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Jammu News: मच्छरों के पनपने के साथ सताने लगा चिकनगुनिया का डर
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- छह माह बाद भी कई पीड़ित जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द के कराह रहे
- उपचार के बाद भी नहीं मिल पा रही राहत
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। मच्छरों के पनपने के साथ शहरवासियों में डेंगू के साथ चिकनगुनिया का डर सताने लगा है। पिछले साल जम्मू में पहली बार रिकार्ड चिकनगुनिया के मामले मिले थे। मच्छरों के सीजन के छह माह बीत जाने के बाद भी कई चिकनगुनिया के पीड़ित जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द से कराह रहे हैं। लोगों को लंबा उपचार लेने के बाद भी राहत नहीं मिल पाई है, जिससे इस बार भी चिकनगुनिया का लोगों में डर होना लाजमी है।
जीएमसी के ऑर्थो विभाग के एचओडी डाॅ. संजीव गुप्ता के अनुसार आज भी चिकनगुनिया के पीड़ित जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल में पहुंच रहे हैं, हालांकि यह संख्या पहले से कम हुई है, लेकिन चिकनगुनिया का असर आज भी है। उनके अनुसार चिकनगुनिया जोड़ों में एलर्जी अर्थराइट्स है जिसका प्रभाव लंबे समय तक रह सकता है। इसमें पीड़ित को तीन सप्ताह, छह माह या उससे भी अधिक समय बाद दर्द से निजात मिल सकती है। इसमें मधुमेह, उच्च रक्तचाप सहित अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों को अधिक एहतियात बरतने की जरूरत है। बोन एंड ज्वाइंट अस्पताल जम्मू की सामान्य 400 की ओपीडी में चिकनगुनिया की दर्द की शिकायत लेकर अब भी पीड़ित पहुंच रहे हैं। गांधीनगर अस्पताल जम्मू के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक डा. प्रवीण योगराज चिकनगुनिया पर उपयुक्त उपचार लेना जरूरी है। बिना डाक्टरी परामर्श से जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द पर खुद ही दर्द निवारक दवाएं लेना हानिकारक हो सकता है। इससे किडनी सहित शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंग क्षतिग्रस्त होते हैं। चिकनगुनिया में लंबा इलाज होता है। इसमें घबराने की जरूरत नहीं है। यह जीवन में दिव्यांगता नहीं करता है। चिकनगुनिया पर डाक्टरी परामर्श लेना जरूरी है। इसमें देसी टोटके अपनाकर शुरू में दर्द से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन यह बाद में लंबे समय तक कायम रह जाती है। इसमें एलोपैथी और आयुर्वेदिक का मिश्रण उपचार संभव है। अधिकांश पीड़ित दो माह में ठीक हुए हैं।
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पिछले साल जम्मू कश्मीर में रिकार्ड चिकनगुनिया के मामले आए
जम्मू कश्मीर में वर्ष 2023 में पहली बार चिकनगुनिया के 4018 संदिग्ध मामले मिले थे, जिनमें 810 पाजिटिव हुए। इसमें किसी भी पीड़ित की मौत नहीं हुई, लेकिन दर्द की शिकायत कई पीड़ितों में आज भी है। कुल चिकनगुनिया के मामलों में जिला जम्मू में सर्वाधिक 647 मामले मिले थे, जो 80 प्रतिशत तक थे। वर्ष 2022 में चिकनगुनिया का कोई मामला नहीं मिला था। इस साल डेंगू के 50255 संदिग्ध मामलों में 6403 पाॅजिटिव आए थे और दस पीड़ितों की मौत हुई थी। इसमें जिला जम्मू में 63 प्रतिशत 4035 मामले मिले थे। वर्ष 2022 में डेंगू के 32320 संदिग्ध मामले मिले थे, जिसमें 8269 पाजिटिव आए थे और 18 लोगों की मौत हुई थी।
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केस-1
मच्छरों के डंक से परिवार के पांच सदस्य हो गए थे पीड़ित, आज भी राहत नहीं
पुराने शहर के वार्ड 2 (जुल्लाका मोहल्ला) निवासी चंद्रशेखर ने बताया कि पिछले साल उनके सहित परिवार के पांच लोगों को चिकनगुनिया हो गया था। जिसमें वह खुद, पत्नी, मां, बेटा और बहू शामिल थे। चिकनगुनिया होने पर शुरू में लगभग सभी सदस्यों को जोड़ों और मांसपेशियों का काफी दर्द रहा। आज भी बहू जोड़ों में दर्द के कारण ठीक तरह से सीढि़यां नहीं चढ़ पा रही है। मां को दर्द के कारण हर दूसरे या तीसरे दिन बुखार की टेबलेट देनी पड़ रही है। पत्नी भी जोड़ों के दर्द से कराहती रहती है। कई डाक्टरों को दिखाया, लेकिन पूरी तरह से राहत नहीं मिल पाई है।
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केस-2
महीनों बाद भी जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द
अर्जुन नगर, जानीपुर लेन-2 निवासी गौरभ गुप्ता ने बताया कि पिछले साल उनके माता पिता और उन्हें चिकनगुनिया की समस्या हो गई थी और आज भी हमें जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द की शिकायत रहती है। चिकनगुनिया होने पर शुरू में परिवार के सभी सदस्यों को काफी परेशानी हुई थी। यहां तक कि चलना फिरना भी मुश्किल हो गया था। कई तरह की दवाएं खाईं, लेकिन पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाए हैं।
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- उपचार के बाद भी नहीं मिल पा रही राहत
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। मच्छरों के पनपने के साथ शहरवासियों में डेंगू के साथ चिकनगुनिया का डर सताने लगा है। पिछले साल जम्मू में पहली बार रिकार्ड चिकनगुनिया के मामले मिले थे। मच्छरों के सीजन के छह माह बीत जाने के बाद भी कई चिकनगुनिया के पीड़ित जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द से कराह रहे हैं। लोगों को लंबा उपचार लेने के बाद भी राहत नहीं मिल पाई है, जिससे इस बार भी चिकनगुनिया का लोगों में डर होना लाजमी है।
जीएमसी के ऑर्थो विभाग के एचओडी डाॅ. संजीव गुप्ता के अनुसार आज भी चिकनगुनिया के पीड़ित जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल में पहुंच रहे हैं, हालांकि यह संख्या पहले से कम हुई है, लेकिन चिकनगुनिया का असर आज भी है। उनके अनुसार चिकनगुनिया जोड़ों में एलर्जी अर्थराइट्स है जिसका प्रभाव लंबे समय तक रह सकता है। इसमें पीड़ित को तीन सप्ताह, छह माह या उससे भी अधिक समय बाद दर्द से निजात मिल सकती है। इसमें मधुमेह, उच्च रक्तचाप सहित अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों को अधिक एहतियात बरतने की जरूरत है। बोन एंड ज्वाइंट अस्पताल जम्मू की सामान्य 400 की ओपीडी में चिकनगुनिया की दर्द की शिकायत लेकर अब भी पीड़ित पहुंच रहे हैं। गांधीनगर अस्पताल जम्मू के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक डा. प्रवीण योगराज चिकनगुनिया पर उपयुक्त उपचार लेना जरूरी है। बिना डाक्टरी परामर्श से जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द पर खुद ही दर्द निवारक दवाएं लेना हानिकारक हो सकता है। इससे किडनी सहित शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंग क्षतिग्रस्त होते हैं। चिकनगुनिया में लंबा इलाज होता है। इसमें घबराने की जरूरत नहीं है। यह जीवन में दिव्यांगता नहीं करता है। चिकनगुनिया पर डाक्टरी परामर्श लेना जरूरी है। इसमें देसी टोटके अपनाकर शुरू में दर्द से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन यह बाद में लंबे समय तक कायम रह जाती है। इसमें एलोपैथी और आयुर्वेदिक का मिश्रण उपचार संभव है। अधिकांश पीड़ित दो माह में ठीक हुए हैं।
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पिछले साल जम्मू कश्मीर में रिकार्ड चिकनगुनिया के मामले आए
जम्मू कश्मीर में वर्ष 2023 में पहली बार चिकनगुनिया के 4018 संदिग्ध मामले मिले थे, जिनमें 810 पाजिटिव हुए। इसमें किसी भी पीड़ित की मौत नहीं हुई, लेकिन दर्द की शिकायत कई पीड़ितों में आज भी है। कुल चिकनगुनिया के मामलों में जिला जम्मू में सर्वाधिक 647 मामले मिले थे, जो 80 प्रतिशत तक थे। वर्ष 2022 में चिकनगुनिया का कोई मामला नहीं मिला था। इस साल डेंगू के 50255 संदिग्ध मामलों में 6403 पाॅजिटिव आए थे और दस पीड़ितों की मौत हुई थी। इसमें जिला जम्मू में 63 प्रतिशत 4035 मामले मिले थे। वर्ष 2022 में डेंगू के 32320 संदिग्ध मामले मिले थे, जिसमें 8269 पाजिटिव आए थे और 18 लोगों की मौत हुई थी।
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केस-1
मच्छरों के डंक से परिवार के पांच सदस्य हो गए थे पीड़ित, आज भी राहत नहीं
पुराने शहर के वार्ड 2 (जुल्लाका मोहल्ला) निवासी चंद्रशेखर ने बताया कि पिछले साल उनके सहित परिवार के पांच लोगों को चिकनगुनिया हो गया था। जिसमें वह खुद, पत्नी, मां, बेटा और बहू शामिल थे। चिकनगुनिया होने पर शुरू में लगभग सभी सदस्यों को जोड़ों और मांसपेशियों का काफी दर्द रहा। आज भी बहू जोड़ों में दर्द के कारण ठीक तरह से सीढि़यां नहीं चढ़ पा रही है। मां को दर्द के कारण हर दूसरे या तीसरे दिन बुखार की टेबलेट देनी पड़ रही है। पत्नी भी जोड़ों के दर्द से कराहती रहती है। कई डाक्टरों को दिखाया, लेकिन पूरी तरह से राहत नहीं मिल पाई है।
केस-2
महीनों बाद भी जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द
अर्जुन नगर, जानीपुर लेन-2 निवासी गौरभ गुप्ता ने बताया कि पिछले साल उनके माता पिता और उन्हें चिकनगुनिया की समस्या हो गई थी और आज भी हमें जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द की शिकायत रहती है। चिकनगुनिया होने पर शुरू में परिवार के सभी सदस्यों को काफी परेशानी हुई थी। यहां तक कि चलना फिरना भी मुश्किल हो गया था। कई तरह की दवाएं खाईं, लेकिन पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाए हैं।