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Interview: ऑपरेशन गुलमर्ग विफल न हुआ होता तो मुश्किल था जम्मू-कश्मीर को बचाना, बोले गोवर्धन सिंह जम्वाल

Tue, 23 Sep 2025 01:26 PM IST
निकिता गुप्ता रोली खन्ना अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
रोली खन्ना अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Tue, 23 Sep 2025 01:26 PM IST
सार

सेवानिवृत्त मेजर जनरल गोवर्धन सिंह जम्वाल के अनुसार, यदि महाराजा हरि सिंह ने ऑपरेशन गुलमर्ग को विफल न किया होता तो जम्मू-कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा बन सकता था। महाराजा की दृढ़ इच्छाशक्ति और सामरिक निर्णयों ने राज्य की संप्रभुता को सुरक्षित रखा।

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Interview: Had Operation Gulmarg not failed, it would have been difficult to save Jammu and Kashmir
सेवानिवृत्त जनरल गोवर्धन सिंह जम्वाल - फोटो : अभिषेक बड़ू

विस्तार

डोगरा राजवंश की आन-बान और शान महाराजा हरि सिंह की जयंती 23 सितंबर को जम्मू में धूमधाम से मनाई जाएगी। उनकी स्मृतियां हर खास-ओ-आम के दिलों में जिंदा हैं। कोई उनके शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को याद करता है तो कोई बाल विवाह निषेध के लिए किए गए प्रयासों को याद करता है। यह भी कि ऑपरेशन गुलमर्ग विफल न हुआ होता तो जम्मू-कश्मीर को बचाना 

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मुस्लिम लीग की सांप्रदायिक सोच और अंग्रेजों की चालबाजियों के विरुद्ध उन्होंने हमेशा अपने इरादे बुलंद रखे। उनसे जुड़ी स्मृतियां, उनके योगदान को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए अमर उजाला ने बात की सेवानिवृत्त जनरल गोवर्धन सिंह जम्वाल से। वे कहते हैं कि 23 सितंबर सिर्फ उनकी जयंती ही नहीं, बल्कि यह वह खास दिन है जब महाराजा ने गद्दी संभाली थी। अब इसके 100 वर्ष पूरे हो गए। 

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कोई राज्य इतना महत्वपूर्ण नहीं था
गोवर्धन सिंह कहते हैं कि हमारी रियासत विशाल थी। रूस के करीब अफगानिस्तान, चीन, पाकिस्तान, तिब्बत और पास ही नेपाल और शेष भारत। कोई राज्य इतना अनोखा और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं था। यही वजह थी कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री चर्चिल की नजर इस पर थी।

1945 से ही इस पर हमला करने की तैयारी थी। 1947 में ऑपरेशन गुलमर्ग चलाया गया और जम्मू-कश्मीर पर हमला कर दिया गया। ये महाराजा हरि सिंह ही थे कि उन्होंने करीब 7000 सैनिकों के साथ लड़ाई लड़ी। 800 किलोमीटर लंबी सीमा लखनपुर से लेह तक तैनात किया। मैं सेना का हिस्सा रहा हूं, इसलिए उस भौगोलिक और सामरिक चुनौती को समझता हूं। मैं ये दावे के साथ कह सकता हूं कि यदि ऑपरेशन गुलमर्ग को महाराजा हरि सिंह ने अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति से विफल न किया होता तो जम्मू-कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा बन गया होता। 

पाकिस्तान का स्वामित्व नहीं किया स्वीकार
सेवानिवृत्त जनरल कहते हैं कि वायसराय माउंटबेटन और चर्चिल कश्मीर आए तो उन्होंने महाराजा पर दबाव बनाया कि वे पाकिस्तान में शामिल हो जाएं। ऐसा करने पर डोगरा हुकूमत को सुरक्षित रखने का लालच दिया। वे अंग्रेजों की चाल जानते थे, उन्होंने कहा कि नहीं। इतिहास में क्या लिखा है मैं उसकी बात नहीं करता। मैंने खुद उनसे जो जाना मेरी नजर में वही सही है। इसे हर डोगरा को जानना चाहिए। 

महाराजा की सेना के पहले और आखिरी जनरल
महाराजा हरि सिंह की राज्य सेना के पहले और आखिरी सेवानिवृत्त जनरल गोवर्धन सिंह जम्वाल 93 वर्ष के हैं। वे बताते हैं कि उन्हें 1947 में महाराजा के शासन काल में कमीशन मिला था। 1984 में सेवानिवृत्त होने से पहले 1947-48 के जम्मू-कश्मीर युद्ध और 1965 के खेमकरण, पंजाब युद्ध सहित कई युद्धों में हिस्सा लिया।

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