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Jammu News: जन-औषधि केंद्र और सरकारी स्टोर में नहीं मिलतीं डॉक्टर की लिखी दवाइयां
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- सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों पर पर्ची पर ब्रांडेड दवाइयों के नाम लिखने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
आरएस पुरा। सरकार ने सरकारी डॉक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि मरीजों को पर्ची पर केवल दवाइयों का साल्ट नाम लिखा जाए ताकि आम जनता को सस्ती दवाइयों का लाभ मिल सके। बावजूद इसके आरएस पुरा के सरकारी अस्पतालों में यह आदेश जमीनी स्तर पर पूरी तरह लागू होता नजर नहीं आ रहा है। मरीजों को महंगी ब्रांडेड दवाइयों के नाम लिखकर दिए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं तो डॉक्टर की ओर से लिखी गई दवाइयां जन-औषधि केंद्र या सरकारी स्टोर में नहीं मिलतीं। निजी मेडिकल दुकानों से महंगी दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। पूर्व सरपंच हरबंस लाल ने बताया कि सरकार ने साफ आदेश दिए हैं तो फिर किसी भी डॉक्टर को ब्रांडेड दवाइयां लिखने का अधिकार नहीं होना चाहिए। चंदेल सिंह ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पर्ची पर जो दवाइयां लिखी जाती हैं वे अस्पताल या जन-औषधि केंद्र में नहीं मिलतीं। ग्रामीण सोमनाथ ने बताया कि कोई पूछने वाला नहीं है। डॉक्टर मनमानी कर बाजार से महंगी दवाइयां लिख देते हैं। ब्लॉक मेडिकल अधिकारी डॉ. बलविंद्र सिंह ने कहा कि डॉक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे दवाइयों का नाम लिखने से बचें और साल्ट का नाम ही लिखें। लगातार प्रयास किए जा रहे हैं कि मरीजों को वही दवाइयां लिखी जाएं जो अस्पताल में उपलब्ध हों।
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संवाद न्यूज एजेंसी
आरएस पुरा। सरकार ने सरकारी डॉक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि मरीजों को पर्ची पर केवल दवाइयों का साल्ट नाम लिखा जाए ताकि आम जनता को सस्ती दवाइयों का लाभ मिल सके। बावजूद इसके आरएस पुरा के सरकारी अस्पतालों में यह आदेश जमीनी स्तर पर पूरी तरह लागू होता नजर नहीं आ रहा है। मरीजों को महंगी ब्रांडेड दवाइयों के नाम लिखकर दिए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं तो डॉक्टर की ओर से लिखी गई दवाइयां जन-औषधि केंद्र या सरकारी स्टोर में नहीं मिलतीं। निजी मेडिकल दुकानों से महंगी दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। पूर्व सरपंच हरबंस लाल ने बताया कि सरकार ने साफ आदेश दिए हैं तो फिर किसी भी डॉक्टर को ब्रांडेड दवाइयां लिखने का अधिकार नहीं होना चाहिए। चंदेल सिंह ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पर्ची पर जो दवाइयां लिखी जाती हैं वे अस्पताल या जन-औषधि केंद्र में नहीं मिलतीं। ग्रामीण सोमनाथ ने बताया कि कोई पूछने वाला नहीं है। डॉक्टर मनमानी कर बाजार से महंगी दवाइयां लिख देते हैं। ब्लॉक मेडिकल अधिकारी डॉ. बलविंद्र सिंह ने कहा कि डॉक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे दवाइयों का नाम लिखने से बचें और साल्ट का नाम ही लिखें। लगातार प्रयास किए जा रहे हैं कि मरीजों को वही दवाइयां लिखी जाएं जो अस्पताल में उपलब्ध हों।