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उल्टा चोर कोतवाल को डांटे!: मौत के बाद पाकिस्तानी झंडे में लपेटा गया था गिलानी का शव, हुर्रियत ने पुलिस पर लगाए आरोप

Tue, 07 Sep 2021 03:04 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 07 Sep 2021 03:04 AM IST
सार

सैयद अली शाह गिलानी की मौत के बाद उनके शव पर पाकिस्तानी झंडा लपेटा गया था। इतना ही नहीं राष्ट्रविरोधी नारे भी लगाए गए थे।

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Hurriyat conference accused police in Geelani s body wrapped in Pakistani flag after death case
सैयद अली शाह गिलानी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ऑल पार्टीज हुर्रियत कांफ्रेंस (एपीएचसी) ने सोमवार को सैयद अली शाह गिलानी के परिवार के खिलाफ अधिकारियों द्वारा उनकी मौत के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने की निंदा की है। एपीएचसी ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने गिलानी की मौत के बाद उनके शव को अपने कब्जे में ले लिया और कब्रिस्तान में दफना दिया। गौरतलब है कि गिलानी की मौत के बाद उनके शव पर पाकिस्तानी झंडा लपेटा गया था। इतना ही नहीं राष्ट्रविरोधी नारे भी लगाए गए थे। पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया था, जांच जारी है। इसी को लेकर हुर्रियत कांफ्रेंस ने पुलिस पर आरोप लगाया है।

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एपीएचसी ने कहा कि यह बहुत दुखद और अमानवीय है। आरोप लगाया कि एक परिवार को अपने प्रियजन को दफनाने के मूल अधिकार से वंचित कर दिया गया। इस तरह की सख्ती के बाद अधिकारी अब एफआईआर और गिरफ्तारी की धमकी देकर परिवार को परेशान कर रहे हैं। एपीएचसी ने कहा कि दुख और अन्याय की इस घड़ी में हम अपने नेता के परिवार के साथ खड़े हैं।
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इससे पहले पीडीपी मुखिया महबूबा ने भारत को लोकतांत्रिक देश बताते हुए गिलानी के परिवार का बचाव किया। इस मामले में महबूबा मुफ्ती ने पुलिस को ही कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि गिलानी के शरीर के साथ किया गया व्यवहार अनावश्यक था। कोई जीवित व्यक्ति से लड़ सकता है, लेकिन मृत शरीर को उदासीन उपचार नहीं मिलना चाहिए। श्रीनगर में महबूबा ने कहा कि वीडियो और समाचार से पता चला है कि जम्मू-कश्मीर के लोग काफी निराश हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को परिवार की इच्छा के मुताबिक गिलानी का अंतिम संस्कार करने की इजाजत देनी चाहिए थी। 
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महबूबा ने कहा कि उनका भी गिलानी से मतभेद था, लेकिन शव के प्रति उदासीन व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए था। हमने जो देखा वह मानवता के खिलाफ था। सभी की अंतिम इच्छा का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी बंदूक के बल पर किसी भी नेता से प्यार या नफरत करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है।

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