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ग्राउंड जीरो से: समदो बॉर्डर तक पांच घंटे के सफर में भारतीय सेना को लग रहे 12 घंटे
Mon, 29 Jun 2020 05:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अशोक राणा, केलांग
अशोक राणा, केलांग
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 29 Jun 2020 05:24 AM IST
सार
- हिमाचल में 205 किमी लंबा सामरिक महत्व का ग्रांफू-काजा-समदो मार्ग खस्ताहाल
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ग्रांफू-काजा-समदो मार्ग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण 205 किलोमीटर लंबे ग्रांफू-काजा-समदो मार्ग की बदहाल स्थिति दशकों बाद भी नहीं सुधरी है। सड़क की सबसे खराब हालत ग्रांफू से बातल तक है। 55 किमी के इस हिस्से में सड़क कम और गड्ढे अधिक नजर आते हैं। ग्रांफू से समदो पहुंचने में 5 घंटे लगते हैं, लेकिन आजकल सेना के काफिलों को 12 घंटे तक लग रहे हैं।
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बीआरओ के लिए भी यह मार्ग चुनौती बना हुआ है। पारछू झील टूटने के बाद भारत-तिब्बत सड़क अवरुद्ध होने से ग्रांफू-समदो मार्ग सेना के लिए लाइफलाइन साबित हुआ था।
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यह सड़क समदो बॉर्डर को ग्रांफू में मनाली-लेह सामरिक मार्ग से जोड़ती है। सबसे खराब हालत तो ग्रांफू से बातल तक है। न तो बीआरओ और न ही लोनिवि सड़क को सुधार पाया है।
सड़क पत्थरों और नालों से होकर गुजरती है। सड़क की हालत खस्ता होने से ग्रांफू से बातल के बीच वाहन महज 15 से 20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलते हैं।
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जबकि, सड़क सुधारने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्चे जा चुके हैं। दशकों से सड़क की हालत जस की तस है, हालांकि गत 18 जून को केंद्र सरकार ने राजपत्र जारी कर इसे फिर बीआरओ को सौंप दिया है।