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Jammu: 'आतंकियों से डरने वाले पुलिसकर्मी फोर्स का हिस्सा बनने लायक नहीं', हाईकोर्ट की टिप्पणी

Tue, 09 Jul 2024 05:57 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: विजय पुंडीर Updated Tue, 09 Jul 2024 05:57 AM IST
सार

जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि अगर आम लोगों के रक्षक ही अपने कर्तव्यों से विमुख हो जाएं तो इस देश को भगवान ही बचा सकता है। ये टिप्पणी हाईकोर्ट ने एक बर्खास्त पुलिस कर्मी की याचिका पर सुनवाई के दौरान की।

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High Court said that policemen who are afraid of terrorists are not fit to be a part of the force
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

लोगों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले पुलिस बल के अधिकारी और कर्मचारी अगर आतंकवादियों से डर जाएं, तो ऐसे पुलिस कर्मी व अधिकारी पुलिस बल का हिस्सा बनने के लायक नहीं हैं। अगर आम लोगों के रक्षक ही अपने कर्तव्यों से विमुख हो जाएं तो इस देश को भगवान ही बचा सकता है। ये टिप्पणी हाईकोर्ट ने एक बर्खास्त पुलिस कर्मी की याचिका पर सुनवाई के दौरान की।

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आतंकी धमकी के बाद नौकरी से गैरहाजिर रहने और अब बहाली के लिए आवेदन करने वाले स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) अजाज राशिद खांडे की याचिका पर सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के न्यायाधीश संजय धर ने कहा कि यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता नियुक्ति की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए सुनवाई या पूछताछ के किसी भी अधिकार का हकदार नहीं था। इसलिए प्रतिवादियों के लिए यह आवश्यक नहीं था कि वे स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) के रूप में उनकी सेवाएं समाप्त करने से पहले जांच करें या सुनवाई का अवसर दें। वैसे भी वर्तमान मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में ऐसी जांच बिल्कुल भी आवश्यक नहीं थी। 
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वर्ष 2019 में बर्खास्त किया गया था एसपीओ 
जानकारी के अनुसार खांडे वर्ष 2014 में बतौर स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) नियुक्त हुआ था। उसे वर्ष 2019 में पद से बर्खास्त कर दिया गया था। यह कारवाई नौकरी से गैरहाजिर होने पर की गई थी। एसपीओ ने अदालत में बताया कि उसे 2016 में अनंतनाग में रहते हुए आतंकियों ने धमकी दी थी और उसकी रेकी हो रही थी। इसलिए वह नौकरी से गैरहाजिर रहा।  

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