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एनआईटी कांड की जांच शुरू, 15 दिन में रिपोर्ट देगी कमेटी
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Fri, 08 Apr 2016 11:05 AM IST
सार
- पुलिस ने भी जारी किया वीडियो
- पुलिस ने अज्ञात छात्रों पर मुकदमा दर्ज किया
- कैंपस में हुए प्रदर्शन में शामिल हुईं छात्राएं
- छात्राएं बोलीं- लड़ाई एनआईटी प्रशासन से, केवल न्याय चाहती हैं
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एनआईटी में छात्रों का मार्च
- फोटो : FILE PHOTO
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विस्तार
एनआईटी श्रीनगर में तनाव बदस्तूर है। वीरवार को भी राज्य सरकार का कोई मंत्री एनआईटी नहीं पहुंचा। भाजपा ने चार सदस्यों की टीम भेजने का एलान किया था वह भी नहीं पहुंची। एनआईटी प्रशासन ने छात्रों को घर जाने देने की मांग मान ली है।
11 अप्रैल से होने वाली परीक्षा में शामिल न होने वाले छात्रों को बाद में परीक्षा देने की इजाजत भी दे दी गई है। मानव संसाधन मंत्रालय की टीम छात्रों की समस्याएं निपटाने को कैंपस में ही मौजूद है। श्रीनगर जिला प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है। एडीसी के नेतृत्व में जांच कर रही टीम 15 दिन में रिपोर्ट सौंपेगी।
उप मुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह वीरवार को श्रीनगर तो पहुंचे लेकिन एनआईटी नहीं गए। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी 13 अप्रैल को संसदीय समिति की एक बैठक में हिस्सा लेने श्रीनगर आएंगी। अभी यह तय नहीं है कि वे एनआईटी जाएंगी या नहीं।
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11 अप्रैल से होने वाली परीक्षा में शामिल न होने वाले छात्रों को बाद में परीक्षा देने की इजाजत भी दे दी गई है। मानव संसाधन मंत्रालय की टीम छात्रों की समस्याएं निपटाने को कैंपस में ही मौजूद है। श्रीनगर जिला प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है। एडीसी के नेतृत्व में जांच कर रही टीम 15 दिन में रिपोर्ट सौंपेगी।
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उप मुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह वीरवार को श्रीनगर तो पहुंचे लेकिन एनआईटी नहीं गए। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी 13 अप्रैल को संसदीय समिति की एक बैठक में हिस्सा लेने श्रीनगर आएंगी। अभी यह तय नहीं है कि वे एनआईटी जाएंगी या नहीं।
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डिप्टी सीएम ने माना छात्रों पर हुई ज्यादती
एनआईटी में प्रदर्शन करती छात्राएं
- फोटो : Social Media
दिलचस्प बात यह है कि डिप्टी सीएम निर्मल सिंह जहां मान चुके हैं कि पुलिस ने ज्यादती की है, वहीं राज्य के शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने कहा है कि एफआईआर के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। एक और पांच अप्रैल की घटनाओं के लिए पुलिस ने अज्ञात छात्रों के खिलाफ हिंसा और तोड़फोड़ के मामले में दो एफआईआर दर्ज की गईं हैं।
छात्रों को तुरंत घर जाने देने की मांग को कॉलेज प्रशासन ने मान लिया है। विद्यार्थियों को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक अपनी सूची अभिभावकों के मोबाइल नंबर सहित देने को कहा गया है। उनसे बात करने के बाद ही घर जाने दिया जाएगा। नोटिस में यह भी कहा गया है कि 11 से 14 अप्रैल तक होने वाली परीक्षा में बाकी छात्र बैठ सकते हैं। जो घर जाएंगे उनकी परीक्षा अलग से ली जाएगी।
विद्यार्थियों से कक्षाओं में बैठने को भी कहा गया है। इस बीच पुलिस ने एक वीडियो जारी कर दावा किया है कि इसमें गैर कश्मीरी छात्र हिंसा और तोड़फोड़ करते दिख रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक कुछ लोगों की शिनाख्त भी हो गई है। डीजीपी के राजेंद्रा ने भी कैंपस में पहुंचकर हालात का जायजा लिया। संस्थान को श्रीनगर से शिफ्ट करने की मांग को लेकर गैर कश्मीरी छात्र-छात्राओं ने भारत माता की जय के नारे लगाते हुए संस्थान परिसर में विरोध मार्च निकाला।
छात्रों को तुरंत घर जाने देने की मांग को कॉलेज प्रशासन ने मान लिया है। विद्यार्थियों को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक अपनी सूची अभिभावकों के मोबाइल नंबर सहित देने को कहा गया है। उनसे बात करने के बाद ही घर जाने दिया जाएगा। नोटिस में यह भी कहा गया है कि 11 से 14 अप्रैल तक होने वाली परीक्षा में बाकी छात्र बैठ सकते हैं। जो घर जाएंगे उनकी परीक्षा अलग से ली जाएगी।
विद्यार्थियों से कक्षाओं में बैठने को भी कहा गया है। इस बीच पुलिस ने एक वीडियो जारी कर दावा किया है कि इसमें गैर कश्मीरी छात्र हिंसा और तोड़फोड़ करते दिख रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक कुछ लोगों की शिनाख्त भी हो गई है। डीजीपी के राजेंद्रा ने भी कैंपस में पहुंचकर हालात का जायजा लिया। संस्थान को श्रीनगर से शिफ्ट करने की मांग को लेकर गैर कश्मीरी छात्र-छात्राओं ने भारत माता की जय के नारे लगाते हुए संस्थान परिसर में विरोध मार्च निकाला।
मंदिर बनाने की बात कभी नहीं कही
छात्रों का प्रदर्शन
- फोटो : Social Media
डिप्टी सीएम डॉ. निर्मल सिंह ने दावा किया कि इस मामले को जल्द से जल्द हल कर लिया जाएगा। राज्य सरकार छात्रों की व्यक्तिगत तथा शैक्षिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है। शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने कहा कि पूरी स्थिति पर बारीक नजर रखी जा रही है। राज्य प्रशासन, मानव संसाधन मंत्रालय तथा एनआईटी प्रशासन लगातार स्थितियों की समीक्षा कर रहा है।
कैंपस में विरोध प्रदर्शन कर रहे गैर कश्मीरी छात्रों ने संस्थान के कुछ सदस्यों पर बाहरी छात्रों के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। एनआईटी टीचर्स एसोसिएशन के सचिव ने एक बयान जारी कर कहा है कि छात्रों के आरोपों से हतप्रभ हैं।
बाहरी छात्र परीक्षाओं में बेहतर कर रहे हैं यह संस्थान के रिकार्ड को चेक कर देखा जा सकता है। लेकिन वे संस्थान के स्टैंडर्ड के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं कर सकते हैं। एनआईटी पिटाई कांड को लेकर जम्मू संभाग में दूसरे दिन भी उबाल रहा।
गैर कश्मीरी छात्रों ने अमर उजाला से कहा कि हम किसी धर्म के खिलाफ नहीं हैं और न ही स्थानीय छात्रों से कोई दुश्मनी है। बस हमारी मांग है कि जिन्होंने हमारे साथियों को बेरहमी से पीटा है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि हमने कभी भी कैंपस में मंदिर बनाने की बात नहीं की, जैसी कि अफवाह फैलाई जा रही है।
गैर कश्मीरी विद्यार्थियों ने कक्षाओं का बहिष्कार कर हॉस्टल परिसर में धरना दिया। मार्च निकाल रही लड़कियों को मुख्य द्वार तक नहीं जाने दिया गया। गैर कश्मीरी छात्राओं ने भी मुद्दे को राजनीतिक और सांप्रदायिक रंग दिए जाने पर सख्त एतराज जताया। उनका कहना था कि वे वे केवल अपने दोस्तों के साथ हुए अन्याय के खिलाफ न्याय चाहती है।
कैंपस में विरोध प्रदर्शन कर रहे गैर कश्मीरी छात्रों ने संस्थान के कुछ सदस्यों पर बाहरी छात्रों के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। एनआईटी टीचर्स एसोसिएशन के सचिव ने एक बयान जारी कर कहा है कि छात्रों के आरोपों से हतप्रभ हैं।
बाहरी छात्र परीक्षाओं में बेहतर कर रहे हैं यह संस्थान के रिकार्ड को चेक कर देखा जा सकता है। लेकिन वे संस्थान के स्टैंडर्ड के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं कर सकते हैं। एनआईटी पिटाई कांड को लेकर जम्मू संभाग में दूसरे दिन भी उबाल रहा।
गैर कश्मीरी छात्रों ने अमर उजाला से कहा कि हम किसी धर्म के खिलाफ नहीं हैं और न ही स्थानीय छात्रों से कोई दुश्मनी है। बस हमारी मांग है कि जिन्होंने हमारे साथियों को बेरहमी से पीटा है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि हमने कभी भी कैंपस में मंदिर बनाने की बात नहीं की, जैसी कि अफवाह फैलाई जा रही है।
गैर कश्मीरी विद्यार्थियों ने कक्षाओं का बहिष्कार कर हॉस्टल परिसर में धरना दिया। मार्च निकाल रही लड़कियों को मुख्य द्वार तक नहीं जाने दिया गया। गैर कश्मीरी छात्राओं ने भी मुद्दे को राजनीतिक और सांप्रदायिक रंग दिए जाने पर सख्त एतराज जताया। उनका कहना था कि वे वे केवल अपने दोस्तों के साथ हुए अन्याय के खिलाफ न्याय चाहती है।