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Jammu News: मरीज के परिजनों का आरोप-इलाज के लिए भकटाया, जबरन डिस्चार्ज कर घर भेजा
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एसएमजीएस अस्पताल में स्ट्रेचर पर बेगम जहान बेटी के साथ।
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कहा-डॉक्टर एसएमजीएस व जीएमसी के लगवाते रहे चक्कर
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शहर के एसएमजीएस व जीएमसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। रियासी के परिवार ने आरोप लगाया है कि उनके मरीज को उचित उपचार के बजाय दो-दो अस्पतालों के चक्कर कटवा जबरन डिस्चार्ज कर दिया गया। मरीज का मेडिकेट भी नहीं खोला। उन्होंने घर लौटते समय गाड़ी में उसे निकाला, जिससे खून भी बह गया।
मौलवी नजीर अहमद निवासी थनोला, रियासी ने बताया कि वह मां बेगम जहान (80) को पिछले हफ्ते लेकर बहन के साथ जीएमसी में पहुंचे थे। मां को गले से कुछ न खाने की समस्या थी। जीएमसी में ईएनटी का मामला बता एसएमजीएस अस्पताल शालामार भेज दिया। यहां एमआरडी नंबर 733009 पर 3 जुलाई को भर्ती किया। गले से कुछ भी नीचे न उतरने पर जीएमसी में फूड पाइप डालने के लिए भेज दिया। अन्य टेस्ट के लिए भी कहा। जीएमसी में ऑपरेशन कर इमरजेंसी में रखा गया। मरीज को दोबारा एसएमजीएस में जाने को कहा। एसएमजीएस पहुंचे तो उन्होंने जीएमसी का मामला बता मरीज को लेने से मना कर दिया। इस बीच वह तीन बार जीएमसी और एसएमजीएस के चक्कर काटते रहे। आखिर एसएमजीएस से डिस्चार्ज कर छुट्टी कर दी गई, जबकि मरीज की हालत खराब है। आरोप है कि मरीज को 11 जुलाई को डिस्चार्ज के दौरान सीमित दवाएं दी गईं। निजी वाहन से वापस लौटे।
उधर, इस बारे में एसएमजीएस अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दारा सिंह से बात करनी चाही तो उन्होंने संपर्क नहीं किया।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शहर के एसएमजीएस व जीएमसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। रियासी के परिवार ने आरोप लगाया है कि उनके मरीज को उचित उपचार के बजाय दो-दो अस्पतालों के चक्कर कटवा जबरन डिस्चार्ज कर दिया गया। मरीज का मेडिकेट भी नहीं खोला। उन्होंने घर लौटते समय गाड़ी में उसे निकाला, जिससे खून भी बह गया।
मौलवी नजीर अहमद निवासी थनोला, रियासी ने बताया कि वह मां बेगम जहान (80) को पिछले हफ्ते लेकर बहन के साथ जीएमसी में पहुंचे थे। मां को गले से कुछ न खाने की समस्या थी। जीएमसी में ईएनटी का मामला बता एसएमजीएस अस्पताल शालामार भेज दिया। यहां एमआरडी नंबर 733009 पर 3 जुलाई को भर्ती किया। गले से कुछ भी नीचे न उतरने पर जीएमसी में फूड पाइप डालने के लिए भेज दिया। अन्य टेस्ट के लिए भी कहा। जीएमसी में ऑपरेशन कर इमरजेंसी में रखा गया। मरीज को दोबारा एसएमजीएस में जाने को कहा। एसएमजीएस पहुंचे तो उन्होंने जीएमसी का मामला बता मरीज को लेने से मना कर दिया। इस बीच वह तीन बार जीएमसी और एसएमजीएस के चक्कर काटते रहे। आखिर एसएमजीएस से डिस्चार्ज कर छुट्टी कर दी गई, जबकि मरीज की हालत खराब है। आरोप है कि मरीज को 11 जुलाई को डिस्चार्ज के दौरान सीमित दवाएं दी गईं। निजी वाहन से वापस लौटे।
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उधर, इस बारे में एसएमजीएस अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दारा सिंह से बात करनी चाही तो उन्होंने संपर्क नहीं किया।