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जम्मू-कश्मीरः तीन साल से सब्सिडी के इंतजार में साहित्यकार, पेंशन के मामले भी अटके

Fri, 04 Sep 2020 05:13 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Fri, 04 Sep 2020 05:13 PM IST
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Jammu and Kashmir, Writer waiting for subsidy for three years, pension matters also stuck
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay

प्रदेश की लोक संस्कृति और साहित्य को अपनी लेखनी से जिंदा रखने वाले प्रदेश के साहित्यकार सरकार की उदासीनता से निराश हैं। विभिन्न भाषाओं के लेखक तीन वर्ष से अपनी पुस्तक के प्रकाशन के लिए जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी से सब्सिडी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं सर्वश्रेष्ठ पुस्तक पुरस्कार और वरिष्ठ साहित्यकारों के पेंशन से संबंधित मामले भी तीन वर्षों से अटके हुए हैं।

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साहित्यकारों के मुताबिक सरकार की घोषणा के कई सालों तक साहित्यकारों को सम्मान नहीं मिला पाता है। प्रदेश का सांस्कृतिक विभाग पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है। कोरोना महामारी के मुश्किल दौर में भी विभाग ने साहित्यकारों को प्रोत्साहन राशि देना जरूरी नहीं समझा। अकादमी डोगरी, हिंदी, पंजाबी, उर्दू, गोजरी, पहाड़ी आदि भाषाओं की पुस्तकों के प्रकाशन के लिए साहित्यकारों को सब्सिडी देती है, लेकिन अभी तक नहीं दी गई। करीब 30 करोड़ रुपये अटके हुए हैं लेकिन सांस्कृतिक विभाग मौन है।
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वरिष्ठ लेखिका और साहित्य अकादमी में डोगरी सलाहकार बोर्ड की सदस्य डॉ. सुनीता सिंह भडवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार का यह रवैया निराशाजनक है। अकादमी में स्थायी सचिव की नियुक्ति नहीं होने से साहित्यकारों को ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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यह मामला कल्चरल सेक्रेटरी के अधीन आता है। जब हमने कल्चरल सेक्रेटरी मुनीर उल इस्लाम से बात की तो उन्होंने कहा कि हमने सभी औपचारिकताएं पूरी करके सचिवालय को फाइल भेज दी है। अब तक वहां से इस संबंध में कोई आदेश नहीं आया। मंजूरी मिलते ही साहित्यकारों की मांगें पूरी कर दी जाएंगी। -जुबेर अहमद, कमिश्नर सेक्रेटरी, कल्चरल डिपार्टमेंट

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