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जम्मू: स्मार्ट फोन नहीं रखने वालों के लिए आभा एप बनी पहेली, मरीजों को नहीं मिल पा रही जानकारी
Sun, 14 May 2023 04:28 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Sun, 14 May 2023 04:28 PM IST
सार
बिना स्मार्ट फोन वालों के लिए नई व्यवस्था पहेली की तरह है। चिकित्सा सदस्य उनकी अपने फोन पर आईडी बनाकर ओपीडी पर्ची जारी कर रहे हैं।
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- फोटो : istock
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विस्तार
सरकारी अस्पतालों में ओपीडी केंद्रों पर मरीजों की कतार कम करने के लिए आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) के तहत ऑनलाइन ओपीडी पंजीकरण जारी है। मरीजों की मदद के लिए चिकित्सा स्टाफ को लगाया है, लेकिन सवाल यह उठता है कि स्टाफ को भविष्य में हटा देने से मरीजों का आभा कैसे बनेगा। इसका किसी के पास जवाब नहीं है। खासतौर पर बिना स्मार्ट फोन वालों के लिए नई व्यवस्था पहेली की तरह है। चिकित्सा सदस्य उनकी अपने फोन पर आईडी बनाकर ओपीडी पर्ची जारी कर रहे हैं।
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सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में शनिवार को कार्डियो यूनिट में पहुंचे पलांवाला निवासी अशोक कुमार ने बताया कि उनके पास सामान्य फोन है। यहां नई व्यवस्था के बारे में पता चला। स्टाफ ने पूछा कि घर पर स्मार्ट फोन है तो बताया-नहीं। इसके बाद स्टाफ ने अपने फोन पर आभा सृजित कर टोकन जारी किया।
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अशोक भविष्य में भी आभा के लिए स्टाफ पर निर्भर रहेगा। स्मार्ट फोन नहीं रखने वालों के लिए नई व्यवस्था सबसे बड़ी मुश्किल है। इसी तरह उधमपुर निवासी बोधराज के पास भी स्मार्ट फोन नहीं था और वह काउंटर पर पहुंचकर लाचार हो गए। स्टाफ ने खुद के फोन पर आभा आईडी बनाई। बोधराज ने कहा कि ऑनलाइन व्यवस्था परेशानी से कम नहीं है।
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लोगों को जागरूक करना जरूरी
हार्ट मरीज के साथ आए रिहाड़ी निवासी सुभाष को भी आभा के बारे में जानकारी नहीं थी। काउंटर पर वह परेशान दिख रहे थे। बताया कि उनका मरीज ऑटो में पड़ा है और उन्हें नई व्यवस्था से गुजरना पड़ रहा है। स्टाफ सदस्य ने उनके फोन पर आभा आईडी बनाकर दी। मगर पूरी प्रक्रिया के बारे में उन्हें आखिर तक जानकारी नहीं मिल पाई। बरनाई निवासी संजय ने कहा कि आभा के बारे में जानकारी नहीं है। इसके लिए लोगों को जागरूक करना जरूरी है। आपातकालीन स्थिति में मरीजों के साथ तीमारदार भी परेशान हो रहे हैं।