'IS से लड़ने के लिए भारत-पाक को एक होने की जरूरत'
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नेशनल कांफ्रेंस के संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि आईएस से लड़ने के लिए भारत और पाकिस्तान को एक होकर मुकाबला करने की जरूरत है।
फारूक ने फिर दोहराया कि नियंत्रण रेखा को अंतरराष्ट्रीय सीमा बनाया जाना चाहिए। फारूक अपने पिता शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की 110वीं जयंती पर नेकां की ओर से आयोजित समारोह के दौरान उनकी कब्र पर श्रद्धांजलि देने हजरत बल पहुंचे थे।
पत्रकारों से बात करते हुए फारूक ने आईएस के खतरे पर कहा कि जब तक दोनों देशों के बीच कोई फैसला नहीं होता, तब तक यह चीजें होती रहेंगी। आईएस से बचना है तो दोनों देशों को एक होना होगा।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पाकिस्तान दौरे पर कहा कि हमें काफी खुशी है कि वह जा रही हैं और उम्मीद करते हैं कि इस दौरे से पाकिस्तान के साथ हमारे संबंध और बेहतर होंगे। बेहतर संबंधों का असर भविष्य में दोनों देशों की बातचीत पर अच्छा पड़ सकेगा।
किसी न किसी को मिर्ची लगनी ही थी
पीओके संबंधी अपने बयान पर कायम रहते हुए फारूक ने फिर कहा कि मेरे बयान पर शोर तो मचना ही था, किसी न किसी को मिर्ची लगनी ही थी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा अगर और कोई हल है तो वह मुझे बताएं।
अगर यह फैसला होता है तो इस तरीके से कश्मीर का यह हिस्सा हमारा और वह उनका होगा। दोनों हिस्सों को अगर स्वायत्तता मिले तो यह सीमाएं खुद-ब-खुद बेमायने हो जाएंगी।
इसके बाद दोनों तरफ के लोग सीमा के इस पार या उस पार आसानी से आ-जा सकेंगे, व्यापार बढ़ेगा, परिवार जुड़ेंगे और परेशानियां कम होंगी। उन्होंने कहा कि इसके बाद भारत और पाकिस्तान के आपसी संबंध और मजबूत होंगे।
असहिष्णुता पर उन्होंने कहा कि हम इसका खंडन करते हैं और हमें इस बात की खुशी है कि अधिकतर लोगों ने इसका खंडन किया है। हमें याद रखना चाहिए कि यह वतन सबका है। हिंदू, मुसलमान, सिख, बौद्ध सबका यह वतन है। हम सबको एकसाथ मिलकर इसे चलाना होगा।