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Jammu News: मधुमक्खी पालन का कर रहे कारोबार, और लोगों को भी दे रहे रोजगार
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सांबा। मधुमक्खी पालन रोजगार का अच्छा साधन साबित हो रहा है। जिले के राजपुरा निवासी मधुमक्खी पालक शिशु पाल भी मधुमक्खी के शहद से हजारों कमा रहे हैं।
शिशु पाल ने बताया कि उन्होंने वर्ष 1998 में बीए की पढ़ाई की लेकिन रोजगार नहीं मिला। किसी ने उन्हें मधुमक्खी पालन की सलाह दी। इस पर उन्होंने कठुआ में एक माह तक प्रशिक्षण लिया। उसके बाद 10 डिब्बे से अपना कारोबार शुरू किया और आहिस्ता आहिस्ता 40 डिब्बे तक पहुंचाया। दो वर्ष तक कारोबार बंद रखा क्योंकि उन्होंने एक सरसों के खेत के निकट डिब्बे रखे थे। किसान ने सरसों के खेत में कीटनाशक स्प्रे कर दिया था। इससे 40 डिब्बे की सारी मधुक्खियां मर गईं। इससे उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा। बाद में कश्मीर से एक मधुमक्खी पालक से मधुमक्खी ली। दोबारा कारोबार शुरू किया। खादी विलेज इंडस्ट्री विभाग से ऋण लेकर कारोबार को बढ़ाया ओर 175 डिब्बे तक कारोबार पहुंचाया। शीशुपाल ने बताया कि फरवरी से अप्रैल माह तक वह जम्मू में ही रहते हैं। मई से सितंबर तक कश्मीर में चले जाते हैं। अक्तूबर में हरियाणा के रेवाड़ी जाते हैं। राजस्थान भी जाते हैं। दो वर्ष गुजरात भी गए थे। वहां पर अच्छी कमाई होती है। निजी कंपनियां उनसे सारा शहद खरीद लेती हैं। उन्होंने दो लोगों को भी अपने साथ रोजगार दिया है।
मौसम के मुताबिक एक वर्ष में 10 से 15 क्विंटल शहद की पैदावार हो जाती है। वे प्रत्येक महीने 30-35 हजार कमा लेते हैं। सरकार की ओर से सीधे तौर पर मधुमक्खी पालकों से शहद की खरीद किए जाने से उन्हें अधिक लाभ मिलेगा। कई बार शहद की बिक्री न होने परेशानी होती है।
बाक्स
विभाग की ओर से युवाओं को शहद के कारोबार से जोड़ा गया है। जिले में शहद के 44 यूनिट चल रहे हैं। युवाओं को प्रशिक्षण दिलाकर स्वयं के रोजगार के बारे में जागरूक किया जा रहा है। सरकार की ओर से सब्सिडी पर ऋण दिया जाता है।
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-मदन गोपाल सिंह
मुख्य जिला कृषि अधिकारी सांबा
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शिशु पाल ने बताया कि उन्होंने वर्ष 1998 में बीए की पढ़ाई की लेकिन रोजगार नहीं मिला। किसी ने उन्हें मधुमक्खी पालन की सलाह दी। इस पर उन्होंने कठुआ में एक माह तक प्रशिक्षण लिया। उसके बाद 10 डिब्बे से अपना कारोबार शुरू किया और आहिस्ता आहिस्ता 40 डिब्बे तक पहुंचाया। दो वर्ष तक कारोबार बंद रखा क्योंकि उन्होंने एक सरसों के खेत के निकट डिब्बे रखे थे। किसान ने सरसों के खेत में कीटनाशक स्प्रे कर दिया था। इससे 40 डिब्बे की सारी मधुक्खियां मर गईं। इससे उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा। बाद में कश्मीर से एक मधुमक्खी पालक से मधुमक्खी ली। दोबारा कारोबार शुरू किया। खादी विलेज इंडस्ट्री विभाग से ऋण लेकर कारोबार को बढ़ाया ओर 175 डिब्बे तक कारोबार पहुंचाया। शीशुपाल ने बताया कि फरवरी से अप्रैल माह तक वह जम्मू में ही रहते हैं। मई से सितंबर तक कश्मीर में चले जाते हैं। अक्तूबर में हरियाणा के रेवाड़ी जाते हैं। राजस्थान भी जाते हैं। दो वर्ष गुजरात भी गए थे। वहां पर अच्छी कमाई होती है। निजी कंपनियां उनसे सारा शहद खरीद लेती हैं। उन्होंने दो लोगों को भी अपने साथ रोजगार दिया है।
मौसम के मुताबिक एक वर्ष में 10 से 15 क्विंटल शहद की पैदावार हो जाती है। वे प्रत्येक महीने 30-35 हजार कमा लेते हैं। सरकार की ओर से सीधे तौर पर मधुमक्खी पालकों से शहद की खरीद किए जाने से उन्हें अधिक लाभ मिलेगा। कई बार शहद की बिक्री न होने परेशानी होती है।
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विभाग की ओर से युवाओं को शहद के कारोबार से जोड़ा गया है। जिले में शहद के 44 यूनिट चल रहे हैं। युवाओं को प्रशिक्षण दिलाकर स्वयं के रोजगार के बारे में जागरूक किया जा रहा है। सरकार की ओर से सब्सिडी पर ऋण दिया जाता है।
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-मदन गोपाल सिंह
मुख्य जिला कृषि अधिकारी सांबा