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J&K: विलेज डिफेंस कमेटी के जांबाजों ने ढेर किए थे 500 आतंकी, हालात बने तो लोहा लेने के लिए फिर तैयार
Thu, 05 Jan 2023 12:30 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Thu, 05 Jan 2023 12:30 PM IST
सार
वर्ष 1995 में डोडा, रियासी, राजोरी और लेह में वीडीसी गठित की गईं। एक कमेटी में 2 एसपीओ और 5 अन्य लोग थे। जम्मू संभाग में आतंकवाद का सफाया होने पर वीडीसी की सक्रियता भी घट गई।
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Dangri terror attack
- फोटो : एजेंसी
विस्तार
राजोरी के ढांगरी में दोहरे आतंकी हमले से जम्मू संभाग के दूरदराज संवेदनशील इलाकों के लोगों में दहशत का माहौल है। लोग सुरक्षा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इस बीच आतंकियों पर जवाबी हमले के लिए वर्ष 1995 में गठित विलेज डिफेंस कमेटियों (वीडीसी) के सदस्य फिर मोर्चा संभालने के लिए तैयार हैं। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद जब चरम पर था, तो वीडीसी के जांबाजों ने 500 के करीब आतंकियों का सफाया कर दिया था। राजोरी हमले के दौरान भी यह जांबाजी देखने को मिली। बड़े नरसंहार का मंसूबा लेकर आए आतंकियों को बुजुर्ग वीडीसी सदस्य बालकृष्ण ने ऐन मौके पर जवाबी फायरिंग कर भागने को मजबूर कर दिया। ढाई दशक पूर्व विलेज डिफेंस कमेटियों की शुरूआत की गई थी।
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वर्ष 1995 में डोडा, रियासी, राजोरी और लेह में वीडीसी गठित की गईं। एक कमेटी में 2 एसपीओ और 5 अन्य लोग थे। जम्मू संभाग में आतंकवाद का सफाया होने पर वीडीसी की सक्रियता भी घट गई। राजोरी में सर्वाधिक 5818 लोग वीडीसी में शामिल हैं। इसके बाद रियासी में 5730 और डोडा में 4822 लोग इन कमेटियों में हैं। शुरूआती दौर में इन जिलों में ही वीडीसी बनाई गईं, जिन्हें बाद में जम्मू के अन्य जिलों में विस्तार दिया गया। इस समय पूरे जम्मू संभाग में 25-25 हजार वीडीसी सदस्य हैं।
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इस बीच वर्ष 2022 में सरकार ने इन कमेटियों को भंग करते हुए वीडीजी के रूप में दोबारा गठित करने का आदेश दिया। ज्यादातर वीडीसी सदस्यों से हथियार वापस ले लिए गए। अब राजोरी में दोहरे आतंकी हमले से सभी वीडीसी को पूरी सुविधाओं के साथ बहाल करने की मांग तेज हुई है। वहीं, जिन वीडीसी सदस्यों के पास हथियार हैं, उन्होंने अपने अपने इलाकों में निगरानी भी शुरू कर दी है। राजोरी में आतंकियों को खदेड़ने में अहम भूमिका निभाने वाले वीडीसी सदस्य बालकृष्ण का कहना है कि उनके पास 303 राइफल है। आतंकियों पर जब उन्होंने छत से फायरिंग की तो वह आगे बढ़ने के बजाय पीछे की ओर चले गए। चार घरों को निशाना बनाने के बाद वह घनी आबादी वाले इलाके में घुसकर नरसंहार करने आए थे।
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आत्मरक्षा के लिए वजूद में आईं वीडीसी
जम्मू संभाग के दूरदराज पहाड़ी इलाकों में आतंकी रात को नरसंहार अंजाम देकर फरार हो जाते थे। निहत्थे ग्रामीणाें के पास अपनी रक्षा के लिए कोई विकल्प नहीं था। ऐसे में वीडीसी का गठन कर बाकायदा प्रशिक्षण दिया गया। वीडीसी सदस्यों को 303 और 12 बोर राइफल दी गईं। इसका नतीजा ये हुआ कि आतंकी हमला होने पर वीडीसी सदस्य सुरक्षा बलों को सूचित कर खुद मोर्चा संभाल लेते। इससे एक तरफ कई आतंकी मारे गए वहीं, कई बड़े हमलों को नाकाम किया जा सका।
वीडीजी में ये किया है बदलाव
अगस्त 2022 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विलेज डिफेंस कमेटियों की जगह विलेज डिफेंस ग्रुप बनाने की घोषणा की थी। कुछेक जिलों में इसके लिए इसकी चयन प्रक्रिया शुुरू कर दी गई। नई योजना के तहत विलेज डिफेंस ग्रुप गठित करने का प्रावधान बनाया गया। इसके सदस्यों को विलेज डिफेंस गार्ड का पदनाम दिया गया है। वीडीजी की कमान किसी सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी या पुलिस कर्मी को मिलनी थी, जिसे प्रति माह वेतन 4500 रुपये मिलना था, जबकि वीडीजी सदस्यों के लिए 4000 रुपये मानदेय तय किया गया।