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देश की सबसे लंबी रोड टनल को महफूज रखेगी ये तकनीक

Wed, 06 Jan 2016 04:29 PM IST
Updated Wed, 06 Jan 2016 04:29 PM IST
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integrated tunnel control system installed in nashri tunnel

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया इस महत्वपूर्ण टनल परियोजना की सुरक्षा के लिए रियासत में अपनी तरह का पहला इंटीग्रेटेड टनल कंट्रोल सिस्टम (आईटीसीएस) लगाने जा रही है।

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सड़क मार्ग पर देश की सबसे लंबी चिनैनी-नाशरी टनल की सुरक्षा पर 300 करोड़ की रकम राशि खर्च होगी। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया इस महत्वपूर्ण टनल परियोजना की सुरक्षा के लिए रियासत में अपनी तरह का पहला इंटीग्रेटेड टनल कंट्रोल सिस्टम (आईटीसीएस) लगाने जा रही है।
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सिस्टम की खासियत है कि टनल के भीतर वही वाहन दाखिल होंगे, जिनके आवागमन से टनल को किसी प्रकार का खतरा न हो। थर्मल स्क्रीनिंग टेकनोलॉजी से न सिर्फ तकनीकी खराबी वाले वाहनों की टनल के बाहर पहचान हो सकेगी, बल्कि विस्फोटक युक्त वाहनों को समय रहते डिटेक्ट कर टनल के बाहर ही रोक लिया जाएगा।
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गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर में आतंकवाद और भौगोलिक परिस्थितियों की चुनौती देश के अन्य हिस्सों की तुलना में कहीं ज्यादा है। इसी को ध्यान में रखते हुए टनल सुरक्षा पर भारी भरकम राशि खर्च की जाएगी।

विस्फोटकों की पहचान करेंगे थर्मल स्क्रीनर

integrated tunnel control system installed in nashri tunnel

हाईवे अथॉरिटी के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार खुली सड़क की तुलना में टनल से वाहनों का आवागमन ज्यादा जोखिम भरा होता है। टनल के दोनों तरफ प्रवेशद्वार के नजदीक थर्मल स्क्रीनिंग प्रक्रिया के तहत एक तरह से त्वरित फिटनेस की क्लीयरेंस दी जाएगी।

इंटीग्रेटेड टनल कंट्रोल सिस्टम में कई कंपोनेंट होंगे, जिनमें थर्मल स्क्रीनिंग का महत्वपूर्ण कंपोनेंट शामिल है। वाहनों के आकार, इंजन सहित अन्य तकनीकी पहलुओं की स्थिति और विस्फोटक सामग्री की ऑटोमेटिक पहचान होगी।

हाईवे अथॉरिटी के जम्मू प्रोजेक्ट डायरेक्टर आरपी सिंह के अनुसार चिनैनी नाशरी टनल के दोनाें तरफ राज्य में अपनी तरह का पहला इंटीग्रेटेड टनल कंट्रोल सिस्टम लगाया जाएगा। टनल सुरक्षा की तमाम चुनौतियों के लिहाज से यह सिस्टम बेहद कारगर होगा।

41 से नौ किलोमीटर में सिमट जाएगी दूरी
चिनैनी-नाशरी टनल की कुल लंबाई नौ किलोमीटर है। टनल बनने से चिनैनी से नाशरी की दूरी वर्तमान के 41 किलोमीटर से सिमट कर महज नौ किलोमीटर रह जाएगी।

टनल के निर्माण पर 2519 करोड़ का खर्च प्रस्तावित है, जबकि इस परियोजना पर हाईवे अथॉरिटी की कुल फाइनेंशियल कॉस्ट 3720 करोड़ रुपये है। टनल का काम 23 मई 2011 को शुरू हुआ, जो 22 मई 2016 को पूरा होना प्रस्तावित है।

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