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Jammu News: 18 साल पुराने सड़क हादसे में ट्रक चालक बरी, दोषसिद्धी रद्द
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। प्रधान सत्र न्यायाधीश, सांबा की अदालत ने वर्ष 2008 के सड़क हादसा मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा ट्रक चालक सतपाल को सुनाई गई दोषसिद्धी और सजा को रद्द करते हुए उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा, इसलिए उसे संदेह का लाभ दिया जाना उचित है।
अभियोजन के अनुसार, सांबा के खनवाल कैंप के निकट एक ट्रक और मोटरसाइकिल की टक्कर में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हुआ था। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने चालक को दोषी ठहराते हुए कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी, जिसे चुनौती देते हुए आरोपी ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी।
सुनवाई के दौरान सत्र न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास और असंगतियां हैं। कई कथित प्रत्यक्षदर्शियों की घटनास्थल पर मौजूदगी भी संदेहास्पद पाई गई। अदालत ने यह भी माना कि मामले के विवेचक तथा दुर्घटना में घायल सबसे महत्वपूर्ण प्रत्यक्षदर्शी को गवाही के लिए पेश नहीं किया गया, जिससे अभियोजन का मामला कमजोर हो गया। इन परिस्थितियों में अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया तथा उसके जमानती बंधपत्र समाप्त करने के आदेश दिए।
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सांबा। प्रधान सत्र न्यायाधीश, सांबा की अदालत ने वर्ष 2008 के सड़क हादसा मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा ट्रक चालक सतपाल को सुनाई गई दोषसिद्धी और सजा को रद्द करते हुए उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा, इसलिए उसे संदेह का लाभ दिया जाना उचित है।
अभियोजन के अनुसार, सांबा के खनवाल कैंप के निकट एक ट्रक और मोटरसाइकिल की टक्कर में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हुआ था। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने चालक को दोषी ठहराते हुए कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी, जिसे चुनौती देते हुए आरोपी ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी।
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सुनवाई के दौरान सत्र न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास और असंगतियां हैं। कई कथित प्रत्यक्षदर्शियों की घटनास्थल पर मौजूदगी भी संदेहास्पद पाई गई। अदालत ने यह भी माना कि मामले के विवेचक तथा दुर्घटना में घायल सबसे महत्वपूर्ण प्रत्यक्षदर्शी को गवाही के लिए पेश नहीं किया गया, जिससे अभियोजन का मामला कमजोर हो गया। इन परिस्थितियों में अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया तथा उसके जमानती बंधपत्र समाप्त करने के आदेश दिए।
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