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जम्मू-कश्मीर: मिशन कश्मीर के तहत मोदी ने गुपकार गठबंधन के साथ कांग्रेस को भी साधा
Thu, 24 Jun 2021 11:08 PM IST
करिश्मा चिब
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Thu, 24 Jun 2021 11:08 PM IST
सार
जम्मू-कश्मीर के सभी हितधारकों के साथ पाकिस्तान से बात का महबूबा राग नहीं चढ़ सका परवान। सत्ता में आने पर 370 व 35ए पर पुनर्विचार करने की कांग्रेस की बात को भी नहीं मिली तवज्जो।
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All party meeting on Jammu Kashmir
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली में वीरवार को जम्मू-कश्मीर के नेताओं की हुई सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मिशन कश्मीर के तहत गुपकार गठबंधन के साथ ही कांग्रेस को भी साधा। सत्ता में आने पर 370 व 35ए पर पुनर्विचार करने की कांग्रेस की बात को बैठक में कोई तवज्जो नहीं मिली। जम्मू-कश्मीर के सभी हितधारकों के साथ ही पाकिस्तान से भी बात करने की महबूबा की मांग परवान नहीं चढ़ सकी। दिल्ली दरबार ने कश्मीर आधारित दलों के विश्वास को भी जीतने की कोशिश की।
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घाटी में अपनी जमीन खो चुकी पीडीपी में आम कश्मीरियों का दिल जीतने की छटपटाहट है। इसलिए वह कश्मीर में अवाम के सामने तमाम वायदे कर रही है ताकि उनका भरोसा जीता जा सके। हालांकि, दिल्ली दरबार में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। पाकिस्तान से बातचीत का मुद्दा तक नहीं उठाया जा सका। यह पीडीपी की बड़ी मांग थी। महबूबा की ओर से लगातार पाकिस्तान का राग अलापा जाता रहा है।
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राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि परिसीमन के लिए सभी दलों को तैयार करना और सभी को एक मंच पर लाना है। पांच अगस्त 2019 के बाद कश्मीर आधारित सभी दल अलग-अलग राग अलाप रहे थे। सभी नेताओं के एक सुर थे। इस वजह से उन्हें एक साथ लाकर जम्मू-कश्मीर के बारे में बात करना, उनकी राय जानना और विकास में भागीदार बनाने की पहल करना बड़ी उपलब्धि की ओर इशारा करती है।
केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. बच्चा बाबू के अनुसार केंद्र सरकार ने बहुत ही संयम से जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामले को संभाला। राजनीतिक प्रक्रिया को बहाल करने और परिसीमन में सभी दलों के सहयोग का आश्वासन भी पाने में सफल रही। सीधे कश्मीर आधारित दलों की मांगों को न मानकर भाजपा ने अपने लिए भी बेहतर माहौल पैदा कर लिया। सरकार अब कह सकती है कि कश्मीर में भी केंद्र सरकार के पांच अगस्त 2019 के फैसले पर कोई सवालिया निशान नहीं लगा रहा है।
पूरे देश में संदेश देने में सफल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली में हुई बैठक में अलगाववादी एजेंडा सामने न आना मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि है। इससे 370, 35ए और पाकिस्तान के मुद्दों को दफन करने में केंद्र लगभग सफल रहा है। अब यह मुद्दे कश्मीर आधारित दल उठाएंगे भी तो उन्हें जनता को जवाब देना होगा।
बैठक से यह संदेश दिया गया कि जम्मू-कश्मीर के दल इन सब बातों को अब विशेष तवज्जो नहीं दे रहे हैं। यह बात जरूर सामने आई कि 370 व 35ए का मुद्दा सर्वोच्च अदालत में है। इस वजह से अदालत का फैसला स्वीकार्य होगा। इससे सरकार पूरे देश में संदेश में सफल हो गई कि यह सारे मुद्दे गौण हो गए हैं।
केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. बच्चा बाबू के अनुसार केंद्र सरकार ने बहुत ही संयम से जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामले को संभाला। राजनीतिक प्रक्रिया को बहाल करने और परिसीमन में सभी दलों के सहयोग का आश्वासन भी पाने में सफल रही। सीधे कश्मीर आधारित दलों की मांगों को न मानकर भाजपा ने अपने लिए भी बेहतर माहौल पैदा कर लिया। सरकार अब कह सकती है कि कश्मीर में भी केंद्र सरकार के पांच अगस्त 2019 के फैसले पर कोई सवालिया निशान नहीं लगा रहा है।
पूरे देश में संदेश देने में सफल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली में हुई बैठक में अलगाववादी एजेंडा सामने न आना मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि है। इससे 370, 35ए और पाकिस्तान के मुद्दों को दफन करने में केंद्र लगभग सफल रहा है। अब यह मुद्दे कश्मीर आधारित दल उठाएंगे भी तो उन्हें जनता को जवाब देना होगा।
बैठक से यह संदेश दिया गया कि जम्मू-कश्मीर के दल इन सब बातों को अब विशेष तवज्जो नहीं दे रहे हैं। यह बात जरूर सामने आई कि 370 व 35ए का मुद्दा सर्वोच्च अदालत में है। इस वजह से अदालत का फैसला स्वीकार्य होगा। इससे सरकार पूरे देश में संदेश में सफल हो गई कि यह सारे मुद्दे गौण हो गए हैं।