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सुप्रीम कोर्ट में 73वीं सुनवाई में अल्पसंख्यक आयोग पर उम्मीद जगी

Tue, 28 Mar 2017 12:38 PM IST
बृ़जेश कुमार सिंह, अमर उजाला/जम्मू
बृ़जेश कुमार सिंह, अमर उजाला/जम्मू Updated Tue, 28 Mar 2017 12:38 PM IST
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hope for minority commission emerged in 73rd hearing at SC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : File Photo

रियासत में अल्पसंख्यकों को चिह्नित करने और अल्पसंख्यक आयोग के गठन का मामला पिछले एक साल से सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। अब जाकर उम्मीद जगी है कि हिंदुओं को रियासत में अल्पसंख्यक की सुविधाएं मिल सकेंगी।

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केंद्र सरकार पर 30 हजार और केंद्र व राज्य सरकार पर 15-15 हजार का जुर्माना लग चुका है। अब केंद्र और राज्य सरकार को यह हिदायत दी गई है कि रियासत के असल अल्पसंख्यकों को चिह्नित किया जाए। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से यह उम्मीद जगी है कि जल्द ही अल्पसंख्यकों के साथ न्याय हो पाएगा। 
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वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार रियासत में 28.44 फीसदी हिंदुओं की आबादी है, जबकि मुस्लिमों की 68.31 प्रतिशत। इसके साथ ही सिख-1.87, बौद्ध-0.90, क्रिश्चियन-0.28, जैन-0.02 तथा अन्य समुदाय की आबादी 0.01 फीसदी है। 

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सुप्रीम कोर्ट अब तक 73 बार सुनवाई

hope for minority commission emerged in 73rd hearing at SC
सुप्रीम कोर्ट अब तक 73 बार सुनवाई - फोटो : डेमो फोटो

रियासत में मुस्लिमों की संख्या 8567485 तथा हिंदुओं की संख्या 3566674 है। बौद्ध समुदाय की संख्या 2011 की जनगणना में 112584 रही है, जबकि 2001 में इनकी आबादी 113787 थी।

पिछले लंबे समय से हिंदुओं समेत अन्य अल्पसंख्यक समुदाय के लोग सुविधाओं को लेकर मांग करते रहे हैं, आंदोलन भी किए गए, लेकिन घाटी आधारित पार्टियों ने सत्ता में रहते हुए इन मांगों को दरकिनार कर दिया। 

इस मामले में पीआईएल दाखिल करने वाले जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के वकील अंकुर शर्मा का कहना है कि उन्होंने पिछले वर्ष जून के महीने में सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल किया था। अब तक 73 बार सुनवाई हो चुकी है। केंद्र तथा राज्य सरकार पर जुर्माना भी सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगाया जा चुका है।

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