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J&K News: लद्दाख में राजपत्रित पदों पर भर्ती की मांग, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, छह सप्ताह का दिया समय
Fri, 18 Oct 2024 02:25 PM IST
निकिता गुप्ता
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: निकिता गुप्ता
Updated Fri, 18 Oct 2024 02:25 PM IST
सार
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने लद्दाख में राजपत्रित पदों पर भर्ती न होने के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर मुख्य न्यायाधीश को लिखे गए एक पत्र को जनहित याचिका में बदल दिया है और सरकार से जवाब मांगा है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
सोशल मीडिया पर मुख्य न्यायाधीश को संबोधित एक पत्र सामने आया है। इसमें पिछले पांच वर्षों के दौरान लद्दाख में राजपत्रित कैडर के पदों पर भर्ती न किए जाने के मुद्दे पर हाईकोर्ट से हस्तक्षेप करने की मांग की गई है। जिससे लद्दाख के शिक्षित युवाओं में संकट और अनिश्चितता पैदा हो रही है, जो क्षेत्र के शासन और विकास में योगदान देने के अवसरों का इंतजार कर रहे हैं।
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उक्त पत्र में कहा गया है कि राजपत्रित कैडर के पदों पर भर्ती न करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है और यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का सीधा उल्लंघन है।हाईकोर्ट की रजिस्ट्री ने उक्त पत्र पर संज्ञान लेते हुए इसकी एक प्रति के साथ एक नोट हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया है। जिन्होंने इसे जनहित याचिका के रूप में मानने का निर्देश दिया है।
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पेश की गई शिकायत को ध्यान में रखते हुए मुख्य न्यायाधीश ताशी रबस्तान एवं न्यायाधीश पुनीत गुप्ता की खंडपीठ ने संघ लोक सेवा आयोग नई दिल्ली को उसके अध्यक्ष के माध्यम से और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को उसके मुख्य सचिव के माध्यम से रिट याचिका में पक्षकार के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया। रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि पक्षों का ज्ञापन तैयार करें और प्रतिवादियों को छह सप्ताह की अवधि के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के लिए पेपर बुक की एक प्रति के साथ नोटिस देंगे।
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