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Interview: इल्तिजा ने अमर उजाला से कहा- महबूबा की बेटी होना शुरुआत, इसके बाद लोग मुझे चाहते हैं तो मेरी क्षमता

Mon, 16 Sep 2024 09:34 AM IST
दुष्यंत शर्मा उपमिता वाजपेयी, कश्मीर
उपमिता वाजपेयी, कश्मीर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 16 Sep 2024 09:34 AM IST
सार

खानदान ने जब पहले से दो पूर्व सीएम दिए हों तो उम्मीदों का ग्राफ काफी ऊंचा होता है। विपक्ष कहता है वह बच्ची हैं, परिवारवाद का आरोप कदम दर कदम उनके साथ चलता है। चुनाव और कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर इल्तिजा मुफ्ती से अमर उजाला की खास बातचीत।  

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Iltija said- Being Mehbooba's daughter is the beginning, but after this if people want me then my ability is t
इल्तिजा मुफ्ती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अंदाज-ए-बयां

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  • मैं पाकिस्तान की प्रवक्ता नहीं हूं, मेरा पासपोर्ट भारतीय है, नीले रंग का है, तो मैं क्यों उनकी वकालत करूं 
  • कश्मीर में जो सियासतदां हैं, लोग उन्हें गलत समझते हैं, इज्जत नहीं देते, मेरे लिए इज्जत सबसे अहम है, प्यार न भी मिले, पर सम्मान होना चाहिए 
  • जितना आदमी में दम है उससे ज्यादा मुझमें दम है। यह समय बताएगा, मुझे मेरा बाजा बजाने की  जरूरत नहीं  

मुफ्ती मोहम्मद सईद की नातिन और मेहबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती नाना और अम्मी की पारंपरिक सीट बिजबिहेड़ा से चुनाव लड़ रही हैं। खानदान ने जब पहले से दो पूर्व सीएम दिए हो तो उम्मीदों का ग्राफ काफी ऊंचा होता है। विपक्ष कहता है वो बच्ची है, परिवारवाद का आरोप कदम दर कदम उनके साथ चलता है। चुनाव और कश्मीर से जुड़े मसले मसाइल पर इल्तिजा से अमर उजाला की खास बातचीत।

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कश्मीर में पॉलिटिक्स की प्रायोरिटी क्या है?
'मैं सच कहूं तो पांच साल से कश्मीर में पॉलिटिक्स तो बंद हो गई है। बोलने की आजादी खत्म हो गई है। ये चुनाव दस साल बाद हो रहा है। पिछला विधानसभा चुनाव 2014 में हुआ। पांच साल से बाबू-डम चल रहा है। बाहर से ब्यूरोक्रेट्स लाए जाते हैं जो यहां ऐश कर रहे हैं। लोगों के मसाइल हैं वो किसके पास जाएं। बाबू का तो आपको पता है। लोगों में यहां डर है, खौफ का माहौल है। तो अच्छा है हमारे यहां चुनाव हो रहे हैं।'
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सड़क-पानी-बिजली हमेशा चुनावों का बड़ा मुद्दा होता है, कश्मीर में कश्मीरी पंडित या लोगों को जेल से छुड़ाना है क्या?
'मैं जिस मीटिंग में जाती हूं हर जगह कम से कम चार पांच औरतें मिलती हैं, वो बहुत ज्यादा रोती हैं। वो इतनी मासूम होती हैं, पढ़ी लिखी भी नहीं हैं। पीएसए को पीडीएफ कह देती हैं। इतने बुरे हालात हैं। मासूमियत में उन्हें ये भी नहीं पता की कौन से कानून में उनके इंसान को गिरफ्तार किया है। हमें कहीं पता चला कि एक दिव्यांग को पुलिस ने उठाया है। ये बड़ा मसला है। किसी और राज्य में प्रचार करेंगे महाराष्ट्र झारखंड दिल्ली वहां ये इशू नहीं होते। कश्मीर में सबकुछ ठीक नहीं है। हमें उसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। हमारे नौजवान जेलों में सड़ रहे हैं।'

कश्मीर की दोनों बड़ी पार्टियों पर परिवारवाद का आरोप लगता है, मुफ्ती की तीसरी पीढ़ी चुनाव लड़ रही है और अब्दुल्ला की चौथी पीढ़ी प्रचार कर रही है, इसका फायदा होता है या नुकसान?
दोनों बातें हैं। बहुत लोग मुझे मुंह पर कहते हैं आपके लिए वोट है, आपकी पार्टी के लिए नहीं दे रहे हैं। क्योंकि उन्होंने पांच साल में मुझे देखा है। मीडिया में मेरा चेहरा बहुत आया। लेकिन ये दो धारी वाली तलवार की तरह है। मैं मेहबूबा मुफ्ती की बेटी हूं वो मेरी शुरूआत है। लेकिन इसके बाद ये लोग मुझे चाहते देते हैं तो वो मेरी क्षमता या अक्षमता है। इसके बाद जो भी आवाम तय करेगा वो मुझे मंजूर है। जीत हार दोनों। 



 

सियासत खून और घूटी में मिली है, लेकिन कभी लगा नाना और अम्मी ने कोई गलती की जो मैं कभी नहीं करूंगी?
बहुत चीज गलतियों के बारे में नहीं होती। नियत ठीक होती है, नतीजे ठीक नहीं होते। किस्मत ठीक नहीं होती। तकदीर नहीं होती। मैं बस उम्मीद करती हूं लोग मुझसे नफरत न करें। कश्मीर में जो ज्यादातर सियासतदान हैं, लोग उन्हें गलत समझते हैं, इज्जत नहीं देते। मेरे लिए इज्जत सबसे अहम है। प्यार भी नहीं मिले, लेकिन इज्जत होनी चाहिए। जब मैं पीठ दूसरी तरफ करूं तो कोई मुझे बुरा न कहे। 

इस बार बहुत सारे आजाद कैंडिडेट, बरकती, जमात, इंजीनियर राशिद मैदान में हैं। आपको क्या लगता है नेशनल कांफ्रेंस बड़ा खतरा है या ये लोग?
विधानसभा का चुनाव उम्मीदवार की लड़ाई है। पार्टी भी इतनी जरूरी नहीं जितना उम्मीदवार होता है। उसका इलाके में असर होता है। सबको हक है क्यों नहीं वो चुनाव लड़े। ये तो ओछापन हुआ कि कोई और लड़े तो गलत है। हम ही सारा कब्जा करें। लोकतंत्र है जम्हूरियत है, देखते हैं कहां किसका कितना जोर है, किसका गढ़ है, इसमें कुछ गलत नहीं। 

ये बच्ची है, कश्मीर नहीं जानती, जीपीएस लेकर चलती है, कैसा लगता है जब ये कहा जाता है, क्योंकि आप लड़की हो और युवा हो?
हां ये बहुत होता है। वो बुरी नियत के साथ नहीं करते। मेरी उम्र 37 साल है। लेकिन कुछ लोग ऐसे करते हैं,  इसको ये बताओ,  इसको ये सिखाओ। वो कराओ। वक्त सब बता देगा। मेरी क्या क्षमता है। मैं तो सभी जगह कहती हूं जितना आदमी में दम है उससे ज्यादा मुझमें दम है। ये समय बताएगा, मुझे मेरा बाजा बजाने की जरूरत नहीं है। मैं इत्मिनान से हूं। आखिरी में मेरी जो असलियत है ये मुझे पता है और लोग भी महसूस करेंगे।

खाला के किडनैप को लेकर आप तकरीर में बता रहीं थीं, बचपन में नाना और अम्मी ने आतंकवाद के बारे में कैसे बताया था?
मेरी पैदाइश दिल्ली की है। जब खाला की किडनैपिंग हुई औऱ मैं स्कूल जाती थी तो मेरे साथ सिक्योरिटी गार्ड होते थे। तो मुझे थोड़ा थोड़ा समझ में आया। आप उनकी बंदूकें देखते हैं, वो बच्चे के मन पर असर करता है। जब मैं दस साल की थी तो मुझे ये समझ थी कि शायद मेरी अम्मी मेहबूबा जी वापस लौटकर घर नहीं आएंगी। मैंने सोचा शायद मैं अपनी मां को भी खो दूंगी। मेरी मां तलाकशुदा हैं। मेरे पास सिर्फ मां ही हैं। तो बच्ची होकर भी पता होता है कि कुछ गड़बड़ है।

इल्तिजा क्यों इलेक्शन लड़ रही हैं?
ताकि लोगों में उम्मीद की किरण बनूं। सकारात्मक उम्मीद के साथ आऊं। जो यहां डर है खौफ का माहौल है पकड़ धकड़ का माहौल है उसके खिलाफ बात करूं। असेंबली हमारी कमजोर होगी लेकिन आवाज मेरी बुलंद होगी। मैं बिना खौफ बात करूंगी। मैं किसी से डरती नहीं हूं। इसलिए चुनाव लड़ रही हूं।

आप महिलाओं से सीधे बात करती हैं, इससे विपक्ष को खतरा है?
अगर वो मेरे साथ जुड़ रही हैं वो बाकियों के साथ भी जुड़ें। महिलाओं का रीप्रेजेंटेशन बहुत कम है कश्मीर में। शायद उन्हें सुरक्षित नहीं लगता। जब वो निकलती हैं तो मुझे अच्छा लगता है। मैं उन्हें समझाती हूं। लड़कियां मुझे कहती हैं बताओ स्कूल कैसे जाएं। यहां सड़क नहीं। पानी भरना पड़ता है। दिन में चार चार घंटे पानी भरती हैं लड़कियां। तालीम कब हासिल करेंगे। मैं घर पर फिल्टर पानी पी रही हूं। उम्मीद है मैं लड़कियों के लिए कुछ कर पाऊं।

कश्मीर का मसला पाकिस्तान से जुड़ा होता है, आप क्या कहेंगी?
बातचीत सबसे करना चाहिए। ये टीआरपी का पाइंट बंन जाता है। सब सोचते हैं चलो इससे पाकिस्तान पर सवाल पूछते हैं। मैं वहां की स्पोक्सपर्सन तो नहीं हूं। मेरा पासपोर्ट भारतीय है। नीले रंग का है। तो मैं क्यों उनकी वकालत करूं। उनकी अपनी दिक्कतें हैं। अपनी मुश्किलें हैं।

इल्तिजा का पहला चुनाव है, नर्वस हो?
ना। पर आप लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरें इसका तनाव होता है। लोगों की उम्मीदें होती हैं। लोग जब जुड़ते हैं तो ये डर होता है कि क्या होगा अगर मैंने उन्हें निराश किया। मैं सो नहीं पाती हूं फिर। आप देखेंगी तो मेरी आंखों के नीचे गड्डे हो गए हैं। क्योंकि मैं सो नहीं पा रहीं।

आप कश्मीर की बेटी हैं, सबको फिक्र होगी इल्तिजा कब शादी करेगी, आपका ड्रीम मैन?
ये ड्रीम मैन की बात नहीं। उस व्यक्ति से मिलने का मसला है कि जिसके लिए आप ये कदम उठाएं। मुझे डर लगता है। अगर कोई बंदा हो ऐसा जो शादी करने लायक हो जिसकी आंखों में आप अपना फ्यूचर देखें। तो मैं भी अपना परिवार चाहूंगी। मैं दिल से पारंपरिक हूं। घर सजाना चाहती हूं। इंशाअल्लाह। लेकिन ये ऊपर वाला लिखता है।

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