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पैथोलॉजी लैब संचालक कर रहे मनमानी वसूली
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सांबा। जिला अस्पताल के आसपास चल रही पैथोलॉजी लैब के संचालक जांच के नाम पर मरीजों से मनमानी वसूली कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग यह जानते हुए कि इन लैब में जांच के नाम पर अनाप-शनाप तरीके के शुल्क लिए जाते हैं फिर भी इनके खिलाफ कोई कार्रवाई अमल में नहीं ला रहे हैं। जांच का शुल्क एक से दूसरी लैब में अलग-अलग राशि के निर्धारित किए गए हैं।
बीमारी के इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर पहले मरीजों को पांच-सात प्रकार के टेस्ट कराने के लिए लिख देते हैं। अस्पतालों में ही तैनात कर्मचारी मरीजों को अपनी जान पहचान वाली लैब पर टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। यही नहीं अस्पतालों में तैनात कुछ डॉक्टर भी मरीज को यह सलाह देते हैं कि अमुक लैब से टेस्ट कराएं और तत्काल ही उन्हें रिपोर्ट दिखाएं। मरीज पोली देवी, रतनो देवी, राजेश कुमार, जनक राज आदि ने बताया कि वह बीमार थे। उन्होंने अस्पताल में डॉक्टर से जांच कराई। डॉक्टर ने उन्हें कुछ टेस्ट करने के लिए कहा। अस्पताल में ही तैनात एक कर्मचारी ने कहा कि वह अमुक लैब से टेस्ट कराएं। बाद में जब वह रिपोर्ट लेने पहुंचे तो उनसे मनमाने धन वसूला गया। उनका कहना है कि बाद में उन्होंने एक दो लैब से उस टेस्ट जांच के रेट की जानकारी ली तो सभी का अलग-अलग रेट था। यही नहीं कई लैब की हालत भी देखते ही बनती है। ऐसे में जिला प्रशासन की ओर से भी उनके खिलाफ कोई उचित कार्रवाई नहीं की जाती है। न ही लैब मालिकों को रेट लिस्ट ही सार्वजनिक करने को कहा जाता है, जिससे लैब मालिक मनमाने ढंग से दाम वसूल कर लोगों की जेबों पर डाका मार रहे हैं। उन्होंने उप राज्यपाल से गुहार लगाई है कि इस प्रकार की लूट खसोट के खिलाफ उचित कदम उठाए जाएं।
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क्या कहते हैं अधिकारी
लैब संचालकों को अपनी रेट लिस्ट सार्वजनिक करने के निर्देश जारी किए हैं। कमेटी बनाई गई है जो समय-समय पर दौरा कर चेक करती है। यदि कोई लैब बिना पंजीकरण के पाई जाती है तो उसे सील कर दिया जाता है। यदि अस्पताल में नियुक्त किसी कर्मचारी की शिकायत आई तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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-डॉ. राजेंद्र समयाल, सीएमओ, सांबा
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बीमारी के इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर पहले मरीजों को पांच-सात प्रकार के टेस्ट कराने के लिए लिख देते हैं। अस्पतालों में ही तैनात कर्मचारी मरीजों को अपनी जान पहचान वाली लैब पर टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। यही नहीं अस्पतालों में तैनात कुछ डॉक्टर भी मरीज को यह सलाह देते हैं कि अमुक लैब से टेस्ट कराएं और तत्काल ही उन्हें रिपोर्ट दिखाएं। मरीज पोली देवी, रतनो देवी, राजेश कुमार, जनक राज आदि ने बताया कि वह बीमार थे। उन्होंने अस्पताल में डॉक्टर से जांच कराई। डॉक्टर ने उन्हें कुछ टेस्ट करने के लिए कहा। अस्पताल में ही तैनात एक कर्मचारी ने कहा कि वह अमुक लैब से टेस्ट कराएं। बाद में जब वह रिपोर्ट लेने पहुंचे तो उनसे मनमाने धन वसूला गया। उनका कहना है कि बाद में उन्होंने एक दो लैब से उस टेस्ट जांच के रेट की जानकारी ली तो सभी का अलग-अलग रेट था। यही नहीं कई लैब की हालत भी देखते ही बनती है। ऐसे में जिला प्रशासन की ओर से भी उनके खिलाफ कोई उचित कार्रवाई नहीं की जाती है। न ही लैब मालिकों को रेट लिस्ट ही सार्वजनिक करने को कहा जाता है, जिससे लैब मालिक मनमाने ढंग से दाम वसूल कर लोगों की जेबों पर डाका मार रहे हैं। उन्होंने उप राज्यपाल से गुहार लगाई है कि इस प्रकार की लूट खसोट के खिलाफ उचित कदम उठाए जाएं।
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क्या कहते हैं अधिकारी
लैब संचालकों को अपनी रेट लिस्ट सार्वजनिक करने के निर्देश जारी किए हैं। कमेटी बनाई गई है जो समय-समय पर दौरा कर चेक करती है। यदि कोई लैब बिना पंजीकरण के पाई जाती है तो उसे सील कर दिया जाता है। यदि अस्पताल में नियुक्त किसी कर्मचारी की शिकायत आई तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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-डॉ. राजेंद्र समयाल, सीएमओ, सांबा