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गांव की गलियों से यूएन पीस मिशन तक पहुंची शक्ति

Sat, 04 Oct 2014 12:57 AM IST
Updated Sat, 04 Oct 2014 12:57 AM IST
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inspector shakti sharma selected for us peace mission

जम्मू के मजालता ब्लाक के गांव पनाड़ा की गलियों में पली-बढ़ी एक साधारण युवती ने जब वर्ष 1996-97 में जेएंडके पुलिस ज्वाइन की तो गांव वालों को काफी आश्चर्य हुआ था, क्योंकि गांव की लड़कियां न तो ज्यादा पढ़ी लिखी होती थीं और न ही नौकरीपेशा।

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एमएससी करने वाली शक्ति शर्मा ने भी जब पुलिस की नौकरी ज्वाइन की तो उसने कभी सोचा न था कि गांव की गलियों से निकल संयुक्त राष्ट्र के पीस मिशन का हिस्सा बनेंगी।
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लेकिन कुछ कर गुजरने की दृढ़ इच्छाशक्ति ने शक्ति देवी को न सिर्फ इस्तांबुल और अफगानिस्तान में यूएन मिशन का हिस्सा बनाया, बल्कि उसके सराहनीय कार्य को देखते हुए उसे ‘इंटरनेशनल फीमेल पुलिस पीसकीपर अवार्ड-2014’ से भी नवाजा गया।

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दो महीनों के बाद भारत आती हैं शक्ति

inspector shakti sharma selected for us peace mission

त्रिकुटा नगर एक्सटेंशन के सेक्टर चार स्थित शक्ति शर्मा के परिवार में नवरात्र के दिनों में खुशियां छाई हुईं हैं। शक्ति की भाभी अनुराधा के अनुसार भले ही वह पुलिस इंस्पेक्टर है, लेकिन उसका व्यवहार काफी निर्मल है। वह हमेशा समाज सेवा के कामों में लगी रहती है।

यही कारण है कि जब पहली बार इस्तांबुल के पीस मिशन के लिए उसका चयन हुआ तो उसने सहर्ष स्वीकार कर लिया। यूएन मिशन से लौटने के बाद उसे अफगानिस्तान के लिए चुना गया तो वह फिर इस मिशन के लिए तैयार हो गई। यूएन मिशन का दो बार हिस्सा बनने के बावजूद इंस्पेक्टर शक्ति शर्मा साधारण जीवन व्यतीत करने में विश्वास रखती है।

यही कारण है कि अकसर वह अपने गांव जाती है। वहां पशुओं को चारा देने से लेकर उनकी देखभाल करने से भी परहेज नहीं करतीं। परिवार वालों के अनुसार धार्मिक प्रवृत्ति की शक्ति अफगानिस्तान मिशन में दो माह की ड्यूटी के बाद 15 दिन की छुट्टी पर आती है तो बावे वाली माता और वैष्णो देवी के दरबार में जरूर पहुंचती है।

किरण बेदी हैं शक्ति की आदर्श

inspector shakti sharma selected for us peace mission

इंस्पेक्टर शक्ति शर्मा देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी की जीवन शैली और कार्यक्षमता की प्रशंसक है। विद्यार्थी जीवन में ही जब कभी टीवी पर किरण बेदी आती थीं, तो वह अकसर उनके जैसी महिला पुलिस अफसर बनने की बात कहती थी। परिवार वालों के अनुसार उन्हीं को आदर्श मानकर वह आगे बढ़ती गई और आज इस मुकाम पर पहुंची है।

बच्चों को है बूजी का इंतजार
बड़े भाई और उनके बच्चों के साथ रहने वाली इंस्पेक्टर शक्ति शर्मा का अब परिवार बेसब्री से लौटने का इंतजार कर रहा है। 12वीं में पढ़ने वाली अकशिला शर्मा, 11वीं पढ़ने वाला सारंग शर्मा और पांचवीं की छात्रा आकर्षिता अपनी बूजी (बुआ) का स्वागत करने की तैयारी में हैं।

वैसे तो उन्हें अभी लौटने में समय लगेगा, लेकिन वह अवार्ड पाकर लौटने वाली बूजी को लेकर काफी उत्साहित हैं। बच्चों के अनुसार बूजी उन्हें अकसर साधारण जीवन जीने की नसीहत देती रहती हैं।

अफगानिस्तान में बिताए दिनों का जिक्र करते हुए कहती हैं कि उन्हें क्या पता लोग कैसे जीवन यापन करते हैं। कई बार तो ड्यूटी के दौरान उन्हें भी सूखी रोटी खानी पड़ती है।

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