J&K: मिलें हथियार तो हम भी आतंकवादियों से लड़ने को तैयार; सेवानिवृत्त सैनिकों ने सरकार से की हथियारों की मांग
सांबा जिले के सेवानिवृत्त सैनिकों ने सरकार से हथियारों की मांग की, कहा कि यदि उन्हें हथियार मिलें तो वे आतंकवादियों से लड़ने के लिए तैयार हैं।
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जिले के सीमावर्ती गांवों के सेना से सेवानिवृत्त अधिकारियों और जवानों ने सरकार से गुहार लगाई है कि यदि उन्हें हथियार मुहैया कराए जाएं तो वे आतंकवादियों से लड़ने के लिए तैयार हैं।सेवानिवृत्त कैप्टन बज सिंह, देवेंद्र सिंह, जगदीश राज और कुलदीप राज ने बताया कि पाकिस्तानी सेना की ओर से देश विरोधी तत्वों को जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए भारत-पाक सीमा से घुसपैठ कराई जा रही है। उन्होंने कहा, जब भी हमें सूचना मिलती है कि मुठभेड़ में सेना के अधिकारी और जवान शहीद हो रहे हैं, हमारा खून खौल उठता है।
सेवानिवृत्त सैनिकों ने बताया कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस की ओर से लोगों को हथियार दिए जाते थे और फायरिंग का प्रशिक्षण दिया जाता था। लोग अपने-अपने गांवों की सुरक्षा करते थे। जब आतंकवादी घटनाएं बढ़ने लगीं तो पुलिस ने ग्राम सुरक्षा समितियां बनाई थीं। प्रत्येक गांव में पांच सदस्यों की समिति बनाकर उन्हें पुलिस के साथ रात्रि पहरेदारी का जिम्मा सौंपा गया था। उनके काम को देखते हुए उन्हें मानदेय भी दिया जाता था और समय-समय पर फायरिंग प्रशिक्षण दिया जाता था।
सेवानिवृत्त सैनिकों ने मांग की कि केंद्र सरकार की ओर से बनाए गए ग्रामीण सुरक्षा गार्ड की तर्ज पर उन्हें भी हथियारों के लाइसेंस दिए जाएं ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें। उन्होंने बताया कि सेना के जवान पहले से ही प्रशिक्षित होते हैं।जिन लोगों ने हथियार के लाइसेंस रिन्यू करने के लिए दिए हैं, उन्हें रिन्यू किया जा रहा है। अभी नए लाइसेंस नहीं बन रहे हैं।