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जम्मू-कश्मीर : आतंकियों ने बदली रणनीति, एके 47 की जगह अब भेज रहे हैं चाइनीज पिस्टल
Sat, 07 Aug 2021 03:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अजय मीनिया, जम्मू
अजय मीनिया, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 07 Aug 2021 03:42 AM IST
सार
- एके 47 की तुलना में तीन गुना कम वजन और लंबाई भी काफी कम
- ड्रोन से फेंकने में सबसे ज्यादा आसान, डेढ़ साल में 16 पिस्टल बरामद हो चुकीं
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विस्तार
आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए आतंकी संगठनों ने रणनीति बदल ली है। पहले आतंकी एके 47 को मुख्य रूप से इस्तेमाल करते थे। लेकिन अब आतंकी चाइनीज पिस्टल इस्तेमाल कर रहे हैं जो एके 47 की तुलना में लंबी भी कम है और इसका वजन तीन गुना कम है। यहां तक कि आतंकियों के लिए हथियार भेजने का नया जरिया बन चुके ड्रोन में भी इसे भेजना आसान है। यही कारण है कि सीमा पार से पिस्टल भेजने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है।
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जानकारी के अनुसार पिछले डेढ़ साल में सिर्फ जम्मू संभाग में ही पुलिस, सेना और बीएसएफ ने आतंकियों या फिर ड्रोन से फेंकी गई 16 पिस्टल बरामद की हैं। इनमें अधिकतर चाइनीज पिस्टल हैं और कुछ पाकिस्तान निर्मित। एके 47 का वजन 4 किलो के आसपास है। जबकि इसकी लंबाई पौने तीन फुट तक होती है। जबकि चाइनीज पिस्टल की लंबाई 5 से 9 इंच के बीच और इसका वजन एक किलो के आसपास होता है।
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ड्रोन में भेजना और इसे ले जाना आसान
आतंकी संगठन ड्रोन के जरिए 10 किलो तक वजन वाला गोला बारूद या फिर हथियार भेज सकते हैं। ड्रोन से 2 एके 47 ही भेजी जा सकती है, जबकि चाइनीज पिस्टल 10 आ सकती हैं वह भी मैगजीन के साथ। इसको ले जाना और छिपाना भी आसान होता है। किसी वारदात को अंजाम देने के लिए भी इसे ले जाना बहुत आसान है।
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जम्मू संभाग में सबसे ज्यादा इसका इस्तेमाल
जानकारी के अनुसार किश्तवाड़ में भाजपा नेताओं की हत्या भी इसी पिस्टल से की गई। रामबन में एक हमले में भी पिस्टल का इस्तेमाल किया गया। जम्मू में पुलिस ने पिछले डेढ़ साल में कम से कम 20 लोगों से ऐसी पिस्टल बरामद की हैं।
इसमें कोई शक नहीं कि आतंकी एके 47 और बड़े हथियार भेजने से परहेज करने लग गए हैं। क्योंकि पिस्टल को कहीं भी ले जाना और छुपाना आसान है। इसलिए इसको अधिक भेजा जा रहा है और इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। ड्रोन में भी इसको आसानी से भेजा जा सकता है। यही कारण है कि इसकी रिकवरी भी अधिक हो रही है।
-प्रवक्ता, भारतीय सेना, जम्मू