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जम्मू-कश्मीर: भारत से न गई शक्कर-शर्बत और न पाक से आई चादर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Fri, 29 Jun 2018 03:14 PM IST
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जम्मू-कश्मीर के रामगढ़ में प्रसिद्ध चमलियाल मेले को इस बार प्रतीकात्मक रूप से मनाया गया। पहली बार भारत की ओर से न शक्कर (मिट्टी)-शर्बत दी गई और न ही पाकिस्तान की ओर से चादर आई।
इस कारण श्रद्धालुओं को अगले साल का इंतजार करना पड़ेगा। गोलाबारी के कारण भारत-पाक के बीच उपजे तनाव को देखते हुए मेला स्थगित किए जाने से करीब 5000 श्रद्धालु ही पहुंचे, जिन्होंने बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया। हर साल अमूमन ढाई लाख श्रद्धालु पहुंचते रहे हैं।
बाबा चमलियाल दरगाह वाले इलाके में पहली बार पाकिस्तान की ओर से कुछ दिन पहले गोलाबारी की गई थी, जिसमें बीएसएफ के चार जवान शहीद हो गए थे। इस कारण बीएसएफ और प्रशासन ने सीमा पर उपजे तनाव के चलते मेला नहीं लगाने का निर्णय लिया था।
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स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए केवल प्रतीकात्मक पूजा की अनुमति दी गई थी। स्थानीय लोगों ने मजार पर चादर चढ़ाई। पवित्र तालाब को कंटीले तार लगाकर सील कर दिया गया था।
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इस कारण श्रद्धालुओं को अगले साल का इंतजार करना पड़ेगा। गोलाबारी के कारण भारत-पाक के बीच उपजे तनाव को देखते हुए मेला स्थगित किए जाने से करीब 5000 श्रद्धालु ही पहुंचे, जिन्होंने बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया। हर साल अमूमन ढाई लाख श्रद्धालु पहुंचते रहे हैं।
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बाबा चमलियाल दरगाह वाले इलाके में पहली बार पाकिस्तान की ओर से कुछ दिन पहले गोलाबारी की गई थी, जिसमें बीएसएफ के चार जवान शहीद हो गए थे। इस कारण बीएसएफ और प्रशासन ने सीमा पर उपजे तनाव के चलते मेला नहीं लगाने का निर्णय लिया था।
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स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए केवल प्रतीकात्मक पूजा की अनुमति दी गई थी। स्थानीय लोगों ने मजार पर चादर चढ़ाई। पवित्र तालाब को कंटीले तार लगाकर सील कर दिया गया था।