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5 माह में 101 आतंकी ढेर,बड़ी संख्या में नए आतंकियों की भर्ती, सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ी
Mon, 03 Jun 2019 06:33 AM IST
राजेश सैनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
Published by: राजेश सैनी
Updated Mon, 03 Jun 2019 06:33 AM IST
सार
मूसा के मारे जाने के बाद बदला ट्रेंड, नई भर्तियां सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय
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फाइल फोटो
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विस्तार
घाटी में अंसार गज्वातुल हिंद प्रमुख जाकिर मूसा के मारे जाने के 23 मई से हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों के अंसार गज्वातुल हिंद में शामिल होने के मामले बढ़े हैं। पिछले पांच महीने में 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया गया है, लेकिन अच्छी खासी संख्या में नए आतंकवादियों की भर्ती सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है।
इस वर्ष 31 मई तक 101 आतंकी मारे गए जिनमें 23 विदेशी और 78 स्थानीय आतंकी थे। मारे गए आतंकवादियों में सबसे ज्यादा संख्या शोपियां से हैं जहां 16 स्थानीय आतंकियों समेत 25 आतंकवादी मारे गए। पुलवामा में 15, अवंतिपोरा में 14 और कुलगाम में 12 आतंकी ढेर किए गए। मारे गए आतंकियों में अंसार गज्वातुल हिंद प्रमुख जाकिर मूसा भी है।
अधिकारियों ने बताया कि मार्च महीने से 50 युवक विभिन्न आतंकी संगठनों में शामिल हो चुके हैं। घाटी में 2010 से 2013 की तुलना में 2014 से युवाओं के हथियार उठाने के मामले बढ़े हैं। वर्ष 2010 में 54, 2011 में 23, 2012 में 21 तथा 2013 में छह युवाओं ने आतंक का रास्ता अपनाया था। 2014 में यह संख्या 53, 2015 में 66 तथा 2016 में 88 थी।
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अधिकारियों के अनुसार पुलवामा में 14 फ रवरी को सीआरपीएफ काफिले पर आतंकी हमले के बाद आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ के दौरान दक्षिण कश्मीर में स्थानीय लोगों के प्रदर्शन तथा पथराव की घटनाएं बढ़ीं हैं। आतंकियों के जनाजे में भी बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। इससे ऐसा माहौल बन सकता है जो नए आतंकियों की भर्ती के लिए मुफीद बन जाए।
अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियों को नए आतंकियों तक जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति रोकने का बेहतर तरीका खोजना होगा। साथ ही युवाओं में बढ़ते कट्टरता को रोकने के लिए उनके परिवार वालों को शिक्षित करना जरूरी है। आतंकवाद से मुकाबला करने या इसके लिए रणनीति बनाने में शामिल अधिकारियों का मानना है कि आतंकवाद निरोधक नीति पर दोबारा विचार करने की जरूरत है। इसके अलावा युवाओं को आतंकवाद की बुराइयां समझाने के लिए ऐसे युवाओं तथा उनके माता-पिता के साथ बात करने की जरूरत है।
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इस वर्ष 31 मई तक 101 आतंकी मारे गए जिनमें 23 विदेशी और 78 स्थानीय आतंकी थे। मारे गए आतंकवादियों में सबसे ज्यादा संख्या शोपियां से हैं जहां 16 स्थानीय आतंकियों समेत 25 आतंकवादी मारे गए। पुलवामा में 15, अवंतिपोरा में 14 और कुलगाम में 12 आतंकी ढेर किए गए। मारे गए आतंकियों में अंसार गज्वातुल हिंद प्रमुख जाकिर मूसा भी है।
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अधिकारियों ने बताया कि मार्च महीने से 50 युवक विभिन्न आतंकी संगठनों में शामिल हो चुके हैं। घाटी में 2010 से 2013 की तुलना में 2014 से युवाओं के हथियार उठाने के मामले बढ़े हैं। वर्ष 2010 में 54, 2011 में 23, 2012 में 21 तथा 2013 में छह युवाओं ने आतंक का रास्ता अपनाया था। 2014 में यह संख्या 53, 2015 में 66 तथा 2016 में 88 थी।
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अधिकारियों के अनुसार पुलवामा में 14 फ रवरी को सीआरपीएफ काफिले पर आतंकी हमले के बाद आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ के दौरान दक्षिण कश्मीर में स्थानीय लोगों के प्रदर्शन तथा पथराव की घटनाएं बढ़ीं हैं। आतंकियों के जनाजे में भी बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। इससे ऐसा माहौल बन सकता है जो नए आतंकियों की भर्ती के लिए मुफीद बन जाए।
अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियों को नए आतंकियों तक जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति रोकने का बेहतर तरीका खोजना होगा। साथ ही युवाओं में बढ़ते कट्टरता को रोकने के लिए उनके परिवार वालों को शिक्षित करना जरूरी है। आतंकवाद से मुकाबला करने या इसके लिए रणनीति बनाने में शामिल अधिकारियों का मानना है कि आतंकवाद निरोधक नीति पर दोबारा विचार करने की जरूरत है। इसके अलावा युवाओं को आतंकवाद की बुराइयां समझाने के लिए ऐसे युवाओं तथा उनके माता-पिता के साथ बात करने की जरूरत है।