अलगाववादियों के उदारवादी धड़े से केंद्र की वार्ता की हो रही पहल
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन कश्मीर के तहत अब अलगाववादियों के उदारवादी धड़े से वार्ता की पहल हो रही है। केंद्र ने साफ कर दिया है कि वार्ता बिना शर्त और संविधान के दायरे में होगी। कश्मीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए अलगाववादी विचारधारा के लोगों से बातचीत रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कुछ महीनों में कश्मीर समस्या के स्थायी समाधान का दावा किया है। समाधान की दीर्घकालिक रणनीति के तहत आतंकियों को घेरकर समाप्त करने, उपद्रवियों पर सख्ती और घुसपैठ पर पूरी तरह रोक के लिए कदम उठाए गए हैं।
कम उम्र के पत्थरबाजों की काउंसिलिंग और पेशेवर पत्थरबाजों पर पीएसए लगाने की रणनीति पर भी अमल किया जाना है। इसी रणनीति के दूसरे चरण में अलगाववादियों से वार्ता होगी।
बातचीत में शामिल नहीं होंगे यासिन मलिक और गिलानी
शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक को केंद्र से बातचीत में सैयद अली शाह गिलानी और यासीन मलिक के गुट को शामिल नहीं किया जाएगा। कश्मीर में हिंसा फैलाने के लिए पाकिस्तान से पैसे लेने के आरोप में ये दोनों नेता फंसे हैं।
अलगाववादी शब्बीर शाह पर एनआईए का शिकंजा कसने वाला है। गिलानी के दामाद से पूछताछ हो रही है। एनआईए के सूत्रों के मुताबिक गिलानी से पूछताछ के लिए पर्याप्त आधार मिल गया है। अब किसी भी दिन गिलानी से पूछताछ हो सकती है।
एनआईए जांच में पाकिस्तान से धन लेने वाले हुर्रियत नेताओं को अलग-थलग करने की रणनीति के तहत दूसरी पंक्ति के नेताओं को वार्ता में तरजीह देने की रणनीति है।
मीरवाइज के संपर्क में पीडीपी के नेता
सूत्रों के अनुसार अलगाववादियों के उदारवादी गुट के मीरवाइज उमर फारूक और उनके करीबियों से अब तक एनआईए जांच में पूछताछ नहीं हुई है। अगर मीरवाइज इस जांच घेरे से बचते हैं तो उनसे केंद्र की बातचीत संभव है। केंद्र की सलाह पर पीडीपी के कुछ नेताओं की मीरवाइज से इस बाबत बातचीत हुई है। रणनीति के तहत केंद्र सरकार कश्मीर पर संविधान के दायरे में वार्ता कर हर तरह की विचारधारा से सलाह का लचीला रुख दिखा सकती है।
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