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नजरिया : अनुच्छेद 370 नहीं होता तो हैदराबाद की तरह होता श्रीनगर- जितेंद्र सिंह

Sun, 14 Jun 2020 03:17 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 14 Jun 2020 03:17 AM IST
सार

  • पीएमओ में केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा- कांग्रेस की ठगी की राजनीति का पर्दाफाश, कश्मीर के चश्मे से देखना बंद करें

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If Article 370 were not there, Srinagar would have been like Hyderabad said jitendra singh
डॉ. जितेंद्र सिंह

विस्तार

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री, केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्यमंत्री तथा पूर्वोत्तर मामलों के प्रभारी डॉ. जितेंद्र सिंह का कहना है कि अनुच्छेद 370 हटने से जम्मू-कश्मीर में पिछले 70 साल से चल रही ठगी की राजनीति का खात्मा हुआ है। अब सीधे केंद्र का शासन चलेगा। जम्मू-कश्मीर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ेगा। आतंकवाद और अलगाववाद के लिए कोई जगह नहीं होगी। युवाओं को काम के अवसर मिलेंगे। अनुच्छेद 370 नहीं होता तो जम्मू आज जालंधर की तरह होता और श्रीनगर हैदराबाद की तरह। राज्य की राजनीति, विकास कार्यों, प्रशासनिक सुधार, भ्रष्टाचार, आतंकवाद और मोदी सरकार की प्राथमिकताओं पर उन्होंने बृजेश कुमार सिंह से खुलकर बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश-

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विरोधियों को खुली चुनौती, 370 पर खुलकर आएं सामने

डॉ. सिंह का कहना है कि अनुच्छेद 370 को हटाने पर विरोधी दल के लोग दाएं-बाएं बातें करते हैं। विरोधियों को खुली चुनौती है कि वे खुलकर बताएं कि अनुच्छेद 370 हटाने के पक्ष में है या इसके खिलाफ हैं। यदि वे दोबारा सत्ता में आए तो इसकी बहाली करेंगे? 1964 में संसद में इस पर बहस हुई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री व गृह मंत्री गुलजारी लाल नंदा की मौजूदगी में लगभग यह सहमति बन गई थी कि अनुच्छेद 370 के जाने का वक्त आ गया है, लेकिन दुर्भाग्य से पाकिस्तान के साथ युद्ध शुरू हो गया। फिर शास्त्री जी का निधन हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में 2019 में इसे हटाकर प्रायश्चित किया गया। भूकंप आ जाने तथा खून की नदियां बहने की धमकी देने वालों कीकल्पना से बाहर की बात थी कि किसी सरकार में इतनी दृढ़ इच्छाशक्ति होगी कि वह 370 को खत्म कर देगी।

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कांग्रेस बताए पाकिस्तानी शरणार्थियों को नागरिकता मिले या नहीं

जम्मू-कश्मीर में सेल्फ रूल और ऑटोनॉमी की बात करने वाले गांवों में लोकतंत्र को मजबूत करने तथा पंच-सरपंचों को अधिकार देने के पक्ष में कभी नहीं रहे। बाद में राज्य में शांतिपूर्ण पंचायत चुनाव हुए। पंच-सरपंचों को उनके अधिकार मिले। लेफ्टिनेंट गवर्नर के कार्यकाल में 73वां व 74वां संशोधन लागू हुआ। 70 साल पहले पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को उनके अधिकार नहीं मिले थे। देश ने पाकिस्तान से आए डॉ. मनमोहन सिंह और इंद्र कुमार गुजराल को प्रधानमंत्री बना दिया लेकिन पाकिस्तानी शरणार्थी भटकते रहे। कांग्रेस जवाब दे कि पाक शरणार्थियों को नागरिकता मिले या नहीं।

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मोदी सरकार में कश्मीर से ज्यादा जम्मू में काम

उन्होंने कश्मीर और जम्मू की तुलना कर भेदभाव के आरोप लगाने वालों को भी आड़े हाथ लिया। कहा कि हर चीज को कश्मीर के चश्मे से देखना बंद होना चाहिए। मोदी सरकार में जम्मू के लोगों को कश्मीर से ज्यादा ही मिला है। एम्स का काम जम्मू में शुरू हो गया है। प्रदेश में दो बॉयोटेक पार्क मंजूर हुए थे, जिनमें से जम्मू संभाग के कठुआ जिले के घाटी में बॉयोटेक पार्क का काम पूरा होने वाला है।

औद्योगिक विकास को लगेंगे पंख, 25 हजार करोड़ होगा निवेश

370 हटने के बाद औद्योगिक विकास को पंख लगेंगे। लॉकडाउन की वजह से दिक्कत आई है। यहां 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई गई है। हल्दीराम जैसे बड़े ग्रुप ने यहां आउटलेट खोलने में दिलचस्पी दिखाई है। औद्योगिक नीति बन रही है। इन्वेस्टर्स समिट कोरोना संकट के चलते नहीं हो सका, जिससे निवेश को और बढ़ावा मिलता। सरकार की कोशिश है कि जम्मू-कश्मीर भी मुख्यधारा का हिस्सा बने।

भ्रष्टाचार पर कसेगी नकेल, नौकरशाह नहीं कर सकेंगे मनमानी

जम्मू-कश्मीर में भ्रष्टाचार बड़ी समस्या रही है। पूर्ववर्ती राज्य सरकारों ने भ्रष्टाचार रोकने के नियम भी ईमानदारी से नहीं बनाए। अब केंद्रीय कानून लागू हो गए हैं। सीबीआई का भी सीधा हस्तक्षेप होगा। पहले की सरकारें सीबीआई को केस सौंपती ही नहीं थी। भ्रष्टाचार पर पूरी तरह नकेल कसेगी। नौकरशाह प्रॉपर्टी रिटर्न तथा वार्षिक प्रगति रिपोर्ट नहीं भरते थे। अब ऐसा नहीं चलने वाला। प्रॉपर्टी रिटर्न नहीं भरने वाले अधिकारियों की पदोन्नति प्रभावित होगी।

राजनीतिक सरपरस्ती बंद, आतंकवाद-अलगाववाद की टूटी कमर

कश्मीर में अब न तो आतंकवाद को स्थान मिलेगा और न ही अलगाववाद को। 370 हटने से राजनीतिक सरपरस्ती बंद हो गई है। बंदूक उठाने वालों का वहीं हश्र होगा। केंद्र सरकार का स्पष्ट मत है कि आतंकियों का सफाया कर कश्मीर को जन्नत बनाना है। वहां के युवा भी समझ चुके हैं कि पत्थरबाजी तथा आतंक के रास्ते पर जाने से भला नहीं होने वाला। उनके सामने अलगाववादियों के परिवारों का सच भी आ गया है, जिसमें उनके बच्चे विदेशों में पढ़ रहे हैं या फिर नौकरी में हैं।

पूर्वोत्तर का विकास मॉडल बना उदाहरण

पूर्वोत्तर के विकास का मॉडल पूरे देश के सामने उदाहरण है। पूर्वोत्तर ने हमें अपनाया और हमने पूर्वोत्तर को। मिजोरम में जहां की आबादी सात-आठ लाख लाख की है, वहां भी उसी हिसाब से विकास किए जा रहे हैं। पूर्वोत्तर के सभी राज्यों का समान रूप से विकास किया जा रहा है। मोदी सरकार में किसी के साथ न तो भेदभाव हो रहा है और न ही किसी को विशेष को तवज्जो दी जा रही है।

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