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जम्मू-कश्मीर: फार्म भरने के पांच साल बाद भी नहीं हुई परीक्षाएं, युवाओं से कमाए 77 करोड़
Wed, 09 Jun 2021 12:08 AM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Wed, 09 Jun 2021 12:08 AM IST
सार
कांग्रेस नेता ने जेकेएसएसबी की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल।
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Examination (file poto)
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर सर्विस सिलेक्शन बोर्ड ने बीते पांच साल में विभिन्न विभागों में रिक्त पडे पदों को भरने के लिए परीक्षा शुल्क के नाम पर बेरोजगार युवाओं से 77 करोड़ रूपए कमाए हैं। लेकिन पांच साल गुजर जाने के बाद भी इन परीक्षाओं का आयोजन नहीं किया गया है। यह आरोप कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुमित मगोत्रा ने प्रेसवार्ता में लगाया है।
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उन्होंने कहा कि एक आरटीआई एक्टिविस्ट द्वारा आरटीआई के माध्यम से उक्त जानकारी हासिल की गई है। जेकेएसएसबी की ओर से गैर राजपत्रित (नान गजेटेड) नौकरियों के लिए प्रत्येक फॉर्म के लिए 350 रूपए फीस और गजेटेड पोस्ट के लिए प्रति फॉर्म एक हजार रूपए की फीस रखी गई थी।
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नौकरी के लिए इच्छुक आवेदकों से परीक्षा शुल्क के नाम पर 5 सालों में जेकेएसएसबी ने करोड़ों रुपए इकट्ठे किए। यह राशि विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त पड़े हुए पदों पर किए जाने वाली चयन परीक्षा को लेकर ली गई। जेकेएसएसबी ने तकरीबन 300 परीक्षाओं का चयन करना था जिसमें एक लाख युवाओं ने आवेदन किया, लेकिन परीक्षाएं नहीं हुईं।
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आरटीआई के खुलासे से जानकारी मिली कि महाप्रशासनिक विभाग ने इन सभी पोस्टों के लिए विज्ञापन को रद्द कर दिया और इसलिए परीक्षा नहीं हुई। सुमित मगोत्रा ने कहा कि बड़े दुख की बात है कि जम्मू कश्मीर के पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं ने नौकरी की आस में फॉर्म भरे थे। लेकिन इन युवाओं से खिलवाड़ कर इनका पैसा ठगने का काम किया गया।
उन्होंने कहा कि अगर नौकरियां नहीं देनी थी, परीक्षाएं नहीं लेनी थी, तो यह पैसा क्यों लिया गया। उनकी मांग है कि इसका सच जनता के सामने लाया जाए। इसके साथ ही उन्होंने जम्मू कश्मीर के युवाओं से अपील करते हुए कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए इस धोखाधड़ी के खिलाफ सभी युवा अपनी आवाज जम्मू कश्मीर प्रशासन तक पहुंचाएं।
कांग्रेस नेता ने उपराज्यपाल से मांग करते हुए कहा कि जिन पढ़े-लिखे नौजवानों ने इन पांच सालों में आवेदन दाखिल किए थे और फीस जमा करवाई थी उन सभी को फिर से विज्ञापन निकालकर परीक्षाओं का मौका दिया जाए और ऐसा कानून बनाया जाए जिसमें भविष्य में युवाओं से भद्दा मजाक न हो सके।
उन्होंने कहा कि अगर नौकरियां नहीं देनी थी, परीक्षाएं नहीं लेनी थी, तो यह पैसा क्यों लिया गया। उनकी मांग है कि इसका सच जनता के सामने लाया जाए। इसके साथ ही उन्होंने जम्मू कश्मीर के युवाओं से अपील करते हुए कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए इस धोखाधड़ी के खिलाफ सभी युवा अपनी आवाज जम्मू कश्मीर प्रशासन तक पहुंचाएं।
कांग्रेस नेता ने उपराज्यपाल से मांग करते हुए कहा कि जिन पढ़े-लिखे नौजवानों ने इन पांच सालों में आवेदन दाखिल किए थे और फीस जमा करवाई थी उन सभी को फिर से विज्ञापन निकालकर परीक्षाओं का मौका दिया जाए और ऐसा कानून बनाया जाए जिसमें भविष्य में युवाओं से भद्दा मजाक न हो सके।