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Jammu Apple Orchard: 72 की उम्र में शुरू की बागवानी, एक साल में सेब से लद गए पौधे

Sun, 22 May 2022 12:00 PM IST
kumar गुलशन कुमार ओमपाल संब्याल, जम्मू
ओमपाल संब्याल, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Sun, 22 May 2022 12:00 PM IST
सार

उधमपुर के मीर गांव में बागवान प्रेमनाथ के छोटे से बगीचे में सेब की बंपर फसल को देखने अब दूर-दूर से लोग आ रहे हैं। वह अब 600 और पौधे लगाने की योजना बना रहे हैं। हाईडेंसिटी पौधरोपण से छोटे किसान भी अपनी तकदीर बदल सकते हैं।

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Jammu Apple Orchard udhampur Premnath Started Orcharding at age 72 apple laden plants in a year
मीर गांव में मेमा गाला और हेपके वैरायटी के लगे सेब - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सेवानिवृत्त जीवन में आरामतलबी से हटकर प्रेमनाथ 72 साल की उम्र में नजीर पेश करने वाले बागवान बन गए हैं। बागवानी विभाग की हाईडेंसिटी पौधरोपण योजना में उन्होंने सेब की बागवानी का तजुर्बा करने के लिए दस मरला जमीन पर एक साल पहले 75 पौधे लगाए। जैविक खाद से पोषण देने के साथ अच्छे से देखभाल की। अब एक ही साल में सेब के पौधे फलों से लद गए हैं। 

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उधमपुर की पंचैरी तहसील के मीर गांव में इस छोटे से बगीचे में सेब की बंपर फसल को देखने अब दूर-दूर से लोग आ रहे हैं। इस तजुर्बे के उत्साहजनक नतीजे देख अब प्रेमनाथ 600 और पौधे लगाने की योजना बना रहे हैं। बुजुर्ग प्रगतिशील बागवान प्रेमनाथ शिक्षा विभाग में वरिष्ठ शिक्षक पद से वर्ष 1996 में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। 

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Jammu Apple Orchard udhampur Premnath Started Orcharding at age 72 apple laden plants in a year
72 वर्षीय बागवान प्रेमनाथ - फोटो : अमर उजाला

प्रेमनाथ ने बताया कि ठंडी जलवायु वाले मीर गांव में वे इक्का दुक्का पौधे लगाकर उनकी देखभाल करते थे। एक साल पूर्व उन्हें बागवानी विभाग की ओर से हाईडेंसिटी योजना के बारे में बताया गया। उन्होंने शुरुआती चरण में 10 मरला भूमि पर 75 पौधे लगवाए, जिनमें से 70 बच पाए। एम-9 टी-337 रूट स्टॉक पर हेपके और मेमा गाला वैरायटी सेब के पौधरोपण के एक साल बाद पौधे फलों से लदे देख वे खासे उत्साहित हैं। प्रेमनाथ बताते हैं कि अब रोजाना दूर-दूर से किसान और अन्य लोग उनका बगीचा देखने पहुंच रहे हैं। अच्छी किस्म के सेब के हाईडेंसिटी पौधरोपण से छोटे किसान भी अपनी तकदीर बदल सकते हैं।

Jammu Apple Orchard udhampur Premnath Started Orcharding at age 72 apple laden plants in a year
सेब (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

एम9 रूट स्टॉक पर नई वैरायटी का है चमत्कार

सेब के पौधे से अच्छी फसल लेने के लिए छह से सात वर्ष का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन एम-9 रूट स्टॉक पर लगे अच्छी प्रजाति के सेब दूसरे या तीसरे वर्ष में ही फसल देने लगते हैं। बागवानी विभाग की योजना में जो पौधे सब्सिडी पर उपलब्ध करवाए जाते हैं, वे दूसरे देशों से आयात करवाए जाते हैं। यह पौधे दो से तीन वर्ष के होते हैं, जिसे लगाने के दूसरे ही वर्ष फसल आने लगती है।

उधमपुर समेत ठंडी जलवायु वाले क्षेत्र में हाईडेंसिटी सेब की बागवानी क्रांति ला सकती है।  कश्मीर संभाग में योजना जोर शोर से चल रही है। जम्मू संभाग में बैंक से एमओयू की प्रक्रिया पूरी होते ही उधमपुर समेत जम्मू संभाग के बागवानों को भी इस योजना का व्यापक लाभ मिलेगा। इस साल कई किसानों के आवेदन आए हैं। सभी को लाभ देने का प्रयास किया जाएगा। - राजिंदर कुमार लोचन, मुख्य बागवानी अधिकारी उधमपुर 

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सेब (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

ये है हाईडेंसिटी योजना

एक लाभार्थी न्यूतनम एक कनाल और अधिकतम 20 कनाल (एक हेक्टेयर) पर योजना का लाभ ले सकता है। 20 कनाल में 3333 पौधे लगते हैं जिसमें पौधरोपण, ट्रेली सिस्टम, एंटी हेलनेट और ड्रिप इरिगेशन पर कुल 22.15 लाख का खर्च आता है। 50 फीसदी खर्च सरकार वहन करती है और दस फीसदी राशि किसान को देनी पड़ती है। शेष 40 फीसदी पैसा किसान छह फीसदी ब्याज पर ऋण ले सकते हैं। खास बात है कि ब्याज और ऋण चुकाने की प्रक्रिया तीन व पांच साल बाद शुरू होती है, जब पौधे व्यावसायिक स्तर पर बंपर फसल देने लगते हैं। इंडो डच कंपनी और नैफेड में करार है, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर में 11 एजेंसियों को काम सौंपा गया है।

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