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जम्मू-कश्मीर : जजों पर किसी भी मामले में कार्रवाई का अधिकार अदालतों के पास नहीं
Sat, 21 Aug 2021 04:41 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 21 Aug 2021 04:41 AM IST
सार
- स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की याचिका खारिज
- श्रीनगर प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा, अधिनियम में जजों को है सुरक्षा
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- फोटो : Social Media
विस्तार
स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग की याचिका खारिज करते हुए प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा कि जज के खिलाफ अदालत दीवानी या फौजदारी किसी भी मामले की याचिका का संज्ञान नहीं ले सकती।
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जज (संरक्षण) अधिनियम, 1985 की धारा 3 का हवाला देकर श्रीनगर जिला कोर्ट के प्रथम अतिरिक्त सेशन जज अजय गुप्ता ने कहा कि कानूनी प्रावधानों के दायरे में रहकर ही अदालतें काम करती हैं।
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अधिनियम की धारा में स्पष्ट है कि जज के खिलाफ याचिका पर अदालतें कार्रवाई नहीं कर सकतीं। शुक्रवार को इसी कानूनी व्याख्या के साथ प्रोफेसर अब्दुल गनी भट्ट की याचिका को खारिज कर दिया। याची ने स्पेशल मोबाइल मैजिस्ट्रेट के खिलाफ अवमानना कार्रवाई करने की मांग की थी।
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कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट है कि प्रिसाइडिंग अधिकारी ने जो भी आदेश पारित किया है, वह मामले में कार्यवाही के दौरान पारित किया गया है। धारा 3 के तहत कोर्ट को अधिकार नहीं है कि इसमें कोई कार्रवाई करें।