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हिजबुल के निशाने पर पूर्व आतंकी, पढ़ें खबर
डॉ बृजेश कुमार सिंह/ अमर उजाला, जम्मू
Updated Tue, 16 Jun 2015 12:45 AM IST
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घाटी में पूर्व आतंकियों को एक बार फिर से आतंक के दलदल में धकेलने की आतंकी संगठनों ने साजिश रची है। आम नागरिकों की तरह जीवनयापन कर रहे पूर्व आतंकी तथा आतंकवादियों के खिलाफ काम करने वाले लोग निशाने पर हैं। पूर्व आतंकियों का सुरक्षा एजेंसियों द्वारा आतंकवाद के खिलाफ मुखबिर के तौर पर इस्तेमाल करने की आशंका के चलते हिजबुल ने खूनी खेल खेलना भी शुरू कर दिया है।
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बीते एक सप्ताह में सोपोर में आतंकी संगठन द्वारा चार पूर्व आतंकियों की हत्या कर दी गई है। अमरनाथ यात्रा से पहले घाटी में शुरू हुए इस खूनखराबा से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं हैं। सूत्रों का कहना है कि 1990 के दशक में जब आतंकवाद चरम पर था तो कश्मीर से आतंक की ट्रेनिंग लेने कई लोग पीओके गए थे। इनकी संख्या 4000 से ज्यादा बताई जाती है।
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इनमें से 300 से अधिक लोग सरकार को आवेदन कर घाटी लौट चुके हैं। पीओके से आतंकवाद की ट्रेनिंग लेकर लौटे कई आतंकियों ने पिछले कुछ सालों में आतंक का रास्ता छोड़कर आम नागरिकों की तरह जीवनयापन शुरू कर दिया है। हिजबुल मुजाहिदीन के निशाने पर ऐसे ही पूर्व आतंकी हैं।
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आतंकी संगठनों को पूर्व आतंकियों के सुरक्षा एजेंसियों का मुखबिर बनकर उन्हें नुकसान पहुंचाने का शक है। साथ ही आतंकवाद का रास्ता छोड़ने वालों का आम नागरिक बनकर समाज का हिस्सा बनने से पाकिस्तान के कश्मीर एजेंडे को भी झटका पहुंचा है।
तहरीक ए तालिबान के पोस्टर की पड़ताल शुरू
घाटी में पिछले दिनों कई जगह चस्पा किए गए तहरीक ए तालिबान के पोस्टरों की सुरक्षा एजेंसियों ने पड़ताल शुरू कर दी है। सूत्रों ने बताया कि यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह किसी की शरारत थी या फिर वास्तव में कोई नया आतंकी संगठन उठ खड़ा हुआ है। इससे पहले लश्कर ए इस्लाम संगठन की आड़ में हिजबुल ने मोबाइल टावरों और टावर संचालकों को अपना निशाना बनाया था।