अमर उजाला ब्यूरो जम्मू। लॉकडाउन से हाईकोर्ट समेत तमाम अदालतों का कामकाज बंद है। सिर्फ अति आवश्यक मामलों की सुनवाई ही हो रही है। ऐसे में न्यायिक व्यस्था से जुड़े हजारों लोगों की आर्थिक स्थिति पर भी लॉकडाउन का तगड़ा असर पड़ा है। खासकर वो लोग जो कोर्ट कचैरियों में मुंशी, स्टेनों, आवेदन लिखने और नोटरी का काम करते हैं। इनका कामकाज अदालतों में आने वाले लोगों पर निर्भर करता है। लेकिन लॉकडाउन के चलते इनके पास कोई काम नहीं। जिससे इन लोगों के सामने रोजी रोटी का भी संकट है। जम्मू संभाग में हाईकोर्ट समेत तमाम अदालतों से जुड़े ऐसे लोगों की संख्या दस हजार के आसपास है। हालांकि हाईकोर्ट ने कहा है कि कोविड 19 को लेकर यदि कोई परेशान है तो वह हाईकोर्ट से संपर्क कर सकता है। उधर, राजस्व व्यवस्था से जुड़े लोगों का कामकाज भी प्रभावित हुआ है। जिला उपायुक्त कार्यालयों में काम करने वाले लोग भी प्रभावित हुए हैं। मंगत राम मैजिस्ट्रेट कार्यालय में शिकायत लेकर आने वाले लोगों को आवेदन लिखकर कर देते हैं। इसी से उनका गुजारा होता था। लेकिन 20 दिनों से इनके पास कोई काम नहीं। राज कुमार कोर्ट में स्टांप बेचने का काम करते हैं। इनका काम भी बंद है। कुलदीप राज स्टेनों टाइपिंग का काम करते हैं। नीटू कुमार का कहना है कि वह नोटरी हैं, लेकिन लॉकडाउन से उनका काम भी बंद है। वकील भी प्रभावित युवा वकील नरेश चौधरी का कहना है कि काम तो प्रभावित हुआ है। 20 से 22 मामले हैं, जिनकी सुनवाई टली हुई है। बार एसोसिएशन कर रही मदद अब तक 193 वकीलों को प्रत्येक को पांच हजार रुपये की आर्थिक मदद दी गई है। इसके अलावा कइयों को राशन आदि भी दे रहे हैं। बहूूत से लोग अपनी परेशानियों को लेकर हमसे संपर्क कर रहे हैं। जिनकी मदद करने के लिए हमने सूची बनाई है। अगले दो तीन दिन में इन तक मदद पहुंचाई जाएगी। अभिनव शर्मा, प्रधान, बार एसोसिएशन हाईकोर्ट जम्मू