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जमात के कई बैंक खाते-कार्यालय सील, 70 बैंक खाते रडार पर, 50 करोड़ रुपये जमा होने का अनुमान

Sun, 03 Mar 2019 02:02 AM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: Pranjal Dixit Updated Sun, 03 Mar 2019 02:02 AM IST
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jamat-e-islami banned organisation bank accounts sealed, approx fifty crore amount deposited in bank
प्रतिबंध के बाद जमात-ए-इस्लामी पर लगातार शिकंजा कसता जा रहा है। शनिवार को संगठन से जुड़े कई बैंक खाते सील किए गए। संगठन के 70 बैंक खाते रडार पर हैं। इन खातों में लगभग 50 करोड़ रुपये जमा बताया जाता है। शनिवार को भी पुलिस ने जमात के कई नेताओं को गिरफ्तार किया। 
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दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में संगठन के कार्यालयों को सील किया गया। पुलवामा में संगठन से जुड़े लोगों को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस पिछले कई दिन से संगठन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। गत 22 फरवरी से संगठन के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी चल रही है। 
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केंद्र सरकार द्वारा जमात-ए-इस्लामी (जम्मू-कश्मीर) पर प्रतिबंध के खिलाफ श्रीनगर में महबूबा मुफ्ती और पीडीपी कार्यकर्ताओं ने खुलकर विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। वहीं केंद्र सरकार ने ‘जमात-ए-इस्लामी’ संगठन पर 5 साल का प्रतिबंध लगाने के बाद कश्मीर में संगठन से जुड़ी कई सम्पत्तियों को सील कर दिया है। बता दें कि शुक्रवार को दक्षिणी कश्मीर के कई स्थानों पर छापे मारकर सुरक्षाबलों ने संगठन से जुड़े दो दर्जन से अधिक सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था।
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पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि ‘जमात-ए-इस्लामी’ के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के आवास सहित कई अन्य सम्पत्तियां शुक्रवार रात को शहर और घाटी के कई इलाकों में सील कर दी गईं। साथ ही ‘जमात-ए-इस्लामी’ के नेताओं के बैंक खाते भी सील कर दिए गए हैं।

अधिकारी ने बताया कि विभिन्न जिलाधिकारियों ने भी जमात नेताओं की चल एवं अचल संपत्तियों की सूची मांगी है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि संगठन पर प्रतिबंध या धनशोधन मामलों में एनआईए द्वारा की गई जांच से इसका कोई संबंध है या नहीं।

गौरतलब है कि जमात-ए-इस्लामी पर देश में राष्ट्र विरोधी और विध्वंसकारी गतिविधियों में शामिल होने और आतंकवादी संगठनों के साथ संपर्क में होने का आरोप है। सुरक्षाबलों ने पुलवामा में 14 फरवरी को हुए आतंकवादी हमले के बाद अलगाववादी ताकतों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है तथा जमात-ए-इस्लामी जम्मू एंड कश्मीर के कई नेताओं और समर्थकों को गिरफ्तार किया है।

सूत्रों के अनुसार श्रीनगर में सैदपोरा, हारवान तथा बेमिना इलाके में बशीर अहमद लोन व गुलाम मोहम्मद भट के आवास संबंधित तहसीलदार की ओर से सील किए गए। बांदीपोरा व कुलगाम जिला प्रशासन ने जमात से जुड़े लोगों के आवास, दफ्तर, संस्थाएं तथा चल-अचल संपत्ति सील करने के निर्देश दिए हैं। शोपियां, पुलवामा, बांदीपोरा व अनंतनाग में संगठन का दफ्तर सील कर दिया गया।

ज्ञात हो कि 22 फरवरी की रात को पूरी घाटी में सुरक्षाबलों ने छापेमारी कर 150 से अधिक अलगाववादियों और पत्थरबाजों को हिरासत में लिया था। इनमें ज्यादातर जमात-ए-इस्लामी से जुड़े हुए थे, जिनमें संगठन के राज्य प्रमुख अब्दुल हमीद फयाज भी शामिल थे। संगठन ने दावा किया था कि छापेमारी में अमीर (प्रमुख) डॉ. अब्दुल हमीद फयाज और वकील (प्रवक्ता) जाहिद अली को गिरफ्तार किया गया था।

बताते हैं कि जमात-ए-इस्लामी पर पहली बार बड़ी कार्रवाई हुई थी। संगठन पूर्व में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन की राजनीतिक शाखा के तौर पर काम करता था। हालांकि, उसने हमेशा खुद को एक सामाजिक और धार्मिक संगठन बताया।

जानिए जम्मू-कश्मीर में पांच साल के लिए बैन हुए जमात-ए-इस्लामी का इतिहास

jamat-e-islami banned organisation bank accounts sealed, approx fifty crore amount deposited in bank
जमात-ए-इस्लामी (जम्मू-कश्मीर) पंपोर स्थित दफ्तर
केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के जमात-ए-इस्लामी संगठन पर पांच साल का प्रतिबंध लगाने के बाद कश्मीर में संगठन से जुड़ी कई संपत्तियों को सील कर दिया। प्रतिबंध के फैसले के खिलाफ श्रीनगर में पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और पीडीपी कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। बता दें कि शुक्रवार को दक्षिणी कश्मीर के कई जगहों पर सुरक्षाबलों की छापे की कार्रवाई के बाद जमात-ए-इस्लामी से जुड़े दो दर्जन से अधिक सदस्यों को गिरफ्तार किया था। गृह मंत्रालय ने रक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक में सहमति के बाद यह कदम उठाया। ऐसे में अहल सवाल यह है कि आखिर जमात-ए-इस्लामी (जम्मू-कश्मीर) में ऐसा क्या कर रही है कि सरकार को इस पर प्रतिबंध लगाना पड़ा। 

पहले भी लग चुका है प्रतिबंध
इससे पहले भी दो बार जमात-ए-इस्लामी संगठन की गतिविधियों के कारण इस पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। पहली बार जम्मू-कश्मीर सरकार ने इस संगठन को साल 1975 में दो साल के लिए प्रतिबंधित किया था। वहीं दूसरी बार केंद्र सरकार ने साल 1990 में इस पर प्रतिबंध लगाया था जो दिसंबर 1993 तक जारी रहा। 

कैसे बना जमात-ए-इस्लामी 
स्वतंत्रता से पहले साल 1941 में एक संगठन बनाया गया जिसका नाम जमात-ए-इस्लामी था। जमात-ए-इस्लामी का गठन इस्लामी धर्मशास्त्री मौलाना अबुल अला मौदुदी ने किया था और यह इस्लाम की विचारधारा को फैलाने का काम करता था। हालांकि देश को स्तवंत्रता मिलने के बाद जमात-ए-इस्लामी कई धड़ों में बंट गया। जिसमें जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान और जमात-ए-इस्लामी हिंद शामिल है। यह जमात-ए-इस्लामी का असर था कि इससे प्रेरणा लेकर कई और संगठन भी बने, जिसमें जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश, जमात-ए-इस्लामी कश्मीर, जमात-ए-इस्लामी ब्रिटेन और जमात-ए-इस्लामी अफगानिस्तान कुछ प्रमुख नाम हैं। जमात-ए-इस्लामी पार्टियां दुनियाभर के मुस्लिम समूहों के साथ सक्रिय तौर पर संबंध बनाए रखती हैं। 

क्या करता है जमात-ए-इस्लामी (जम्मू-कश्मीर)

जमात-ए-इस्लामी (जम्मू-कश्मीर) कश्मीर की सियासत में महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। साल 1971 से यह चुनावी मैदान में कूदी। हालांकि तब इसे एक भी सीट पर जीत नहीं मिली, लेकिन बाद में हुए चुनावों में इसने बेहतर प्रदर्शन किया और सियासत में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। 

जमात-ए-इस्लामी काफी लंबे समय से कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाने की मुहिम भी चला रहा है। उसका मानना है कि कश्मीर का विकास भारत के साथ रहकर नहीं हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, घाटी में कार्यरत कई आतंकी संगठन जमात के इन मदरसों और मस्जिदों में पनाह लेते रहे हैं। 

बताया जाता है कि यह आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का राजनीतिक चेहरा है। जमात-ए-इस्लामी जम्मू कश्मीर ने ही हिजबुल मुजाहिदीन को खड़ा किया है और उसे हर  तरह की मदद करता है। 
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