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जम्मू-कश्मीर: बर्खास्त किए गए सरकारी शिक्षक चला रहे थे आतंक की पाठशाला, युवाओं को धकेला पत्थरबाजी की तरफ

Sat, 17 Jul 2021 09:41 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Sat, 17 Jul 2021 09:41 PM IST
सार

केंद्रीय जांच एजेंसी की रिपोर्ट में खुलासा, सरकार से वेतन लेकर जमात की सभाओं में पढ़ा रहे थे देश विरोध। आतंकियों के जनाजे में कई युवाओं को बना डाला दहशतगर्द।

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Jammu and Kashmir: The dismissed government teachers were running the school of terror, pushing the youth towards stone pelting
आतंकवाद

विस्तार

आतंकवाद और अलगाववाद को बढ़ावा देने के आरोपों पर जिन सरकारी शिक्षकों को हाल ही में एलजी प्रशासन ने बर्खास्त किया है, वे आतंक की पाठशाला चला रहे थे। सूत्रों के अनुसार केंद्रीय एजेंसी की ओर से तैयार जांच रिपोर्ट में इन शिक्षकों का कच्चा चिट्ठा बताया गया है। युवाओं को बरगलाकर पत्थरबाज से लेकर आतंकी बना रहे थे। किसी ने आतंकी हमलों में दहशतगर्दों की मदद की तो कोई जमात जैसे संगठनों के लिए देश विरोधी गतिविधियों को चला रहा था।

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अब्दुल गनी तांत्रे : आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के साथ वर्ष 1990 से कनेक्शन हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार तांत्रे 1990 में अनंतनाग के हांजी मोहल्ला बटेंगू मिडिल स्कूल में शिक्षक तैनात था। उसने कुछ महीनों के अर्जित अवकाश (अर्न्ड लीव) का आवेदन किया और अपने छोटे भाई निसार अहमद तांत्रे को अस्थायी शिक्षक की तैनाती दिला दी। बाद में उसे भी स्थायी करवा दिया। दोनों भाइयों ने मिलकर युवाओं को बरगला कर आतंकवाद में झोंकना शुरू कर दिया। निसार अहमद तांत्रे हिजबुल सरगना सलाहुद्दीन का करीबी बन गया। निसार का बेटा पाकिस्तान में पढ़ाई कर रहा है, जिसका सारा खर्च सलाहुद्दीन ही उठा रहा है।
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मोहम्मद जब्बार पर्रे : जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में लेक्चरर पद से बर्खास्त पर्रे को जमात-ए-इस्लामी में छोटा गिलानी कहा जाता है। वह सरकारी एजेंसियों के रडार पर था, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों ने उसे जमात की देश विरोधी गतिविधियां जारी रखने से नहीं रोका। वह जमात के विद्यार्थियों जिसे जमात-ए-तुल्बा विंग कहा जाता है में युवाओं को उकसाकर पत्थरबाजी में झोंकता था। पर्रे ने कई आतंकियों के जनाजे का आयोजन करवाया। बताया जा रहा है कि उसने बिजबिहाड़ा में आतंकियों के जनाजे में अकेले ही एक दर्जन से ज्यादा युवाओं को आतंकी तंजीम में शामिल करवा दिया। वह मस्जिदाें से भी युवाओं को कट्टरपंथी बनाता रहा। पर्रे ने अनंतनाग जिले में कई आतंकी हमलों में जैश-ए-मोहम्मद की मदद की।
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रजिया सुल्तान : अनंतनाग में खीरम स्कूल की मुखिया रजिया को उसके पिता की जगह नौकरी मिली थी। रजिया के पिता सुल्तान भट्ट जमात-ए-इस्लामी समर्थक थे, लेकिन सुल्तान को धोखे के शक पर आतंकियों ने 1996 में मार डाला था। सुरक्षा एजेंसियों ने रजिया पर नजर रखी और उसके जमात व दुख्तरान-ए-मिल्लत से कनेक्शन होने की रिपोर्ट सरकार को सौंपी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। जांच रिपोर्ट के अनुसार रजिया जमात व दख्तरान-ए-मिल्लत के लिए सभाएं करतीं और शिक्षक होने के बावजूद लोगों को देश विरोध के लिए बरगलाती।

सकीन अख्तर : अनंतनाग के गोरजन शीरम प्राइमरी स्कूल में शिक्षक सकीन अख्तर अस्थायी शिक्षक थी, जिसे 2008 में नियमित किया गया। सकीन ने शिक्षक रहते दुख्तरान-ए-मिल्लत की गतिविधियों पर ज्यादा ध्यान दिया, जो देश विरोध से प्रेरित थीं। सरकार से वेतन लेकर सकीन पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी संगठनों के इशारे पर काम कर रही थीं।

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