर एडीजीपी तक गया और नशा बेचने वालों पर कार्रवाई करने की अपील की लेकिन कुछ नहीं हुआ।
बेटे के संस्कार के लिए पैसे न थे
रेशमघर की ही रहने वाली आशा रानी का 24 वर्ष का बेटा अंकुश नशे की ओवरडोज से मर गया। आशा ने बताया कि वह घर का सामान बेच देता था। 28 सितंबर 2023 को उसकी मौत हो गई। वह बख्शी नगर थाने में पांच बार गईं और गुहार लगाई कि नशा बेचने वालों पर कार्रवाई करें। मेरे पास संस्कार तक के लिए पैसे नहीं थे।
रेशमघर की ही रहने वाली आशा रानी का 24 वर्ष का बेटा अंकुश नशे की ओवरडोज से मर गया। आशा ने बताया कि वह घर का सामान बेच देता था। 28 सितंबर 2023 को उसकी मौत हो गई। वह बख्शी नगर थाने में पांच बार गईं और गुहार लगाई कि नशा बेचने वालों पर कार्रवाई करें। मेरे पास संस्कार तक के लिए पैसे नहीं थे।
नशा करने वालों की संख्या दोगुनी
जम्मू नशा मुक्ति केंद्र के अनुसार वर्ष 2021 में जम्मू के नशामुक्ति केंद्र में 600 लोग नशा छुड़ाने के लिए पंजीकृत हुए। ये आंकड़ा अब 1070 पहुंच चुका है। वर्ष 2021 में हर दिन औसतन 10 नए लोग नशे की लत छुड़ाने आते थे। अब हर दिन औसतन 30 से 50 लोग पहुंच रहे हैं।
जम्मू नशा मुक्ति केंद्र के अनुसार वर्ष 2021 में जम्मू के नशामुक्ति केंद्र में 600 लोग नशा छुड़ाने के लिए पंजीकृत हुए। ये आंकड़ा अब 1070 पहुंच चुका है। वर्ष 2021 में हर दिन औसतन 10 नए लोग नशे की लत छुड़ाने आते थे। अब हर दिन औसतन 30 से 50 लोग पहुंच रहे हैं।
ऐसे फंसाते हैं जाल में
होरोइन की एक डोज दो से तीन हजार की है। पहले नशा तस्कर युवाओं को निशुल्क डोज देते हैं। एक बार ही में ही इसकी लत लग जाती है। लत लगने वाला इसका सेवन करने के लिए सप्लाई चेन में शामिल हो जाता है। पैसे की आपूर्ती के लिए वह अपराध करता है। चोरी के 80 फीसदी मामलों में नशेड़ी शामिल रहते हैं।
होरोइन की एक डोज दो से तीन हजार की है। पहले नशा तस्कर युवाओं को निशुल्क डोज देते हैं। एक बार ही में ही इसकी लत लग जाती है। लत लगने वाला इसका सेवन करने के लिए सप्लाई चेन में शामिल हो जाता है। पैसे की आपूर्ती के लिए वह अपराध करता है। चोरी के 80 फीसदी मामलों में नशेड़ी शामिल रहते हैं।
मौत का नशा...जिसने एक बार चखा, फिर नहीं बचा
गांजा, चरस और भुक्की, ये सब अफीम से तैयार होने वाले नशे हैं। हेरोइन एक सिंथेटिक ड्रग्स है। ये सबसे घातक है। इसे भी अफीम से तैयार किया जाता है। ये दिमाग पर अफीम से 100 गुना अधिक असर करती है। इसका एक बार सेवन कर लिया तो यह लत सांस के साथ ही छूटती है। -डॉ. जगदीश थापा, रिटायर एचओडी मनोचिकित्सक विभाग
गांजा, चरस और भुक्की, ये सब अफीम से तैयार होने वाले नशे हैं। हेरोइन एक सिंथेटिक ड्रग्स है। ये सबसे घातक है। इसे भी अफीम से तैयार किया जाता है। ये दिमाग पर अफीम से 100 गुना अधिक असर करती है। इसका एक बार सेवन कर लिया तो यह लत सांस के साथ ही छूटती है। -डॉ. जगदीश थापा, रिटायर एचओडी मनोचिकित्सक विभाग
केवल 10 फीसदी नशा पकड़ा जाता है
चार वर्ष में 600 किलो के करीब हेरोइन मिली है। ये बरामदगी का 10 फीसदी ही है। पाकिस्तान से हेरोइन आती है। 90 फीसदी सप्लाई तो पकड़ में ही नहीं आती। पाकिस्तान हेरोइन से पैसा कमाकर आतंकी गतिविधियों में लगा रहा है।-एसपी वैद, पूर्व डीजीपी
चार वर्ष में 600 किलो के करीब हेरोइन मिली है। ये बरामदगी का 10 फीसदी ही है। पाकिस्तान से हेरोइन आती है। 90 फीसदी सप्लाई तो पकड़ में ही नहीं आती। पाकिस्तान हेरोइन से पैसा कमाकर आतंकी गतिविधियों में लगा रहा है।-एसपी वैद, पूर्व डीजीपी
एलओसी और आईबी के रास्ते आसानी से पहुंच
जम्मू एक तरफ एलओसी और आईबी से लगता है, तो दूसरी तरफ पंजाब के साथ। दोनों ही जगह आसानी से नशा उपलब्ध है। युवा इसकी चपेट में आ जाते हैं। इससे बचने के लिए अभिभावकों, शिक्षकों और स्कूलों का विशेष निगरानी रखना जरूरी है। लिहाजा इसकी जागरूकता सिलेबस में हो। -प्रोफेसर विश्व रक्षा, एचओडी सामाजिक विज्ञान विभाग जम्मू यूनिवर्सिटी
जम्मू एक तरफ एलओसी और आईबी से लगता है, तो दूसरी तरफ पंजाब के साथ। दोनों ही जगह आसानी से नशा उपलब्ध है। युवा इसकी चपेट में आ जाते हैं। इससे बचने के लिए अभिभावकों, शिक्षकों और स्कूलों का विशेष निगरानी रखना जरूरी है। लिहाजा इसकी जागरूकता सिलेबस में हो। -प्रोफेसर विश्व रक्षा, एचओडी सामाजिक विज्ञान विभाग जम्मू यूनिवर्सिटी
चार साल में 6564 केस, 9400 गिरफ्तार
वर्ष 2021: 1681 केस, 2500 गिरफ्तार
वर्ष 2022: 1693 केस, 2400 गिरफ्तार
वर्ष 2023-24-3190 केस, 4500 गिरफ्तार
वर्ष 2021: 1681 केस, 2500 गिरफ्तार
वर्ष 2022: 1693 केस, 2400 गिरफ्तार
वर्ष 2023-24-3190 केस, 4500 गिरफ्तार
हेरोइन बरामदगी के मामले
वर्ष 2020-128 किलो
वर्ष 2021-198 किलो
वर्ष 2022 में 212 किलो
वर्ष 2023 -200 किलो
30 हजार करोड़ की हेरोइन चार साल में बरामद
वर्ष 2020-128 किलो
वर्ष 2021-198 किलो
वर्ष 2022 में 212 किलो
वर्ष 2023 -200 किलो
30 हजार करोड़ की हेरोइन चार साल में बरामद
हेरोइन के मामले सबसे अधिक बढ़े
एफएसएल जम्मू के पास हर दिन औसतन 20 सैंपल हेरोइन की जांच के लिए पहुंचते हैं। ये संख्या दो वर्ष पहले 4 थी। महत्वपूर्ण तो यह है कि हेरोइन के सैंपल पॉजिटिव निकल रहे हैं। मतलब साफ है कि असली हेरोइन बेची जा रही है।
एफएसएल जम्मू के पास हर दिन औसतन 20 सैंपल हेरोइन की जांच के लिए पहुंचते हैं। ये संख्या दो वर्ष पहले 4 थी। महत्वपूर्ण तो यह है कि हेरोइन के सैंपल पॉजिटिव निकल रहे हैं। मतलब साफ है कि असली हेरोइन बेची जा रही है।