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संसद ने जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक को दी मंजूरी, इन पांच भाषाओं को मिला आधिकारिक दर्जा

Wed, 23 Sep 2020 03:07 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Wed, 23 Sep 2020 03:07 PM IST
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Indian Parliament pass jammu kashmir official language bill 5 language including hindi gets status
गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी(फाइल फोटो) - फोटो : Social Media

देश की संसद ने मानसून सत्र के आखिरी दिन यानी बुधवार को जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक-2020 को मंजूरी प्रदान कर दी जिसमें पांच भाषाओं हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, कश्मीरी और डोगरी को केंद्र शासित प्रदेश की आधिकारिक भाषा का दर्जा देने का प्रावधान है।

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विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने बताया कि जम्मू कश्मीर के 74 प्रतिशत लोगों की भाषा कश्मीरी और डोगरी है किंतु इन भाषाओं को 70 साल तक राज्य की आधिकारिक भाषा नहीं बनाकर लोगों को उनकी आकांक्षाओं से वंचित रखा गया।
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जी किशन रेड्डी ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से कश्मीरी, डोगरी, उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं को जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक भाषा घोषित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में बड़ी संख्या में लोग कश्मीरी, डोगरी और हिंदी बोलते और समझते हैं।
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रेड्डी ने बताया, '2011 की जनगणना के अनुसार, देश में जितने लोग कश्मीरी बोलने वाले हैं, उनमें से 53.26 प्रतिशत जम्मू कश्मीर में हैं। लेकिन 70 साल तक कश्मीरी आधिकारिक भाषा नहीं थी। यह एतिहासिक भूल थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एतिहासिक गलतियों को सुधारा जा रहा है और हम यह भी करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य में 2.3 प्रतिशत लोगों की भाषा हिंदी है।’

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार भाषा, धर्म, जाति के आधार पर भेदभाव में विश्वास नहीं रखती। मंत्री के जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक-2020 को मंजूरी प्रदान कर दी। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है।

जम्मू कश्मीर में सिर्फ 0.16 प्रतिशत लोग ही बोलते हैं ऊर्दू

इससे पहले रेड्डी ने कहा कि 70 साल से उर्दू जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक भाषा है लेकिन जम्मू-कश्मीर में उर्दू भाषा बोलने वाले लोग 0.16 प्रतिशत ही हैं। उन्होंने कहा कि उर्दू और अंग्रेजी दोनों को आधिकारिक भाषा के तौर पर जारी रखा जाएगा। वह ये भी बोले कि डोगरी वहां दूसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है।

रेड्डी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पंजाबी भाषा बोलने वाले लोगों की संख्या 1.78 प्रतिशत है। इसलिए इस भाषा को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार किसी भी क्षेत्रीय भाषा के खिलाफ नहीं है।

उन्होंने कहा कि राज्य में बोले जानी वाली पंजाबी, गुज्जरी और पहाड़ी के विकास के लिए विधेयक में कई प्रावधान किए गए हैं। उच्च सदन में विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए पीडीपी के मीर मोहम्मद फैज ने कहा कि इसमें पंजाबी, गुज्जरी और पहाड़ी भाषा को भी शामिल किया जाए।

भाजपा के एस एस नागर ने पंजाबी, गुज्जरी और पहाड़ी को इस सूची में शामिल करने की मांग का समर्थन किया। शिरोमणि अकाली दल के नरेश गुजराल ने कहा कि इस विधेयक में पंजाबी को शामिल नहीं किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के संविधान में भी पंजाबी एक आधिकारिक भाषा थी। उन्होंने इस विधेयक में पंजाबी को शामिल करने की मांग की। भाजपा के शमशेर सिंह मन्हास ने विधेयक में डोगरी भाषा को आधिकारिक भाषा बनाने के प्रस्ताव का स्वागत किया।

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