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हाईकोर्ट: जम्मू-कश्मीर में इस्लामी बैंकिंग पर लगी रोक को नहीं हटा सकते, यह सरकार का नीतिगत फैसला
Tue, 26 Jul 2022 06:54 PM IST
विमल शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: विमल शर्मा
Updated Tue, 26 Jul 2022 06:54 PM IST
सार
कोर्ट ने कहा कि याची पक्ष सरकार के इस फैसले से प्रभावित है तो वह इस मामले को लेकर उचित मंच पर सरकार को चुनौती दे सकता है। गैर सरकारी संस्था जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम ने जम्मू-कश्मीर में इस्लामी बैंकिंग शुरू करने के लिए सरकार को अनुमति देने का निर्देश देने संबंधी याचिका दायर की थी।
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highcourt srinagar
- फोटो : फाइल
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने प्रदेश में इस्लामी बैंकिंग शुरू करने पर सरकार की ओर से लगाई गई रोक में हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायाधीश जावेद इकबाल वानी की खंडपीठ ने कहा, यह सरकार का नीतिगत फैसला है जिसमें न्यायिक स्तर पर हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
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जनहित याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि याची पक्ष सरकार के इस फैसले से प्रभावित है तो वह इस मामले को लेकर उचित मंच पर सरकार को चुनौती दे सकता है। गैर सरकारी संस्था जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम ने जनहित याचिका दायर कर कोर्ट से आग्रह किया था कि जम्मू-कश्मीर में इस्लामी बैंकिंग शुरू करने के लिए सरकार को अनुमति देने का निर्देश दिया जाए।
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वर्ष 2018 में फोरम ने वित्त मंत्रालय को निर्देश देने का अनुरोध किया था। इसमें कहा गया कि दीपक मोहंती कमेटी की ओर से की गई अनुशंसा पर अमल किया जाना चाहिए। फोरम ने मांग की थी कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को व्यवस्थाएं करने को कहा जाए ताकि जम्मू-कश्मीर बैंक इस्लामी बैंकिंग से संबंधित सुविधाएं दे सके।
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याचिका पर जवाब दाखिल करते हुए आरबीआई ने कहा कि इस मामले को जांचने के लिए अंतर विभागीय समूह का गठन किया गया, जिसकी ओर से इस्लामी बैंकिंग शुरू करने से मना कर दिया गया। हालांकि सरकार ने दीपक मोहंती की अध्यक्षता में वर्ष 2015 में एक और समिति का गठन किया।
इस समिति ने कुछ मामलों में ब्याज रहित इस्लामी बैंकिंग शुरू करने की सिफारिश की थी, लेकिन इस सिफारिश को सरकार ने खारिज कर दिया था। सरकार ने 21 मार्च 2017 को पत्र के जरिए स्पष्ट किया था कि इस्लामी बैंकिंग शुरू नहीं की जा सकती।