कश्मीर में आईएस कनेक्शन ने सुरक्षा एजेंसियों के उड़ाए होश
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कश्मीर में आईएस ने अपनी दस्तक दे दी है। अनंतनाग में शुक्रवार को मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों के आईएस कनेक्शन ने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। मीडिया एजेंसी इससे पहले भी आईएस हमले का दावा कर चुकी है, लेकिन हर बार केंद्र और राज्य सरकार ने इसे दरकिनार कर दिया। पहली बार राज्य पुलिस ने स्वीकारा है कि मारे गए आतंकियों के आईएस से कनेक्शन थे। सुरक्षा बलों पर हमले करने के साथ ही उनके हथियार लूटने के भी मामले सामने आए हैं।
पहली घटना पिछले साल नवंबर में श्रीनगर के जकूरा में सामने आई थी जब आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर हमला किया था। इसमें एक पुलिसकर्मी शहीद हो गया था। इसमें श्रीनगर का आतंकी मुगीस अहमद मीर भी मारा गया था। वह आईएस लिखा हुआ टी-शर्ट भी पहना था। उसके शव को आईएस के झंडे में लपेट कर दफनाया गया। इसके बाद फरवरी 2018 में श्रीनगर में अलगाववादी नेता फजल हक कुरैशी के घर पर हमला किया गया। इसमें सुरक्षा गार्ड फारूक अहमद शहीद हो गया था।
आतंकी उसकी सर्विस राइफल भी साथ ले गए थे। अगले दिन आईएस ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए लूटी गई राइफल की तस्वीर वायरल की थी। मार्च में अनंतनाग में मुठभेड़ में तेलंगाना के तौकीफ अहमद और स्थानीय इशा फाजिली मारे गए थे। इशा को आईएस का पोस्टर ब्वॉय माना जाता था। उसके शव को भीड़ ने परिवार वालों से छीनकर जुलूस निकाला और शव को आईएस के झंडे में लपेटकर दफनाया। तौकीफ आईएस की विचारधारा से प्रभावित होकर तेलंगाना से कश्मीर पहुंचा था। जनवरी में पुणे की एक लड़की को श्रीनगर से आत्मघाती महिला के शक में गिरफ्तार किया गया। उसके भी आईएस से प्रभावित होने की आशंका थी। बाद में पुलिस ने पूछताछ के बाद उसे परिवार वालों के हवाले कर दिया था।
2017 की शुरुआत में पांव पसारने किए थे शुरू
माना जाता है कि आईएस ने वर्ष 2017 से कश्मीर में अपने पैर पसारने शुरू कर दिए थे। शुरुआत में प्रदर्शनों औश्र आतंकियों के जनाजे में आईएस के झंडे लहराए जाते रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों की ओर से इन झंडों के लहराए जाने को गंभीर खतरा भी बताया जा चुका है। इसके बाद राज्य पुलिस की ओर से ऐसे तत्वों को चिह्नित भी किया गया। कुछ के खिलाफ कार्रवाई भी की गई।
कश्मीर के चार लोग आईएस से प्रभावित
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री गंगा राम अहीर ने राज्यसभा में एक प्रश्न के जवाब में 15 मार्च, 2017 को कहा था कि एनआईए तथा राज्य पुलिस 11 राज्यों के 75 लोगों के आईएस से प्रभावित होने की जांच कर रही है। इनमें से चार कश्मीर के हैं।
राजनाथ ने आईएस के प्रभाव को नकारा था
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने 14 मार्च, 2018 को गुरुग्राम में आयोजित चौथे काउंटर टेररज्मि कॉन्फ्रेंस में कहा था कि आईएस की विचारधारा से प्रभावित होने वाले लोगों पर पैनी नजर है। विश्वास है कि भारतीय सामाजिक ताना बाना इससे प्रभावित नहीं होगा।
मूसा ने अलगाववादियों को धमकी दी थी
घाटी में आईएस और अलकायदा के झंडे लहराए जाने का अलगाववादियों ने विरोध किया था। अलगाववादी नेता सैय्यद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक, यासीन मलिक और मोहम्मद अशरफ सेहरई ने इसे स्टंट बताते हुए आम कश्मीरियों से आगाह रहने को कहा था। इस पर अल कायदा से जुड़े संगठन अंसार गजावत उल हिंद के कमांडर जाकिर मूसा ने धमकी दी थी कि अलगाववादियों को लाल चौक पर लटका दिया जाएगा। अल कायदा को शरिया राज चाहिए।
आईएस से जुड़ी प्रमुख घटनाएं
नवंबर 2017 : श्रीनगर के बाहरी इलाके जकूरा में पुलिस पार्टी पर हमला। एक पुलिसकर्मी शहीद। श्रीनगर का आतंकी मुगीस अहमद मारा गया।
फरवरी 2018 : श्रीनगर के बाहरी इलाके में अलगाववादी नेता फजल हक कुरैशी के घर हमला। एक पुलिसकर्मी शहीद। आतंकी उसकी राइफल ले भागे।
मार्च 2018 : अनंतनाग में मुठभेड़ में तीन आतंकी मारे गए। इनमें एक तेलंगाना का आईएस से प्र्रभावित आतंकी था। स्थानीय आतंकी इशा फाजिली को आईएस के पोस्टर ब्वॉय के रूप में जाना जाता था।