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Jammu News: जीएमसी में कटे होंठ व तालू वाले 39 बच्चों की स्क्रीनिंग
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- एनएचएम, स्माइल ट्रेन संस्था के सहयोग से लगाया जांच व जागरूकता शिविर लगाया
संवाद न्यूज एजेंसी
राजोरी। डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर, जीएमसी राजोेरी में क्लेफ्ट लिप और पैलेट (कटा होंठ व तालू) की जांच के साथ जागरूकता शिविर लगाया गया। इसमें जन्मजात विकृतियों से पीड़ित 39 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। अभिभावकों को क्लेफ्ट लिप एंड पैलेट के शुरुआती लक्षणों, उपचार के विकल्पों व समय पर सर्जरी बारे में जागरूक किया गया।
शिविर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तत्वावधान में गैर सरकारी संस्था स्माइल ट्रेन के सहयोग से लगाया गया। इसका उद्देश्य जन्म से ही कटे होंठ और तालू से पीड़ित बच्चों की समय रहते पहचान कर उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना था। जीएमसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शमीम अहमद ने कहा कि प्रारंभिक जांच से दीर्घकालिक विकलांगता को रोका जा सकता है। समय पर सर्जरी के माध्यम से बच्चों के जीवन स्तर में सुधार किया जा सकता है। प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. सुहैल जहूर ने इसे सरकार के साथ एक महत्वपूर्ण साझेदारी बताया। उन्होंने संबंधित स्टाफ के लिए जागरूकता सत्र भी आयोजित किया। इसमें प्रारंभिक पहचान, केस मैनेजमेंट और रेफरल प्रणाली पर जानकारी दी गई। बच्चों को आयरन, फोलिक एसिड, विटामिंस और जलपान भी वितरित किया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
राजोरी। डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर, जीएमसी राजोेरी में क्लेफ्ट लिप और पैलेट (कटा होंठ व तालू) की जांच के साथ जागरूकता शिविर लगाया गया। इसमें जन्मजात विकृतियों से पीड़ित 39 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। अभिभावकों को क्लेफ्ट लिप एंड पैलेट के शुरुआती लक्षणों, उपचार के विकल्पों व समय पर सर्जरी बारे में जागरूक किया गया।
शिविर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तत्वावधान में गैर सरकारी संस्था स्माइल ट्रेन के सहयोग से लगाया गया। इसका उद्देश्य जन्म से ही कटे होंठ और तालू से पीड़ित बच्चों की समय रहते पहचान कर उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना था। जीएमसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शमीम अहमद ने कहा कि प्रारंभिक जांच से दीर्घकालिक विकलांगता को रोका जा सकता है। समय पर सर्जरी के माध्यम से बच्चों के जीवन स्तर में सुधार किया जा सकता है। प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. सुहैल जहूर ने इसे सरकार के साथ एक महत्वपूर्ण साझेदारी बताया। उन्होंने संबंधित स्टाफ के लिए जागरूकता सत्र भी आयोजित किया। इसमें प्रारंभिक पहचान, केस मैनेजमेंट और रेफरल प्रणाली पर जानकारी दी गई। बच्चों को आयरन, फोलिक एसिड, विटामिंस और जलपान भी वितरित किया गया।
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