{"_id":"672dd594e8581c0d180e0f9d","slug":"jammu-article-370-statehood-and-special-status-different-meanings-all-3-have-their-own-rules-and-regulations-2024-11-08","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Jammu: हंगामा क्यों है बरपा... अनुच्छेद 370, स्टेटहुड व विशेष दर्जा के मायने अलग-अलग; तीनों के अपने नियम-कानून","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu: हंगामा क्यों है बरपा... अनुच्छेद 370, स्टेटहुड व विशेष दर्जा के मायने अलग-अलग; तीनों के अपने नियम-कानून
Fri, 08 Nov 2024 02:40 PM IST
शाहरुख खान
अजय मीनिया, अमर उजाला, जम्मू
अजय मीनिया, अमर उजाला, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 08 Nov 2024 02:40 PM IST
सार
अनुच्छेद 370, स्टेटहुड और विशेष दर्जा के मायने अलग-अलग हैं। तीनों के अपने नियम-कानून हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि या तो ये नासमझी या फिर राजनीतिक दलों की चाल है।
विज्ञापन
Article 370
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चुनाव की घोषणा से लेकर विधान सभा सत्र तक अनुच्छेद 370 को लेकर संग्राम मचा है। साथ ही पूर्ण राज्य के दर्जे यानी स्टेटहुड और विशेष दर्जा दिए जाने की मांग ने जोर पकड़ा हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह इन तीनों मुद्दों को एक साथ जोड़कर देखा जा रहा है
और पूरा सत्र इन पर केन्द्रित होकर रह गया है, वो या तो नासमझी है या फिर राजनीतिक दलों की सोची-समझी चाल। क्योंकि तीनों के अपने अलग-अलग मायने हैं। विधान सभा में उमर सरकार ने प्रस्ताव रखा और पास हो गया। इसे लेकर हंगामा शुरू हो गया।
हालांकि सरकार ने विशेष दर्जा दिए जाने और संविधानिक गारंटी की बात कही है, पर सब कुछ पीछे छोड़ सुर्खियों में 370, इन तीनों को लेकर एक भ्रम सा है लोगों के बीच में। सच्चाई तो ये है कि तीनों के अपने अलग मायने हैं और नफा-नुकसान है। वरिष्ठ अधिकवक्ता असीम साहनी का कहना है कि 370 बहाल होना अब संभव नहीं है।
विज्ञापन
इसे लेकर चाहे कितने भी प्रस्ताव लाए जाएं। इसका कोई कानूनी औचित्य नहीं है। सभी दल जानते हैं। फिर भी इसको लेकर बहस करना सिर्फ लोगों को गुमराह करना है। वरिष्ठ अधिवक्ता अंकुर शर्मा का कहना है कि 370 बहाल होने का मतलब जम्मू कश्मीर को देश से एक तरह अलग कर देना है। जोकि असंभव है।
विज्ञापन
और पूरा सत्र इन पर केन्द्रित होकर रह गया है, वो या तो नासमझी है या फिर राजनीतिक दलों की सोची-समझी चाल। क्योंकि तीनों के अपने अलग-अलग मायने हैं। विधान सभा में उमर सरकार ने प्रस्ताव रखा और पास हो गया। इसे लेकर हंगामा शुरू हो गया।
विज्ञापन
हालांकि सरकार ने विशेष दर्जा दिए जाने और संविधानिक गारंटी की बात कही है, पर सब कुछ पीछे छोड़ सुर्खियों में 370, इन तीनों को लेकर एक भ्रम सा है लोगों के बीच में। सच्चाई तो ये है कि तीनों के अपने अलग मायने हैं और नफा-नुकसान है। वरिष्ठ अधिकवक्ता असीम साहनी का कहना है कि 370 बहाल होना अब संभव नहीं है।
विज्ञापन
इसे लेकर चाहे कितने भी प्रस्ताव लाए जाएं। इसका कोई कानूनी औचित्य नहीं है। सभी दल जानते हैं। फिर भी इसको लेकर बहस करना सिर्फ लोगों को गुमराह करना है। वरिष्ठ अधिवक्ता अंकुर शर्मा का कहना है कि 370 बहाल होने का मतलब जम्मू कश्मीर को देश से एक तरह अलग कर देना है। जोकि असंभव है।
तीनों का अंतर समझिए
अनुच्छेद 370
जम्मू कश्मीर में दो विधान, दो निशान
बीएमएस, आईपीसी की जगह आरपीसी
प्रदेश की कोई लड़की बाहर शादी करके यहां कोई अधिकार नहीं रखेगी
गोरखा, वाल्मिकी, रिफ्यूजी को विधानसभा में मतदान का अधिकार नहीं
छह वर्ष की असेंबली का कार्यकाल
बाहर का कोई व्यक्ति जम्मू कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकता
किसी बाहरी को नौकरी नहीं मिल सकती
अनुच्छेद 370
जम्मू कश्मीर में दो विधान, दो निशान
बीएमएस, आईपीसी की जगह आरपीसी
प्रदेश की कोई लड़की बाहर शादी करके यहां कोई अधिकार नहीं रखेगी
गोरखा, वाल्मिकी, रिफ्यूजी को विधानसभा में मतदान का अधिकार नहीं
छह वर्ष की असेंबली का कार्यकाल
बाहर का कोई व्यक्ति जम्मू कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकता
किसी बाहरी को नौकरी नहीं मिल सकती
स्टेटहुड
इसका मतलब सिर्फ एक राज्य का दर्जा मिलना है। आमतौर पर जैसे देश के विभिन्न राज्य हैं। राज्य का दर्जा मिलने पर केंद्र की जगह तमाम शक्तियां चुनी गई सरकार के पास होंगी। जोकि इस समय में उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री में बंटी हुई है। इस पर भाजपा, नेकां, पीडीपी और कांग्रेस सभी सहमत हैं।
इसका मतलब सिर्फ एक राज्य का दर्जा मिलना है। आमतौर पर जैसे देश के विभिन्न राज्य हैं। राज्य का दर्जा मिलने पर केंद्र की जगह तमाम शक्तियां चुनी गई सरकार के पास होंगी। जोकि इस समय में उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री में बंटी हुई है। इस पर भाजपा, नेकां, पीडीपी और कांग्रेस सभी सहमत हैं।
विशेष दर्जा
केंद्र विशेष दर्जा देकर कुछ लाभ दे सकती है। जैसे हिमाचल प्रदेश में किया गया है। नौकरियों, विशेष पैकेज आदि विशेष दर्जे के राज्य में शामिल किया जा सकता है। इस पर भी केंद्र सरकार विचार कर सकती है।
केंद्र विशेष दर्जा देकर कुछ लाभ दे सकती है। जैसे हिमाचल प्रदेश में किया गया है। नौकरियों, विशेष पैकेज आदि विशेष दर्जे के राज्य में शामिल किया जा सकता है। इस पर भी केंद्र सरकार विचार कर सकती है।