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हाईकोर्ट ने प्लानिंग विभाग पर लगाया 20 हजार जुर्माना

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High court fined 20 thousand on planning department
जम्मू। हाईकोर्ट ने योजना विभाग पर अंबफला जानीपुर रोड को लेकर स्टेटस रिपोर्ट पेश न करने पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। 19 मार्च 2019 को हाईकोर्ट ने दो हफ्तों के भीतर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि यदि रिपोर्ट पेश न हुई तो जुर्माना लगेगा। सोमवार को कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए जुर्माना लगा दिया। चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस राजेश बिंदल वाली खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई की।
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अंबफला से जानीपुर रोड को चौड़ा करने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी। सिटिजन फोरम के चेयरमैन आरके चड्डा ने यह याचिका दायर की थी। इसमें बताया गया कि जानीपुर रोड पर जाम लगा रहता है। इसे चौड़ा करना चाहिए। साथ ही 2008 में इस रोड पर फ्लाई ओवर बनाने का भी प्रस्ताव था। इसको बाद में निरस्त कर दिया गया। कोर्ट ने कहा कि 16 जुलाई, 20 अगस्त, 20 सितंबर, 16 अक्तूबर, 29 अक्तूबर 2019 और 21 अगस्त 2020 को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के छह मौके दिए गए। बावजूद इसके रिपोर्ट नहीं सौंपी गई। लिहाजा जो अफसर इसका जिम्मेदार है, वह एडवोकेट वेलफेयर फंड में दो हफ्तों के भीतर उक्त जुर्माने की राशि जमा कराएगा। जेएनएफ
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223 करोड़ के लोन घोटाले में जमानत अर्जी खारिज
जम्मू। अस्तित्वहीन झेलम नदी कोआपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसायटी के 223 करोड़ रुपये घोटाले में चेयरमैन हिलाल अहमद मीर की जमानत अर्जी को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। जस्टिस संजय डार ने सोमवार को याचिका पर सुनवाई की। इस मामले में कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन मो शफी और उक्त सोसायटी के सचिव अब्दुल हमीद का नाम भी शामिल है। इन लोगों के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो ने केस दर्ज किया था। यह मामला नियमों को ताक पर रखकर 250 करोड़ रुपये के लोन का है। बैंक ने एक ऐसी सोसायटी के लिए लोन जारी किया, जो जमीन पर बनी ही नहीं। फर्जी दस्तावेज तैयार करके और गलत जानकारियां लेकर बैंक की क्रेडिट पॉलिसी को नजरअंदाज करते हुए यह लोन दिया गया। उक्त लोगों ने मिलकर यह घोटाला किया। जस्टिस डार ने कहा कि आरोपी पर लगे आरोप और धाराएं बहुत गंभीर हैं। इसमें अधिकतम 10 साल की सजा हो सकती है। बैंक के साथ 223 करोड़ रुपये का फ्रॉड किया गया है। इस मामले में संबंधित एजेंसी ने जो दस्तावेज दिए हैं, उसके आधार पर आरोपी के खिलाफ दर्ज केस जायज है। लिहाजा उसे जमानत नहीं दी जा सकती। इस मामले की बाकी की जांच एसीबी जल्द से जल्द पूरा करे और इस मामले में सप्लीमेंटरी चार्जशीट दायर करें। इस स्टेज पर आरोपी को जमानत नहीं दे सकते। हालांकि वह अन्य अदालत में जमानत लेने के लिए स्वतंत्र है। जेएनएफ
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