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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   If there was no Sadar-e-Riyasat then the Dogras would have disappeared

जम्मू कश्मीर: अगर सदर-ए-रियासत नहीं होते तो डोगरों का नामोनिशान खत्म हो जाता

Sun, 03 Mar 2024 02:43 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Sun, 03 Mar 2024 02:43 PM IST
सार

तवी महोत्सव के दूसरे दिन जम्मू विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की प्रोफेसर सुमन जम्वाल ने तवी नदी पर तब और अब पर बातचीत की। इसके बाद एचसीसीडी दिल्ली की प्रमुख बिंदू मनचंदा द्वारा इनटैक द्वारा किए जा रहे विभिन्न कार्यों के बारे में जानकारी दी गई।

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If there was no Sadar-e-Riyasat then the Dogras would have disappeared
डॉ. कर्ण सिंह - फोटो : एजेंसी

विस्तार

अगर सदर-ए-रियासत नहीं बना होता, तो डोगरा अब तक अधीन हो गए होते और मुझे इस पर गर्व है। यह बातें डॉ. कर्ण सिंह ने हसबंस सिंह के साथ बातचीत के दौरान कही। उन्होंने कहा कि शुरू से ही शेख अब्दुल्ला का पूरा अभियान डोगरों के खिलाफ था। शेख अब्दुल्ला की सबसे कमजोर कड़ी उनकी डोगरा विरोधी जुनून था। उन्होंने कहा कि वह मेरे लिए सबसे मुश्किल अवधि थी।

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हरबंस सिंह ने डॉ. कर्ण सिंह से लेखक के रूप में उनके 70 वर्षों के लेखन पर चर्चा की। बाद में रश्ना इम्हासली द्वारा बताए गए अपने सपनों और उनकी व्याख्या के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि 90 साल की उम्र में उनकी अपने पिता महाराजा हरि सिंह के साथ सपनों में मुलाकात हुई थी। 
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अपने एक सपने का जिक्र करते हुए बताया कि एक बार उनके सपने में काली माता आई थीं, उस दौरान उन्होंने काली माता के हाथों में गुलाबजामुन रखा था। इस सपने की व्याख्या करते हुए कहा कि गुलाबजामुन यानी जम्मू-कश्मीर का दायित्व मां काली के हाथों सौंप दिया। डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि वह जब भी सोते हैं, तो कोई न कोई सपना जरूर देखते हैं।
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तवी महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को जम्मू विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की प्रोफेसर सुमन जम्वाल ने तवी नदी पर तब और अब पर बातचीत की। इसके बाद एचसीसीडी दिल्ली की प्रमुख बिंदू मनचंदा द्वारा इनटैक द्वारा किए जा रहे विभिन्न कार्यों के बारे में जानकारी दी गई। इनटैक जम्मू चैप्टर के अरविंद कोतवाल ने पारंपरिक वैष्णो देवी मार्ग का विस्तृत विवरण दिया। इसके बाद ललित गुप्ता द्वारा आयोजित क्षेत्रीय साहित्य और अनुवाद: चुनौतियां और पहल विषय पर पैनल चर्चा हुई, जिसमें पैनलिस्ट डोगरी संस्था के ललित मंगोत्रा और गोजरी लेखक जावेद रूही थे। अलग-अलग सेमिनार और वार्ता में विभिन्न हस्तियों ने भाग लिया। डॉ. कर्ण सिंह का सत्र आकर्षण का केंद्र रहा।


कलाकारों ने संगीत और नृत्य से सांस्कृतिक परंपराओं को किया प्रस्तुत

तवी फेस्ट में शाम के समय सीमा अनिल सहगल ने शानदार प्रस्तुति दी। इसके अलावा अन्य कलाकारों ने संगीत और नृत्य के माध्यम से क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं को प्रस्तुत किया। वहीं, बलवंत ठाकुर के निर्देशन में नटरंग के कलाकारों ने प्रस्तुति दी। इससे पहले तवी महोत्सव का पहला दिन जितेंद्र सिंह की मधुर प्रस्तुतियों के साथ समाप्त हुआ।

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