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Jammu News: सीमावर्ती क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टराें की कमी
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सांबा। जिले के सीमावर्ती गांवों में स्वास्थ्य केंद्रों पर स्टाफ की कमी से उप स्वास्थ्य केंद्रों में महिला मल्टी पर्पज वर्कर्स ही कामकाज चला रही हैं।
सीमावर्ती गांव बैन गलाड़ में पीएचसी की इमारत टूट चूकी है। स्वास्थ्य केंद्र पंचायत घर में चल रहा है। स्थानीय पूर्व सरपंच राम पाल ने कहा कि जैसे कि सीमा पर माहौल खराब चल रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्र कैसे सही उपचार दे सकेगा। पंचायत घर में चल रहे स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं का भारी अभाव है। स्टाफ तक की कमी है। 108 एंबुलेंस तक नही हैं। उन्होंने मांग उठाई है कि सीमावर्ती गावों के स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ की कमी को पूरा कर दवा का स्टाॅक रखा जाए। वहीं पंगदौर उप स्वास्थ्य केंद्र, कंगवाला, मावा, रीगाल, चलेआरी, राजपुरा और चक दुल्मा आदि में महिला मल्टी पर्पज वर्कर्स ही कार्यभार संभाल रही हैं। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सांबा ब्लाॅक में 57 फार्मासिस्ट की जरूरत हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग के नड़ ब्लाॅक के पास छह ही हैं। अन्य पद रिक्त हैं। यही हाल डॉक्टर का है। उप केंद्रों में महीने में दो बार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है। पीएचसी सनूरा में आयुष की डॉक्टर ही स्वास्थ्य केंद्र को संभाल रही है। स्थानीय निवासी रामपाल केे अनुसार एक्सीडेंटल अस्पताल घगवाल में डॉक्टरों का रोस्टर बनाया जाए ताकि यदि रात्रि के समय जरूरत पड़े तो लोगों का उपचार हो सके।
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डॉक्टर व स्टाफ की कमी बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है। बैन गलाड़ पीएचसी की इमारत के लिए भी अवगत करवाया गया है। बजट आने पर इमारत बनाई जाएगी। एक्सीडेंटल अस्पताल घगवाल में डॉक्टर उपलब्ध हैं। बैन गलाड़ अस्पताल में एक एंबुलेंस चौबीस घंटे रहती है। मरीजों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास सभी प्रबंध हैं।
-डॉ. ऋचा आरोड़ा बीएमओ नड़ सांबा
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सीमावर्ती गांव बैन गलाड़ में पीएचसी की इमारत टूट चूकी है। स्वास्थ्य केंद्र पंचायत घर में चल रहा है। स्थानीय पूर्व सरपंच राम पाल ने कहा कि जैसे कि सीमा पर माहौल खराब चल रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्र कैसे सही उपचार दे सकेगा। पंचायत घर में चल रहे स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं का भारी अभाव है। स्टाफ तक की कमी है। 108 एंबुलेंस तक नही हैं। उन्होंने मांग उठाई है कि सीमावर्ती गावों के स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ की कमी को पूरा कर दवा का स्टाॅक रखा जाए। वहीं पंगदौर उप स्वास्थ्य केंद्र, कंगवाला, मावा, रीगाल, चलेआरी, राजपुरा और चक दुल्मा आदि में महिला मल्टी पर्पज वर्कर्स ही कार्यभार संभाल रही हैं। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सांबा ब्लाॅक में 57 फार्मासिस्ट की जरूरत हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग के नड़ ब्लाॅक के पास छह ही हैं। अन्य पद रिक्त हैं। यही हाल डॉक्टर का है। उप केंद्रों में महीने में दो बार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है। पीएचसी सनूरा में आयुष की डॉक्टर ही स्वास्थ्य केंद्र को संभाल रही है। स्थानीय निवासी रामपाल केे अनुसार एक्सीडेंटल अस्पताल घगवाल में डॉक्टरों का रोस्टर बनाया जाए ताकि यदि रात्रि के समय जरूरत पड़े तो लोगों का उपचार हो सके।
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डॉक्टर व स्टाफ की कमी बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है। बैन गलाड़ पीएचसी की इमारत के लिए भी अवगत करवाया गया है। बजट आने पर इमारत बनाई जाएगी। एक्सीडेंटल अस्पताल घगवाल में डॉक्टर उपलब्ध हैं। बैन गलाड़ अस्पताल में एक एंबुलेंस चौबीस घंटे रहती है। मरीजों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास सभी प्रबंध हैं।
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-डॉ. ऋचा आरोड़ा बीएमओ नड़ सांबा