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Jammu News: चिनाब ब्रिज बना सेना की रीढ़, हर हाल में जवाब देने को तैयार रहेगा भारत
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- रक्षा विशेषज्ञ बोले - एलओसी से एलएसी तक दोगुनी हुई सेना के मूवमेंट की क्षमता
- हर मौसम में घाटी तक पहुंचेंगे जवान, टैंक और गोला-बारूद
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कश्मीर घाटी तक ट्रेन पहुंचते ही भारतीय सेना को सामरिक दृष्टि से बड़ी मजबूती मिल गई है। चिनाब नदी पर बना विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे का आर्च पुल अब भारतीय सेना की रणनीतिक रीढ़ बन चुका है। इस पुल के माध्यम से सेना को हर मौसम में घाटी तक पहुंचने, हथियार और रसद पहुंचाने और भारी सैन्य उपकरणों की ढुलाई में सुविधा मिलेगी। रक्षा विशेषज्ञ इसे ‘गेम चेंजर स्ट्रक्चर’ मानते हैं, जो भारत की सीमाओं की सुरक्षा को नया आयाम देगा।
दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच में मिलेगी सामरिक बढ़त
ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) डॉ. विजय सागर धीमान बताते हैं कि यह पुल हमारी ऑपरेशनल रीढ़ है। चाहे एलओसी हो या एलएसी हो, या फिर कोई आतंकी संकट, अब सेना को किसी भी कार्रवाई में देर नहीं होगी। अब सेना को राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जो बर्फबारी, बारिश और भूस्खलन के कारण बाधित हो जाता था। अब रेल के जरिये साल भर सेना की मूवमेंट और रसद आपूर्ति संभव हो सकेगी। यह सेना की तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता को हर मौसम में सुनिश्चित करेगा। डॉ. धीमान का कहना है कि सरकार को अब रेलवे स्टेशनों पर उचित बुनियादी ढांचा विकसित करने की जरूरत है, जिससे एक साथ बड़ी संख्या में जवानों और सैन्य उपकरणों को तेजी से जरूरत वाले स्थान पर भेजा जा सके।
भूकंप और मिसाइल में भी अडिग रहेगा पुल
जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद बताते हैं कि पहले जम्मू से श्रीनगर तक सैनिकों और सैन्य सामग्री को पहुंचने में करीब दस घंटे लगते थे। अब यही कार्य चार घंटे में पूरा किया जा सकेगा। दिल्ली से चलने वाले जवान तीन से चार दिन बाद घाटी पहुंचते थे। अब एक ही दिन में सैन्य लॉजिस्टिक्स घाटी में तैनात हो सकेगा। यह भारत की डिफेंस पॉलिसी में गेम चेंजर साबित होगा। डॉ. वैद ने यह भी कहा कि यह रेलवे लाइन इतनी मजबूत है कि उस पर टैंक, तोप, बख्तरबंद वाहन और भारी कंटेनर तक आसानी से भेजे जा सकते हैं। चिनाब ब्रिज को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि मिसाइल हमले या भूकंप जैसी आपदाओं का उस पर कोई प्रभाव नहीं होगा।
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- हर मौसम में घाटी तक पहुंचेंगे जवान, टैंक और गोला-बारूद
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कश्मीर घाटी तक ट्रेन पहुंचते ही भारतीय सेना को सामरिक दृष्टि से बड़ी मजबूती मिल गई है। चिनाब नदी पर बना विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे का आर्च पुल अब भारतीय सेना की रणनीतिक रीढ़ बन चुका है। इस पुल के माध्यम से सेना को हर मौसम में घाटी तक पहुंचने, हथियार और रसद पहुंचाने और भारी सैन्य उपकरणों की ढुलाई में सुविधा मिलेगी। रक्षा विशेषज्ञ इसे ‘गेम चेंजर स्ट्रक्चर’ मानते हैं, जो भारत की सीमाओं की सुरक्षा को नया आयाम देगा।
दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच में मिलेगी सामरिक बढ़त
ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) डॉ. विजय सागर धीमान बताते हैं कि यह पुल हमारी ऑपरेशनल रीढ़ है। चाहे एलओसी हो या एलएसी हो, या फिर कोई आतंकी संकट, अब सेना को किसी भी कार्रवाई में देर नहीं होगी। अब सेना को राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जो बर्फबारी, बारिश और भूस्खलन के कारण बाधित हो जाता था। अब रेल के जरिये साल भर सेना की मूवमेंट और रसद आपूर्ति संभव हो सकेगी। यह सेना की तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता को हर मौसम में सुनिश्चित करेगा। डॉ. धीमान का कहना है कि सरकार को अब रेलवे स्टेशनों पर उचित बुनियादी ढांचा विकसित करने की जरूरत है, जिससे एक साथ बड़ी संख्या में जवानों और सैन्य उपकरणों को तेजी से जरूरत वाले स्थान पर भेजा जा सके।
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भूकंप और मिसाइल में भी अडिग रहेगा पुल
जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद बताते हैं कि पहले जम्मू से श्रीनगर तक सैनिकों और सैन्य सामग्री को पहुंचने में करीब दस घंटे लगते थे। अब यही कार्य चार घंटे में पूरा किया जा सकेगा। दिल्ली से चलने वाले जवान तीन से चार दिन बाद घाटी पहुंचते थे। अब एक ही दिन में सैन्य लॉजिस्टिक्स घाटी में तैनात हो सकेगा। यह भारत की डिफेंस पॉलिसी में गेम चेंजर साबित होगा। डॉ. वैद ने यह भी कहा कि यह रेलवे लाइन इतनी मजबूत है कि उस पर टैंक, तोप, बख्तरबंद वाहन और भारी कंटेनर तक आसानी से भेजे जा सकते हैं। चिनाब ब्रिज को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि मिसाइल हमले या भूकंप जैसी आपदाओं का उस पर कोई प्रभाव नहीं होगा।
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