फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Jammu and Kashmir Assembly Election PDP Candidate Shia Voter Challenge For Omar Abdullah

Jammu Election: शियाओं का गढ़ को भेदना उमर के लिए चुनौती, पीडीपी प्रत्याशी शिया, बडमाम में ये 33 फीसदी

Mon, 09 Sep 2024 02:08 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 09 Sep 2024 02:08 PM IST
सार

शियाओं का गढ़ को भेदना उमर अब्दुल्ला के लिए चुनौती होगा। पीडीपी ने उमर के सामने शिया प्रत्याशी को उतारा है। पीडीपी के सैयद मुंताजिर मेहदी नेकां सांसद रुहुल्ला के चचेरे भाई हैं। शिया वोट बंटने पर ही उमर की राह आसान हो सकती है।

विज्ञापन
Jammu and Kashmir Assembly Election PDP Candidate Shia Voter Challenge For Omar Abdullah
Omar Abdullah - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कश्मीर घाटी में मुस्लिमों के दो वर्ग हैं। इनमें सुन्नी और शिया शामिल हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में शिया आबादी 20-25 प्रतिशत है। कश्मीर घाटी के सभी जिलों में शिया समुदाय की मौजूदगी देखने को मिलती है। घाटी के मध्य कश्मीर के बडगाम और श्रीनगर समेत उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले में शिया समुदाय की आबादी ज्यादा है। 
विज्ञापन


शिया समुदाय की कुल आबादी मुस्लिम आबादी की 20 से 25 फीसदी है। लगभग 13 से 15 लाख लोग शिया समुदाय के हैं। मध्य कश्मीर के बडगाम की बात करें तो 30 से 33 हजार वोटर शिया हैं। यह जिले की आबादी का लगभग 35 प्रतिशत है। जानकारों का कहना है कि शिया समुदाय बड़ी संख्या में वोट देने निकलता है जबकि सुन्नी समुदाय कम वोटिंग करता है।
विज्ञापन


कश्मीर में शिया समुदाय के दो बड़े वर्ग हैं। ये मुस्तफाई और मोहम्मदी के तौर पर जाने जाते हैं। दोनों वर्ग सैयद सिलसिले से हैं। अन्य दो वर्ग मौलवी साहबी और अब्बासी हैं। मुस्तफाई वर्ग में आगा सैयद मुस्तफा जबकि मोहम्मदी वर्ग में आगा सैयद यूसुफ इस सिलसिले के प्रमुख हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


आगा सैयद मुस्तफा के चार बेटे आगा सैयद मेहदी, जोकि तत्काल सांसद आगा रुहुल्लाह के पिता थे, कांग्रेस के साथ जुड़े रहे। बम धमाके में उनकी मौत हो गई जिसके बाद उनके बेटे को तत्कालीन मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने नेशनल कॉन्फ्रेंस में शामिल कर लिया।

आगा सैयद मुस्तफा के दूसरे बेटे आगा सैयद हसन हैं जोकि काफी समय तक अलगाववादी नेता की हैसियत से न सिर्फ बडगाम बल्कि कश्मीर में जाने जाते हैं और अभी उनका बेटा सैयद मुंताजिर मेहदी मुख्यधारा में आकर पीडीपी की टिकट पर बडगाम से प्रत्याशी है। आगा सैयद मुस्तफा के तीसरे बेटे आगा सैयद मोहसिन एक धार्मिक नेता हैं और राजनीति से दूर हैं।

 

आगा सैयद अहमद थाम चुके हैं अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस
आगा सैयद मुस्तफा के एक अन्य बेटे आगा सैयद अहमद मुस्तफा ने हाल ही में अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस में शमूलियत की घोषणा की है। दूसरे वर्ग जिसको मोहम्मदी कहा जाता है, में आगा सैयद यूसुफ प्रमुख माने जाते हैं। इनके बेटे आगा महमूद पहले राजनीति से जुड़े थे। 

 

2002 में वह चुनाव रण में भी रहे। नेशनल कॉन्फ्रेंस के आगा महमूद को टिकट देने की चर्चा थी लेकिन पार्टी ने पहले से इस सीट पर शिया समुदाय के उम्मीदवारों के मैदान में होने के चलते उमर अब्दुल्ला को बडगाम सीट से उतार दिया। यहां से पीडीपी ने सांसद आगा रुहुल्लाह के चचेरे भाई आगा मुंतजिर मेहदी को टिकट देकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए चिंता बढ़ा दी है।
 

मौलवी साहबी वर्ग से कोई भी राजनीति में सक्रिय नहीं
शिया समुदाय के तीसरे वर्ग मौलवी साहबी में पूर्व पीडीपी नेता इफ्तिखार अंसारी प्रमुख रहे हैं। इनके बेटे इमरान अंसारी और इरफान अंसारी अभी राजनीति में सक्रिय नहीं हैं। हालांकि इरफान अंसारी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में श्रीनगर सीट से चुनाव लड़ा था। वह सबसे अमीर प्रत्याशी थे। उनको हार का सामना करना पड़ा था। 

 

इसके बाद वह राजनीति से किनारा कर गए। अंसारियों के बडगाम में सात हजार जबकि बारामूला जिले में 50 हजार वोटर्स हैं। कश्मीर में शिया समुदाय का चौथा वर्ग अब्बासी है। इनका प्रमुख चेहरा अलगाववादी नेता अब्बास अंसारी रहे हैं। आज तक इन्होंने राजनीति में हिस्सा नहीं लिया। उनके बेटे मसरूर अब्बास अंसारी हाल ही में बनी मजलिस ए मुताहिदा उलेमा काउंसिल के सदस्य हैं।

आगा परिवार के लोग नहीं जाते थे अदालत, कोर्ट उनके घर आता था
कश्मीर के शियाओं में अमूमन कानूनी विवादों के लिए सरकारी अदालतों के बजाय अपने धार्मिक प्रमुख के पास जाने की प्रथा है। ऐसी शरई (शरीयत) अदालतें (धार्मिक अदालतें) इस्लामी सिद्धांत के अनुसार न्याय का निर्धारण करती हैं। आगा यूसुफ के काल में शरई अदालतें बहुत लोकप्रिय हुईं। कई मौकों पर जिला अदालत ने मामलों को यूसुफ की अदालत में भेजा।

महाराजा गुलाब सिंह, प्रताप सिंह और हरि सिंह के शासनकाल के दौरान कश्मीर के संविधान में एक अनुच्छेद शामिल किया गया, जिसने आगा परिवार को अद्वितीय सम्मान प्रदान किया। अगर आगा परिवार से किसी को गवाही देनी होती थी, तो वे कोर्ट नहीं जाते थे, बल्कि कोर्ट उनके घर आकर गवाही दर्ज करता था। आगा परिवार के किसी भी व्यक्ति को अदालत में नहीं बुलाया जाता था। यह कानून 1982 तक आगा सैयद यूसुफ के काल तक अस्तित्व में रहा।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed