जम्मू-कश्मीर को ‘विशेष राज्य’ का दर्जा मिला
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केंद्र ने फंडिंग पैटर्न बदलकर जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल को बड़ी राहत दी है। इसे यूं भी कहा जा सकता है कि उसने इन राज्यों के विशेष श्रेणी के दर्जे को बहाल कर दिया है।
पिछले डेढ़ साल से यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति का केंद्र बिंदु बना हुआ था। जम्मू कश्मीर को कुछ केंद्रीय योजनाओं में कुछ सालों से 90ः10 के अनुपात में धनराशि मिल रही है।
केंद्र ने करीब 27 कोर योजनाओं और दर्जन भर अन्य स्कीमों में नार्थ ईस्ट की तर्ज पर उत्तराखंड को 90:10 के अनुपात में धनराशि दिए जाने का निर्णय लिया है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय में व्यय विभाग के वित्त सचिव रतन वी पातल ने विगत 28 अक्तूबर को इस बाबत आदेश जारी किया।
विभिन्न योजनाओं में 90:10 के अनुपात में धनराशि दी जाएगी
पिछले साल जब केंद्रीय योजना आयोग को भंग कर नीति आयोग का गठन हुआ तो राज्यों को खुद पता नहीं रहा कि जो प्रस्ताव भेजा वो मंजूर हुआ कि नहीं। भ्रम की स्थिति बनी रही और नार्थ-ईस्ट के आठ राज्यों के अलावा सभी को एक ही चश्मे से देखा गया जबकि उत्तराखंड समेत तीनों हिमालयी राज्यों को नार्थ ईस्ट की तर्ज पर मदद की दरकार थी।
इस मामले को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत कई बार पीएम व केंद्रीय वित्त मंत्री से भी मिले। पिछले दिनों चीफ मिनिस्टर्स ग्रुप ने नीति आयोग को रिपोर्ट सौंपी। नीति आयोग ने सहमति जताते हुए इसे पीएमओ के समक्ष प्रस्तुत किया।
पीएमओ की मंजूरी मिलते ही केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने इसकी गाइड लाइन जारी कर दी। अब तीन हिमालयी राज्यों को भी नार्थ ईस्ट के आठ राज्यों की तर्ज पर विभिन्न योजनाओं में 90:10 के अनुपात में धनराशि दी जाएगी।
मनरेगा, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम, अनुसूचित जाति व जनजाति के अम्ब्रेला प्रोग्राम, मल्टी सेक्टोरियल डेवलपमेंट प्लान, मदरसा शिक्षा में 60:40 के अनुपात में धनराशि मिलती थी। अब 90:10 के अनुपात मिलेगी।