J&K News: शिक्षकों को मिले वन मंथ ऑन लीव, भर्ती नियमों में हो रहा संशोधन, सरकार से मांग पूरी होने की उम्मीद
जम्मू-कश्मीर में शिक्षक संघ ने सरकार से वन मंथ ऑन लीव और वेतन विसंगति दूर करने की मांग की है। और भर्ती नियमों में बदलाव की भी मांग की।
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जम्मू-कश्मीर में नई सरकार का गठन हो गया है। आम लोगों के साथ-साथ अब सरकारी कर्मचारियों को भी नई सरकार से बड़ी उम्मीदें है। इसमें शिक्षकों के लिए एक महीने की ऑन लीव की व्यवस्था, वेतन विसंगति दूर करना और स्कूल शिक्षा विभाग में भर्ती नियमों में बदलाव करना शामिल है। शिक्षक संघ को नई सरकार से समय रहते मांग पूरी होने की उम्मीद है।
जम्मू-कश्मीर में शिक्षकों के अलावा अन्य सभी विभागों के कर्मचारियों के लिए वन मंथ ऑन लीव की सुविधा है। शिक्षकों को वर्तमान में सिर्फ 15 दिनों की कैजुअल लीव के अलावा मेडिकल लीव मिलती है। शिक्षक के घर-परिवार में किसी आयोजन या हादसे होने पर उसे मेडिकल लीव लेनी पड़ती है, लेकिन उनके पास वन मंथ ऑन लीव जैसी सुविधा नहीं है। शिक्षकों की मांग की है कि उन्हें भी इस तरह की सुविधा मिले।
स्कूल शिक्षा विभाग में लेक्चरर वेतन विसंगति से परेशान है। 18 से 20 साल तक उन्हें एक ही ग्रेड पर काम करना पड़ रहा है। समयबद्ध तरीके से अगला ग्रेड नहीं मिल रहा है। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख ने इस तरह की व्यवस्था लागू की है, जहां उन्हें समयबद्ध तरीके से अगला ग्रेड मिल जाता है।
लेकिन जम्मू-कश्मीर विशेष कर लेक्चरर एक ही ग्रेड पर कई सालों से काम करने के लिए मजबूर हैं। जम्मू-कश्मीर सरकार में हर विभाग समय-समय पर अपने भर्ती नियमों में संशोधन करता है, लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग में 14 साल से भर्ती नियमों में संशोधन नहीं हुआ है।2010 में अंतिम बार इन नियमों में बदलाव हुआ था। 2022 में विभागों ने नियमों में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन दो साल बाद भी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में शिक्षकों को नए सरकार से उम्मीद है कि वह उनकी जायज मांगों पर ध्यान केंद्रित करेगी।
जम्मू-कश्मीर में अन्य विभागों के कर्मचारियों को वन मंथ ऑन लीव की सुविधा है, लेकिन शिक्षकों को नहीं है। प्रदेश में विशेष कर लेक्चरर 18 से 20 साल तक एक ही ग्रेड पर काम करने को मजबूर हैं। हर साल वेतन में बढ़ोतरी तो होती है, लेकिन ग्रेड नहीं बढ़ता है। इससे कैरियर विकास में ठहराव आ रहा है। लद्दाख में लेक्चरर को समयबद्ध तरीके से अगला ग्रेड दिया जा रहा है। भर्ती नियमों में बदलाव की जरूरत है। 2010 में बने भर्ती नियमों में बदलाव नहीं हुआ है। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।
मंजीत सिंह चिब, प्रांतीय अध्यक्ष, ऑल जेएंडके प्लस टू पीएससी लेक्चरर एसोसिएशन
लेक्चरर की डीपीसी शुरू, होंगे नियमितजम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रभारी लेक्चररों को लेक्चरर के रूप में नियमित करने के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया शुरू की है। ये वह प्रभारी लेक्चरर हैं, जिनकी शैक्षणिक डिग्री को लेकर विसंगतियां थीं।
इसमें कुछ शिक्षकों ने शिक्षक बनने के बाद जरूरी डिग्रियां हासिल कीं, तो कुछ ने नियमित व डिस्टेंस मोड में डिग्री हासिल की थी। इसमें ऐसे लेक्चरर थे, जो प्रिंसिपल व हेडमास्टर बने थे, लेकिन जब उनकी डिग्रियों की जांच हुई, तो उसमें विसंगतियां मिली, जिसके बाद विभाग ने कुछ को पदावनति किया। हालांकि बाद में स्कूल शिक्षा विभाग ने ऐसे लेक्चरर को एक बार की छूट दी।
इसमें उनसे शपथपत्र लिया गया, जिसमें यह लिखा कि अगर भविष्य में उनकी डिग्रियों में विसंगतियां पाई जाएगी, तो विभाग उन्हें सेवा मुक्त कर सकता है। ऐसे लेक्चररों की अब डीपीसी प्रक्रिया शुरू हुई है, तो उन्हें प्रभारी लेक्चरर के रूप में नियमित किया जा सके।