Jammu Kashmir Strawberry: कश्मीरी स्ट्रॉबेरी पर अप्रैल-मई में हुई बारिश पड़ी भारी, तीस फीसदी कम हुआ उत्पादन
कश्मीर में इन दिन स्ट्रॉबेरी की तुड़ाई जोरों पर है लेकिन कम उत्पादन के चलते किसान मायूस हैं। अप्रैल में हुई बारिशों के कारण इस साल 30 फीसदी नुकसान हुआ है।
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अप्रैल और मई में हुई मूसलाधार बारिशों से प्रसिद्ध कश्मीरी स्ट्रॉबेरी की फसल पर मार पड़ी है। 30 फीसदी कम उत्पादन होने से किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं और प्राकृतिक मार से निराश हैं। श्रीनगर के गासू खिम्बर क्षेत्र को प्रसिद्ध कश्मीरी स्ट्रॉबेरी के लिए भी जाना जाता है। क्षेत्र के करीब 50 परिवार इसकी खेती करते हैं।
इन दिन फसल की तुड़ाई जोरों पर है। लेकिन कम उत्पादन के चलते किसान मायूस हैं। अप्रैल में हुई बारिशों के कारण इस साल 30 फीसदी नुकसान हुआ है। किसान आदिल ने बताया कि बारिश के कारण स्ट्रॉबेरी की फसल को नुकसान पहुंचा है।
क्षेत्र को स्ट्रॉबेरी गांव के रूप में जाना जाता है, क्योंकि करबी 50 परिवार स्ट्रॉबेरी की खेती से जुड़े हैं। किसानों ने सरकार से उनके पक्ष में एक योजना की घोषणा करने का अनुरोध किया, ताकि भविष्य में उत्पादन में वृद्धि हो सके।
बारिश नहीं होती तो बंपर होनी थी फसल
हजरतबल के स्ट्रॉबेरी उत्पादक निसार अहमद ने बताया कि मूसलाधार बारिश से 30 प्रतिशत उत्पादन प्रभावित हुआ है। अगर पीक सीजन में बारिश नहीं हुई होती तो बंपर फसल हो सकती थी। निसार ने दावा किया है कि वह हर साल तीन हजार से चार हजार किलोग्राम स्ट्रॉबेरी का उत्पादन करता है।
बताया कि गासू खिम्बर स्ट्रॉबेरी का घर है और ग्रामीण की आय का मुख्य जरिया है। परिवहन सुविधा है और हम बिना किसी समस्या के परिमपोरा फल मंडी में उपज भेजने में सक्षम हैं।
80 हेक्टेयर भूमि पर होती है स्ट्रॉबेरी की खेती
अधिकारी के अनुसार कश्मीर में स्ट्रॉबेरी की खेती 80 हेक्टेयर भूमि में होती है। हर साल औसतन 350 से 400 मीट्रिक टन उत्पादन होता है। यह एक अच्छी फसल है। यदि विपणन तुरंत किया जाए तो इससे किसानों को अधिक लाभ मिल सकता है।
और निर्यात क्षमता इसकी कीमत बढ़ा सकती है। स्ट्रॉबेरी की कैमरोसा किस्म सबसे अच्छी किस्म है, जिसका बाजार मूल्य अच्छा है। फसल मई में शुरू होती है और किसानों को फसल के दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए।
बागवानी कश्मीर निदेशालय के विषय वस्तु विशेषज्ञ मोहम्मद अमीन भट ने बताया कि यह मौसम का पहला फल है। यह मई से जून की शुरुआत में बढ़ता है और अच्छी आय का साधन है। हालांकि इस साल बारिश से फसल प्रभावित हुई है।