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Jammu: आतंकी भाई के मारे जाने के बाद जैश कमांडर आशिक नेंगरू ने संभाल ली उसकी जगह
Sun, 11 Dec 2022 09:55 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 11 Dec 2022 09:55 AM IST
सार
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार नेंगरू इस समय पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) से जैश का नेटवर्क चला रहा है। यह खुलासा नेंगरू के भाई के पकड़े जाने पर हुआ था। जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर 12 अगस्त 2018 को उधमपुर पुलिस ने एक ट्रक झज्जर कोटली में तलाशी के लिए रोका था। इस ट्रक से तीन आतंकियों को वह कश्मीर लेकर जा रहा था।
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जैश कमांडर आशिक नेंगरू का घर गिराया
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जैश कमांडर आशिक नेंगरू के खिलाफ देश विरोधी गतिविधियों, आतंकियों को इधर से उधर ले जाने, युवाओं को बरगलाने के कई मामले दर्ज हैं। वर्ष 2019 में पुलवामा सीआरपीएफ काफिले पर हुए आतंकी हमले में भी वह शामिल है। वह शुरुआती दौर में ड्राइवर का काम करता था।
उसका एक भाई अब्बास नेंगरू जैश के लिए काम करता था। वर्ष 2013 में वह सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया। इसके बाद आशिक ने आतंकी के रूप में काम करना शुरू किया। नेंगरू आतंकियों को अपने वाहन में एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के अलावा आतंकियों को हथियार भी पहुंचाता था।
वर्ष 2013 में उसे पहली बार गिरफ्तार किया गया। एनआईए अधिनियम के तहत जांच के दौरान पता चला कि वह फर्जी नाम अमजद भाई के तौर पर काम कर रहा था। उसे आतंकियों को सीमा के उस पार से इधर व युवाओं को इधर से सीमापार भेजने का काम सौंपा गया। 2016 से 2018 तक उसने अपने ट्रकों का उपयोग करके 20 से अधिक पाकिस्तानी आतंकियों के अलावा भारी मात्रा में हथियारों और असलहे को घाटी तक पहुंचाया।
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पीओजेके में बैठकर चला रहा नेटवर्क
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार नेंगरू इस समय पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) से जैश का नेटवर्क चला रहा है। यह खुलासा नेंगरू के भाई के पकड़े जाने पर हुआ था। जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर 12 अगस्त 2018 को उधमपुर पुलिस ने एक ट्रक झज्जर कोटली में तलाशी के लिए रोका था। इस ट्रक से तीन आतंकियों को वह कश्मीर लेकर जा रहा था।
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उसका एक भाई अब्बास नेंगरू जैश के लिए काम करता था। वर्ष 2013 में वह सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया। इसके बाद आशिक ने आतंकी के रूप में काम करना शुरू किया। नेंगरू आतंकियों को अपने वाहन में एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के अलावा आतंकियों को हथियार भी पहुंचाता था।
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वर्ष 2013 में उसे पहली बार गिरफ्तार किया गया। एनआईए अधिनियम के तहत जांच के दौरान पता चला कि वह फर्जी नाम अमजद भाई के तौर पर काम कर रहा था। उसे आतंकियों को सीमा के उस पार से इधर व युवाओं को इधर से सीमापार भेजने का काम सौंपा गया। 2016 से 2018 तक उसने अपने ट्रकों का उपयोग करके 20 से अधिक पाकिस्तानी आतंकियों के अलावा भारी मात्रा में हथियारों और असलहे को घाटी तक पहुंचाया।
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पीओजेके में बैठकर चला रहा नेटवर्क
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार नेंगरू इस समय पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) से जैश का नेटवर्क चला रहा है। यह खुलासा नेंगरू के भाई के पकड़े जाने पर हुआ था। जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर 12 अगस्त 2018 को उधमपुर पुलिस ने एक ट्रक झज्जर कोटली में तलाशी के लिए रोका था। इस ट्रक से तीन आतंकियों को वह कश्मीर लेकर जा रहा था।
तीनों आतंकी सीमा पार से आए थे। ट्रक रोकते ही आतंकी भागने में सफल रहे, लेकिन बडगाम के दो ओजीडब्ल्यू इकबाल राठेर और ट्रक चला रहे आशिक के भाई रियाज अहमद नेंगरू को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच के दौरान पता चला कि आशिक भी इनके साथ था। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर इसे एनआईए को सौंप दिया था।
एनआईए के पास जांच जाने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए वह भूमिगत हो गया और एलओसी पार कर गया। रिपोर्टों से पता चला कि वह पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में जैश का नेटवर्क चला रहा है। पुलिस की पूछताछ में रियाज ने खुलासा किया कि आशिक उस ट्रक के साथ था, जो कठुआ से 3 आतंकियों को अपने ट्रक में लेकर आया था।
एनआईए के पास जांच जाने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए वह भूमिगत हो गया और एलओसी पार कर गया। रिपोर्टों से पता चला कि वह पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में जैश का नेटवर्क चला रहा है। पुलिस की पूछताछ में रियाज ने खुलासा किया कि आशिक उस ट्रक के साथ था, जो कठुआ से 3 आतंकियों को अपने ट्रक में लेकर आया था।