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J&K Election 2024: चिनाब, झेलम और तवी..एक नहीं हुए अभी, BJP का 50 प्लस का सपना रहां अधूरा, गठबंधन की हुई वापसी

Wed, 09 Oct 2024 03:35 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Wed, 09 Oct 2024 03:35 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर के चुनाव परिणामों ने भाजपा की उम्मीदों को निराश किया, जहां चिनाब, झेलम और तवी क्षेत्रों में कोई राजनीतिक एकता नहीं बन सकी। भाजपा 28 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन 50 प्लस सीटों का सपना पूरा नहीं हुआ।

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J&K Election 2024: Chenab, Jhelum and Tawi...not united yet, BJP's dream of 50 plus remains unfulfilled, allia
Jammu Kashmir Election Result 2024 - फोटो : बासित जरगर

विस्तार

प्रदेश में चुनी हुई सरकार के लिए तरस रही जनता का नई सरकार की तस्वीर साफ होने से सपना आखिर पूरा हो गया है। इस चुनाव में भी चिनाब, झेलम और तवी का मेल नहीं हो पाया है यानी पूरे प्रदेश में किसी एक पार्टी को बहुमत देने की कोई लहर नहीं चल पाई। भाजपा ने डोगरा राज के नारे से माहौल बनाने की कोशिश जरूर की, लेकिन इसका उम्मीद के अनुरूप परिणाम पर असर नहीं दिखा। भाजपा, नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) और कांग्रेस का अपने-अपने क्षेत्रों में ही असर दिखा। कोई भी पार्टी अपने दायरे से बाहर सीटें जीतने में कामयाब नहीं हो पाई। नेकां कश्मीर घाटी तो भाजपा तवी के मैदानी भागों यानी जम्मू संभाग से बाहर जगह नहीं बना पाई। घाटी में लाख प्रयासों के बाद भी अभी कमल खिलने का मौसम नहीं बन पाया है।
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90 सीटों वाले जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस मिलकर बहुमत के आंकड़े तक पहुंची है। भाजपा का 50 प्लस का सपना अधूरा ही रह गया है। हालांकि भाजपा 28 सीटों के साथ सबसे बड़ी एकल पार्टी बनकर उभरी है। प्रदेश को छह सीएम देने वाली नेकां (42) ने मजबूत वापसी के साथ 27 सीटों की बढ़त बनाई है। दूसरी सबसे बड़ी प्रादेशिक पार्टी और पिछले चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें लेने वाली पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) का भी तिलिस्म बरकरार नहीं रह सका। पिछले चुनाव में 28 सीटें लेने वाली पार्टी तीन सीट तक सिमट गई है। जनता जनार्धन का पूर्ण जनादेश वाली सरकार मिलने का सपना भी चुनाव परिणाम ने तोड़ दिया है। इसका बड़ा कारण अभी भी चिनाब, झेलम और तवी का मिलन न होना है।
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अपवाद के तौर पर 1962 और 1987 के विधानसभा चुनाव को छोड़ दें तो चिनाब घाटी, कश्मीर घाटी, पीर पंजाल और तवी के मैदानी भागों की अपनी-अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते यहां कोई भी पार्टी अकेले कभी बहुमत के आंकड़े तक पहुंचती नजर नहीं आई है। जम्मू की जमीन से इस बार डोगरा सीएम का नारा तो गूंजा, लेकिन भाजपा को पूर्ण बहुमत की तरफ नहीं ले जा पाया। भाजपा ने पीर पंजाल की आठ, चिनाब घाटी की आठ सहित घाटी में 19 सीटों पर चुनाव लड़ा। पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र रैना समेत तमाम बड़े नेता भी चिनाब, झेलम और कश्मीर घाटी के लोगों की तासीर नहीं भांप पाए। दावा था कि पार्टी 50 प्लस सीटें लेगी, फिर पर्दे के पीछे से 35 सीटें जीतने का आत्मविश्वास दिखाया गया, लेकिन ऐसा भी नहीं हो पाया। जम्मू संभाग की 40 सीटों पर जरूर भाजपा को सफलता मिलती नजर आई।

भाजपा ने जम्मू जिले की 11 में 10 सीटों पर बढ़त बनाई। कांग्रेस ने जितने जोर से प्रचार किया। राहुल, खरगे और प्रियंका की रैलियां करवाईं उस अनुरूप नतीजे नहीं मिले। पार्टी 6 सीटों तक सिमट गई। पिछले चुनाव में 86 सीटों पर लड़ी कांग्रेस को 18.36 फीसदी वोट शेयर के साथ 12 सीट मिली थीं। नेशनल कॉन्फ्रेंस को 15 सीट मिली थीं। पीडीपी ने 28 सीट तो भाजपा ने 25 सीट जीतने के बाद विपरीत विचारधारा होते हुए मिलकर सरकार बनाई थी।

पीर पंजाल के जाल में फंसी भाजपा
पीर पंजाल यानी पुंछ और राजोरी का इलाका। यहां भाजपा ने पहाड़ी समुदाय और गुज्जर-बकरवालों को दस फीसदी आरक्षण देखकर अपना आधार बनाने का प्रयास किया, मगर इसमें कामयाबी मिलती नजर नहीं आई। भाजपा की यहां की आठ सीटों पर नजर थी। भाजपा ने चुनाव से पहले गुज्जरों के कई बड़े नेताओं को पार्टी में शामिल कर टिकट भी दिए लेकिन यहां से सीटें निकालती नजर नहीं आईं। पार्टी को यहां से केवल सुंदरबनी कालाकोट सीट पर जीत मिली है। चिनाब घाटी यानी डोडा, किश्तवाड़ और रामबन की आठ सीटों में भाजपा ने पिछले चुनाव में छह पर कब्जा किया था। इस बार भाजपा यहां तीन सीटों के नुकसान में है और तीन सीटें ही जीत पाई है।

स्मार्ट मीटरों ने विपक्ष को ही दिया झटका, भाजपा का बेहतर प्रदर्शन
डोगरा सीएम, जम्मू की सरकार, हिंदू सीएम जैसे नारे गढ़ने वाले जम्मू ने अंतिम समय में भाजपा का साथ दिया। स्मार्ट मीटरों को विपक्ष ने मुद्दा तो जरूर बनाया, लेकिन उन्हें ही झटका लग गया। जम्मू की 11 में 10 सीटों के वोटरों ने कमल पर जमकर बटन दबाया है। स्मार्ट मीटरों के मुद्दे को भाजपा लीडरशिप ने चुनाव से ऐन वक्त पहले जांच कमेटी बनाने की बात कहकर ठंडा कर दिया। आरएस पुरा-जम्मू दक्षिण की सीट को छोड़कर भाजपा ने सुबह से ही बढ़त बनाकर रखी जो उसे दोपहर तक साफ जीत की ओर ले गई।
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